Himachal Pradesh, (आज समाज), शिमला: हिमाचल प्रदेश में 67.83 प्रतिशत लोगों की मौतों में हर 3 में से 2 मौतों की वजह हार्ट अटैक, कैंसर, सीओपीडी, स्ट्रोक और अन्य गैर संचारी रोग हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की इस वर्ष प्रकाशित की गई एक वैज्ञानिक स्टडी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है जो प्रदेश के हेल्थ सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
शुरू की गई है मुख्यमंत्री निरोग योजना
बता दें कि मुख्यमंत्री निरोग योजना उक्त रोगों पर काबू पाने के लिए शुरू की गई है जिसके क्रियान्वयन के दौरान वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया कि जमीनी स्तर पर कई स्वास्थ्य कर्मचारियों को इंटीग्रेटेड निरोग क्लीनिक के दिशानिर्देश व कार्यप्रणाली की पर्याप्त जानकारी नहीं है। स्टडी रिपोर्ट के अनुसार इसका असर योजना को प्रभावी तौर पर लागू करने तथ रोगियों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाने पर पड़ रहा है।
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इतने लोगों का किया गया मूल्यांकन
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री निरोग योजना के तहत प्रदेश में यहअध्ययन करवाया है और इस साल जर्नल आफ काम्प्रिहेंसिव हेल्थ में संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। वर्ष 2024 में स्टडी के लिए राज्य के 132 स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, 51 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों तथा 2,748 लाभार्थियों का मूल्यांकन किया गया।
अब भी स्वास्थ्य कर्मियों की ट्रेनिंग में कमियां
इसका मकसद इस बात का पता लगाना था कि गैर संचारी रोगों पर काबू पाने, स्क्रीनिंग तथा इलाज के लिए तैयार सिस्टम जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी है। स्टडी के दौरान सामने आया कि स्वास्थ्य संस्थानों में मधुमेह यानी शुगर और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की जांच तथा दवाओं की उपलब्धता में इंप्रूवमेंट हुई है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी व स्वास्थ्य कर्मियों की ट्रेनिंग में कमियां अब भी बनी हुई हैं।


