Parivartini Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी के दिन योग निद्रा में करवट लेते हैं भगवान विष्णु

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Parivartini Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी के दिन योग निद्रा में करवट लेते हैं भगवान विष्णु
Parivartini Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी के दिन योग निद्रा में करवट लेते हैं भगवान विष्णु

कब रखा जाएगा परिवर्तिनी एकादशी का व्रत, जानें पूजा विधि
Parivartini Ekadashi, (आज समाज), नई दिल्ली: सनातन धर्म में परिवर्तिनी एकादशी का बहुत महत्व है। यह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है और इसे पार्श्व एकादशी या जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा में करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं।

इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कब रखा जाएगा परिवर्तिनी एकादशी का व्रत। साथ ही जानें पूजा विधि और महत्व।

शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 03 सितंबर को सुबह (ब्रह्म मुहूर्त) 03 बजकर 53 मिनट पर होगी। वहीं, एकादशी तिथि का समापन 04 सितंबर को सुबह 04 बजकर 21 मिनट पर होगा। इस प्रकार 03 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाएगी। वहीं, 04 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का पारण किया जाएगा।

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी को पद्म एकादशी और जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान योग निद्रा में वास कर रहे भगवान विष्णु करवट लेते हैं। यही वजह है कि इस दिन को परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि

  • परिवर्तिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठे और स्नान के बाद पीले रंग के वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को प्रणाम करें और पूजे के लिए मंदिर की अच्छे से साफ सफाई के बाद सबसे पहले भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं।
  • फिर भगवान विष्णु को पीले फूल, अक्षत, सुपारी, तुलसी के पत्ते आदि अर्पित करें। साथ ही इस दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का लगातार जप करते रहें।
  • इसके बाद व्रत कथा का पाठ करें और अंत में भगवान विष्णु की आरती करें। बता दें कि एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है।

भगवान विष्णु के वामन अवतार की भी पूजा की जाती है

इस दिन दान करने से विशेष पुण्य फल मिलता है। परिवर्तिनी एकादशी की कथा सुनने मात्र से ही हजारों अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है, ऐसा धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है। परिवर्तिनी एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की भी पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है।

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