Kashi Mathura Sambhal Mandir Masjis Dispute: हिंदू-मुस्लिम पक्ष ने संभल, मथुरा और ज्ञानवापी पर मध्यस्थता का प्रस्ताव ठुकराया

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Kashi Mathura Sambhal Mandir Masjis Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने 21 से 23 अगस्त के बीच ‘समाधान समारोह’ के नाम से आयोजित हो रहे लोक अदालत कार्यक्रम के लिए इन मामलों के पक्षकारों को भी नोटिस भेजा था।
Kashi Mathura Sambhal Mandir Masjis Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने 21 से 23 अगस्त के बीच ‘समाधान समारोह’ के नाम से आयोजित हो रहे लोक अदालत कार्यक्रम के लिए इन मामलों के पक्षकारों को भी नोटिस भेजा था।

सुप्रीम कोर्ट में कहा, विवाद का समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी फैसले के माध्यम से होना चाहिए
Kashi Mathura Sambhal Mandir Masjis Dispute, (आज समाज), नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने संभल, मथुरा और वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर प्रस्ताव दिया कि हिंदू-मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालें, लेकिन दोनों ही पक्षों ने इस पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि जटिल कानूनी सवालों को देखते हुए कोर्ट में सुनवाई जरूरी है।

ऐसे में अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और उसके निर्णय पर टिक गई हैं। दोनों पक्षों का कहना है कि इन विवादों में महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक प्रश्न जुड़े हैं, जिनका समाधान केवल अदालत के फैसले से ही संभव है।

तीनों मंदिर विवादों का कानूनी आधार और वर्तमान स्थिति

  • ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद का निर्माण प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर के अवशेषों पर हुआ था, जबकि मुस्लिम पक्ष इन दावों का विरोध करता है और Places of Worship Act, 1991 का हवाला
  • मथुरा विवाद में हिंदू पक्ष शाही ईदगाह परिसर को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि का हिस्सा बताता है और 1968 के समझौते की वैधता पर प्रश्न उठाता है। दूसरी ओर, मस्जिद प्रबंधन इस समझौते और मौजूदा कानूनों के आधार पर अपना पक्ष रख रहा है
  • संभल में हिंदू पक्ष के अनुसार प्राचीन ‘हरिहर मंदिर’ (श्री हरि मंदिर) को तोड़कर संभल की ‘शाही जामा मस्जिद’ बनाई गई थी। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद मुगल शासक बाबर द्वारा 16वीं शताब्दी में एक प्राचीन ‘हरिहर मंदिर’ (श्री हरि मंदिर) को तोड़कर बनाई गई थी। वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद हमेशा से इबादत की जगह रही है। संभल विवाद में याचिका के आधार पर अदालत द्वारा कराए गए सर्वे के बाद व्यापक तनाव और हिंसा हुई थी।

अब सामान्य प्रक्रिया के तहत नियमित सुनवाई होगी

जब दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत के दरवाजे बंद कर दिए हैं, तो अब सारा दारोमदार देश की न्याय व्यवस्था पर आ गया है। सुप्रीम कोर्ट और संबंधित अदालतों में अब सामान्य प्रक्रिया के तहत नियमित सुनवाई होगी। दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक सबूत, गवाह और कानूनी दलीलें पेश करेंगे।

जाहिर सी बात है कि जब मामला पूरी अदालती प्रक्रिया से गुजरेगा, तो अंतिम फैसले तक पहुंचने में अभी लंबा वक्त लग सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि अगर भविष्य में कभी दोनों पक्षों का मन बदला, तो मध्यस्थता के विकल्प पर दोबारा विचार किया जा सकता है।

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