Tibet-Nepal Flood News: नेपाल और चीन की सीमा पर विनाशकारी बाढ़ के बाद अब एक खतरे ने चिंता बढ़ा दी है। ग्लेशियर और मलबे के कारण बनी एक प्राकृतिक झील अब ओवरफ्लो होने लगी है। झील से पानी बाहर निकलने के बाद नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। हालात को देखते हुए नेपाली सेना ने प्रभावित इलाके में राहत और बचाव अभियान को अस्थायी तौर पर रोक दिया है। अधिकारियों के मुताबिक अगले करीब 90 मिनट बेहद अहम हैं, क्योंकि पानी का बहाव बढ़ने पर पहले से बाढ़ से तबाह इलाकों में एक बार फिर तबाही मचा सकता है।
ग्लेशियर टूटने के बाद बनी थी झील
यह झील तिब्बत में नेपाल सीमा के पास ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट के ऊपर बनी है। बुधवार को ग्लेशियर और पहाड़ी मलबे के बड़े हिस्से के खिसकने से नदी का रास्ता बाधित हुआ, जिसके बाद पानी जमा होकर झील का रूप लेने लगा। पहले से ही इस इलाके में भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कें, पुल, मकान और दूसरी बुनियादी सुविधाएं बाढ़ और मलबे की चपेट में आई हैं। शुरुआती जांच के मुताबिक ग्लेशियर के साथ पहाड़ी चट्टानों का बड़ा हिस्सा भी धंसकर नीचे आया था, जिससे अचानक भारी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मलबा नदी में पहुंचा।
ओवरफ्लो के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन रोका
28 अगस्त को झील का पानी उसके किनारे से बाहर निकलने की सूचना सामने आने के बाद खतरा और बढ़ गया। Reuters के अनुसार नेपाल में अधिकारियों ने करीब 90 मिनट के लिए बचाव अभियान रोक दिया, जबकि चीन की ओर से भी बचावकर्मियों और वाहनों को सुरक्षित स्थान पर हटाया गया है। अधिकारियों की प्राथमिकता इस समय रेस्क्यू टीमों और स्थानीय लोगों को संभावित अचानक आने वाले तेज जलप्रवाह से बचाना है। सीमावर्ती इलाकों में लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की चेतावनी दी गई है।
झील में 25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी
चीन की निगरानी के मुताबिक झील में अब 25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी जमा हो चुका है। यह आंकड़ा एक दिन पहले लगाए गए करीब 15-20 लाख क्यूबिक मीटर के अनुमान से काफी ज्यादा है। चिंता सिर्फ मौजूदा पानी को लेकर नहीं है। चीन के अधिकारियों का अनुमान है कि अगले तीन दिनों में झील में करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी पहुंच सकता है। इसका अधिकतम प्रवाह करीब 1 सितंबर के आसपास रहने की आशंका जताई गई है। इससे प्राकृतिक बांध के टूटने और अचानक बड़े पैमाने पर पानी नीचे की ओर आने का जोखिम बढ़ गया है।
टूट गई झील तो फिर आ सकती है तबाही
प्राकृतिक अवरोध से बनी ऐसी झील को बैरियर लेक कहा जाता है। जब भूस्खलन, चट्टानों, बर्फ या मलबे के कारण नदी का रास्ता बंद हो जाता है तो उसके पीछे पानी जमा होने लगता है। अगर यह प्राकृतिक बांध कमजोर होकर टूट जाए, तो जमा पानी और मलबा बहुत तेजी से नीचे की ओर बह सकता है। यही वजह है कि चीन और नेपाल दोनों इस झील पर लगातार नजर रख रहे हैं। खतरा केवल बाढ़ तक सीमित नहीं है। अस्थिर पहाड़ी ढलानों के कारण भूस्खलन और अन्य द्वितीयक आपदाओं की आशंका भी बनी हुई है।
ग्यिरोंग पोर्ट और निचले इलाकों पर नजर
झील के नीचे स्थित ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पहले ही बाढ़ और मलबे से बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। ऐसे में अगर झील का प्राकृतिक बांध टूटता है तो निचले इलाकों में दोबारा तेज पानी और मलबा पहुंच सकता है। चीन ने जोखिम वाले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर संभावित प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने और पानी के प्रवाह तथा मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
नेपाल और तिब्बत में सैकड़ों लोगों की मौत
चीन की ओर से गुरुवार को बताया गया था कि तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में बाढ़ और मलबे की घटना के बाद 558 लोग लापता हैं, जिनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। चीन की ओर से तीन मौतों की पुष्टि की गई थी। दूसरी ओर नेपाल में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शुक्रवार सुबह नेपाल में 469 मौतों की पुष्टि की और दोनों देशों में कुल मिलाकर 1,500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी दी। यह संख्या लगातार बदल रही है, क्योंकि बचाव दल मलबे और बाढ़ प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं।
ड्रोन और सैटेलाइट से की जा रही निगरानी
बिगड़ते हालात के बीच चीन ने बचाव और निगरानी अभियान में ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। अधिकारियों को इलाके की तस्वीरें और डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि ड्रोन के जरिए प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया जा रहा है। चीन की इंजीनियरिंग टीम झील की स्थिति का आकलन कर रही है। अधिकारियों के सामने एक विकल्प प्राकृतिक बांध में नियंत्रित तरीके से पानी निकालने के लिए ड्रेनेज चैनल बनाने का भी है। लेकिन अस्थिर पहाड़ी इलाके और लगातार बारिश के कारण यह काम बेहद जोखिम भरा है।
पहले से तबाह नेपाल पर दोहरी मार
26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। कई जगह सड़कें और पुल बह गए, घर मलबे में दब गए और बिजली तथा संचार व्यवस्था प्रभावित हुई। इसके बाद अब ऊपर बनी झील के ओवरफ्लो होने से दूसरी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। फिलहाल नेपाल और चीन दोनों की एजेंसियां झील के जलस्तर और नदी के बहाव पर नजर रख रही हैं। बचाव दलों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है और हालात सामान्य होने के बाद ही रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू करने का फैसला लिया जाएगा।


