Radha Friends: जानिए कौन हैं राधा रानी की आठ सखियां

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Radha Friends: जानिए कौन हैं राधा रानी की आठ सखियां
Radha Friends: जानिए कौन हैं राधा रानी की आठ सखियां

इनके बिना अधूरी है राधा-कृष्ण की लीलाएं
राधा रानी की पूजा से कान्हा होते हैं खुश
Radha Friends, (आज समाज), नई दिल्ली: राधा रानी की आठ प्रिय सखियां जिन्हें अष्ट सखी कहा जाता है वे उनके जीवन का अभिन्न अंग हैं। ललिता विशाखा चित्रा इन्दुलेखा चम्पकलता रंगदेवी तुंगविद्या और सुदेवी अलग-अलग स्वभाव की हैं जो राधा-कृष्ण की लीलाओं को पूर्ण करती हैं। कोई श्रृंगार करती है तो कोई प्रेम संदेश पहुंचाती है हर सखी का अपना विशेष महत्व है। ये सखियां राधा जी की आत्मा के समान हैं। ये सखियां केवल सहेलियां नहीं, बल्कि उनकी आत्मा के समान हैं। राधा-कृष्ण की हर लीला में ये सखियां सहभागी होती हैं।

आठों सखियों का स्वभाव होता है अलग-अलग

राधा जी का शृंगार हो या कान्हा से मिलने की चेष्टा, उनके सौंदर्य की सेवा हो या प्रेम के संदेश पहुंचाने का कार्य हर जगह सखियां ही सबसे पहले साथ देती हैं। इन आठों सखियों का स्वभाव अलग-अलग है, जैसे आठ रंगों से इंद्रधनुष बनता है, वैसे ही इन आठ सखियों से राधा-कृष्ण की लीलाएं पूर्ण होती हैं, तो आइए जानते हैं राधा रानी की अष्ट सखियों के बारे में।

  • ललिता देवी: अष्ट सखियों में सबसे बड़ी और प्रमुख ललिता सखी थीं। वे हमेशा राधा जी के पास रहतीं। ललिता देवी को सुगंध का अच्छा ज्ञान था और वे राधा जी को पान का बीड़ा (ताम्बूल) अर्पित करती थीं। वे राधा-कृष्ण के मिलन में कभी प्यारी शरारतें करतीं, तो कभी उनकी राह आसान बनातीं।
  • विशाखा देवी: विशाखा अपनी सुंदरता और तेजस्विता के लिए जानी जाती थीं। उनकी चमक बिजली जैसी मानी जाती थी। वे राधा रानी को चन्दन, कर्पूर और सुंदर वस्त्र अर्पित करती थीं। उत्सवों और श्रृंगार को भव्य बनाने में उनकी भूमिका सबसे खास थी।
  • चित्रा देवी: चित्रा के शरीर की आभा केसर जैसी सुनहरी थी। वे हल्के रंग की साड़ी पहनती थीं और राधा जी का श्रृंगार करती थीं। चित्रा की विशेषता थी कि वे राधा जी के मन की बात बिना कहे ही समझ जाती थीं।
  • इन्दुलेखा देवी: इन्दुलेखा लाल साड़ी पहनती थीं और हमेशा मुस्कुराती रहती थीं। वे नृत्य और गीतों में निपुण थीं। उनकी मधुर वाणी से हर माहौल आनंदमय हो जाता था। वे राधा जी को खुश रखने में हमेशा आगे रहती थीं।
    चम्पकलता: राधा रानी की प्रिय सखी चम्पकलता अपनी मधुर वाणी और सेवा-भाव के लिए जानी जाती हैं। वे हमेशा राधा-कृष्ण की लीलाओं में साथ रहती हैं और उनकी छोटी-छोटी आवश्यकताओं का ध्यान रखती हैं। चम्पकलता का स्वभाव बेहद स्नेहमय और कोमल है, जो हर भक्त के हृदय को भक्ति-रस से भर देता है।
  • रंगदेवी: रंगदेवी सखी का स्वभाव हंसमुख और चंचल था। वे हमेशा राधा रानी और श्रीकृष्ण की लीलाओं में रंग और आनंद भर देती थीं। कहा जाता है कि होली और उत्सव के समय रंगदेवी सखी का विशेष महत्व होता है क्योंकि वे रंगों से राधा-कृष्ण की रास-लीला को और भी मनमोहक बना देती थीं।
  • तुंगविद्या देवी: तुंगविद्या अपनी बुद्धिमत्ता और कला के लिए विख्यात थीं। वे पीली साड़ी पहनती थीं और संगीत में विशेष निपुण थीं। वे राधा-कृष्ण की गोपियों को गीत और ज्ञान से आनंदित करती थीं।
  • सुदेवी देवी: सुदेवी मूंगे के रंग की साड़ी पहनती थीं। वे राधा जी को शुद्ध और ठंडा जल पिलाती थीं। जल को पवित्र और निर्मल करने की विशेष विद्या उन्हें आती थी। अपनी सेवा और सादगी के कारण वे राधा जी की बहुत प्रिय थीं।

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