Delhi News: दिल्ली में बन रहा आसमान से ऊंचा रावण का पुतला, 211 फीट ऊंचा, इन दो जगहों पर भी विशाल पुतले

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इस साल दशहरा के मौके पर दिल्ली, पंचकूला और देहरादून में कुल 1.10 करोड़ रुपये की लागत से विशाल रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतले का रिकॉर्ड कायम करने वाले अंबाला के बराड़ा ब्लॉक से तेजेंद्र चौहान इस बार जगहों पर पुतले तैयार कर रहे हैं।

Delhi News: इस साल दशहरा के मौके पर दिल्ली, पंचकूला और देहरादून में कुल 1.10 करोड़ रुपये की लागत से विशाल रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतले का रिकॉर्ड कायम करने वाले अंबाला के बराड़ा ब्लॉक से तेजेंद्र चौहान इस बार जगहों पर पुतले तैयार कर रहे हैं।

कुल 1.10 करोड़ का होगा खर्च

इन तीनों पुतलों पर स्थानीय रामलीला कमेटियों द्वारा कुल एक करोड़ दस लाख रुपये का खर्च होगा। इन में ही इन दिनों तेजेंद्र चौहान जुटे हैं और दशहरे से पहले इन रावण के पुतलों को खड़ा कर दिया जाएगा। हालांकि, इस बार राजस्थान के कोटा में चौहान अपने कारीगरों के साथ नहीं पहुंचे हैं, जबकि उक्त तीनों स्थानों पर साढ़े तीन माह से रावण के पुतलों को तैयार किया जा रहा है।

  • दिल्ली: द्वारका सेक्टर 10 रामलीला ग्राउंड में 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया जा रहा है।
  • पंचकूला: सेक्टर 5 के शालीमार ग्राउंड में 221 फीट ऊंचा रिकॉर्ड-तोड़ रावण तैयार हो रहा है।
  • देहरादून: इस शहर के लिए 181 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि बराड़ा से शुरू हुआ यह सफर साल 2017 में खत्म हो गया था जब चौहान ने यहां पर 210 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण किया था। जगह कम होने के कारण इसे पंचकूला शिफ्ट कर दिया गया था जहां पर 221 फीट का पुतला तैयार किया गया था। अब इसी ऊंचाई का पुतला दिल्ली और पंचकूला में तैयार होगा, जबकि देहरादून में इसकी ऊंचाई 181 फीट रखी गई है।

20.50 टन लोहे का इस्तेमाल

दिल्ली और पंचकूला में जो रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं, उनमें प्रति पुतले में सात टन लोहा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह देहरादून में बनने वाले रावण के पुतले में साढ़े छह टन लोहा इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा, प्रति पुतले में दो लाख रुपये की आतिशबाजी भी लगाई जाएगी, जो ईको फ्रेंडली होगी।

120 कारीगरों की लगी टीम

इन तीनों पुतलों को बनाने में अंबाला के ही कारीगर जुटे हैं। बराड़ा से चौहान अपनी टीम लेकर चलते हैं। एक पुतला बनाने में चालीस करीगरों की टीम लगती है, यानी तीनों पुतले बनाने में कुल 120 कारीगर जुटे हैं।

क्रेन के सहारे बनाते हैं पुतले

खास बात यह है कि इन पुतलों को बनाने के बाद खड़ा करने के लिए क्रेन का सहारा लेना पड़ता है। यह पुतले भी टुकड़ों में बनते हैं। पुतले का हर हिस्सा अलग तैयार किया जाता है और बाद में इनको जोड़ा जाता है। यह पुतले कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगते हैं। देश में बनने वाले रावण के ये सबसे बड़े पुतले हैं।