ग्रामीण आर्थिकता में उछाल लाने वाली फसल है ब्रोकली
Broccoli Farming, (आज समाज), नई दिल्ली: भारत में, ब्रोकली ग्रामीण आर्थिकता में उछाल लाने वाली फसल है। यह ठंडे मौसम वाली फसल है और यह बसंत ऋतु में उगायी जाती है। यह आयरन, कैल्शियम और विटामिन आदि जैसे पोषक तत्व एक अच्छा स्त्रोत है। इस फसल में 3.3 प्रतिशत प्रोटीन और विटामिन ए और सी की उच्च मात्रा शामिल होती है।
इसमें रिवोफलाईन, नियासीन, और थियामाइन की बहुत मात्रा शामिल होती है और कैरोटिनोइड्ज भी उच्च मात्रा में शामिल होती है। इसे मुख्य तौर पर सलाद के तौर पर प्रयोग किया जाता है और इसे हल्का पकाकर भी खाया जा सकता हैं। इसे मुख्य तौर पर ताजा, ठंडा करके या सलाद के लिए बेचा जाता है।
मिट्टी
ब्रोकली की उचित और अच्छी वृद्धि के लिए नमी वाली मिट्टी की जरूरत होती है। ब्रोकली की खेती के लिए अच्छी खाद वाली मिट्टी ठीक होती है। ब्रोकली की खेती के लिए मिट्टी का पीएच 5.0-6.5 होना चाहिऐ।
बिजाई का समय
इसकी बिजाई के लिए मध्य अगस्त से मध्य सितंबर तक का समय ठीक होता है।
फासला
कतारों में फसला 4545 सें.मी. रखें।
बीज की गहराई
बीज को 1—1.5 सें.मी की गहराई पर बोयें।
बिजाई का ढंग
इसकी बिजाई कतारों में या छिडकाव से भी कर सकते हैं।
बीज की मात्रा
एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 250 ग्राम बीजों का प्रयोग करें।
बीज का उपचार
मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए बिजाई से पहले बीजों को गर्म पानी (58 डिगरी सेल्सियस) में 30 मिनट के लिए रखकर उपचार करें।
खाद
नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोर्स 25 किलो (सिंगल सुपर फॉसफेट 155 किलो) और पोटाशियम 25 किलो (म्यूरेट आॅफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें। रोपाई से पहले रूडी की खाद , फासफोर्स और पोटाशियम की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा डालें। बाकि बची नाइट्रोजन की मात्रा रोपाई से एक महीने के बाद डालें।
खरपतवार नियंत्रण
नदीनो की रोकथाम के लिए रोपाई से पहले फलूक्लोरालिन (बसालिन) 1-2 लीटर को प्रति 600-700 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें और रोपण से 30-40 दिनो के बाद हाथ से गड़ाई करें। नए पौधो के रोपाई से एक दिन पहले पैंडीमैथालिन 1 लीटर प्रति एकड़ पर स्प्रे करें।
सिंचाई
रोपण के तुरंत बाद , पहली सिंचाई करें। मिट्टी जलवायु या मौसम की स्थिति अनुसार गर्मियों में 7-8 दिनों और सर्दियों में 10-15 दिनो के फासले से सिंचाई करें।
हानिकारक कीट और रोकथाम
- थ्रिप्स: ये छोटे कीट होते हैं जो कि हल्के पीले से हल्के भूरे रंग के होते हैं और इसके लक्षण नष्ट हुए और सिल्वर रंग के पत्ते हो जाते हैं।रोकथाम: यदि चेपे और तेले का नुकसान अधिक हो तो इमीडाक्लोप्रिड 17.8 एस एल 60 मि.ली. को प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ पर स्प्रे करें।
- निमाटोड: इसके लक्षण है पौधे के विकास में कमी और पौधे का पीला पड़ना आदि।रोकथाम: इसका हमला दिखने पर 5 किलो फोरेट या कार्बोफ्यूरॉन 10 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से बुरकाव करें।
- चमकीली पीठ वाला पतंगा: इसका लार्वा पत्तों की ऊपरी और निचली सतह को नष्ट करता है और परिणामस्वरूप यह पूरे पौधे को नुकसान पहुंचाता है।
- रोकथाम: यदि हमला बढ़ जाये तो स्पिनोसैड 25 प्रतिशत एस सी 80 मि.ली. को प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
फसल की कटाई
मैदानी क्षेत्रों में फल की तुड़ाई का समय दिसंबर से मार्च का महीना है। जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में नवंबर से अप्रैल का महीना है। अगेती पकने वाली किस्म 40-50 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। मध्यम समय की किस्म 60-100 दिनों में और देरी से पकने वाली किस्म 100-115 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है।
ब्रोकली की मुख्य किस्म
ब्रोकली की मुख्य किस्में हरे, सफेद और बैंगनी रंग की होती हैं। हरी ब्रोकली में नाइन स्टार, पेरिनियल, इटैलियन ग्रीन स्प्राउटिंग और ग्रीन हेड लोकप्रिय हैं, जबकि बैंगनी ब्रोकली में पर्पल मैजिक और मैराथन जैसी किस्में शामिल हैं। विभिन्न किस्में आकार, स्वाद और कटाई के समय के आधार पर भी भिन्न होती हैं।