अनंत चतुर्दशी के दिन ही समाप्त होता है 10 दिवसीय गणेशोत्सव
Anant Chaturdashi (आज समाज), नई दिल्ली: भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी कहा जाता है। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। इस दिन भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश को सभी देवताओं से श्रेष्ठ घोषित किया था। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भी नया काम शुरू होता है भगवान गणेश को याद किया जाता है।
गणेश चतुर्थी का उत्सव, 10 दिवसीय गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है, जिसे गणेश विसर्जन दिवस के रूप में भी जाना जाता है। तो आइए जानते है अनंत चतुर्दशी कब शुरू होगी और इसकी पूजा विधि क्या है।
6 सितंबर को मनाई जाएंगी अनंत चतुर्दशी
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरूआत 06 सितंबर को देर रात 03 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 07 सितंबर को देर रात 01 बजकर 41 मिनट पर होगा। उदया तिथि को देखते हुए इस साल 06 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी।
पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- इसके बाद, भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- एक वेदी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
- एक कलश में जल भरकर रखें।
- भगवान विष्णु की षोडशोपचार विधि से पूजा करें।
उन्हें पीले फूल, चंदन, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। - भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें।
- अंत में आरती करें।
वहीं, जो लोग गणेश उत्सव मनाते हैं, वे इस दिन गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करके विसर्जन करें। विसर्जन से पहले, भगवान गणेश की आरती करें और उनसे अगले साल जल्दी आने की प्रार्थना करें।
अनंत चतुर्दशी पूजन मंत्र
1. शांताकारम भुजङ्गशयनम पद्मनाभं सुरेशम।
विश्वाधारं गगनसर्द्श्यं मेघवर्णम शुभांगम।
लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।
वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम।
2. दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जयालिङ्गितमाब्धि पुत्र्या-लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥
3.ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकायेर्षु सर्वदा॥
4.ॐ नमो ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्लीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी मम गृहे धनं देही चिन्तां दूरं करोति स्वाहा ॥
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