गुरुवार को बाढ़ से तीन की मौत, चार लापता, सेना की टीमें डटी
Punjab Flood Update (आज समाज), चंडीगढ़ : इस साल मॉनसून सीजन जहां पहाड़ी राज्यों के लिए मुसिबत बनकर बरस रहा है वहीं मैदानी एरिया में भी खूब कहर बरपा रहा है। उत्तरी भारत के मैदानी एरिया में इन दिनों जो प्रदेश सबसे ज्यादा बाढ़ ग्रस्त है वह है पंजाब। पहाड़ों और डैमों से आ रहा पानी पंजाब के गांवों और शहरों में तबाही मचा रहा है। हालात यह है कि सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के साथ-साथ अन्य बचाव दल लगाए जाने के बाद भी स्थिति से निपटना मुश्किल साबित हो रहा है।
गुरुवार को फिर से खोले गए पौंग डैम के गेट
गुरुवार दोपहर पौंग डैम के फ्लड गेट खोलने पड़े, क्योंकि सुबह जलस्तर खतरे के निशान 1390 फीट से बढ़कर 1396 फीट तक पहुंच गया था। माधोपुर और गुरदासपुर में नदियों में आए उफान से तीन लोगों की मौत हुई, जबकि पठानकोट में एक बच्ची का शव मिला और तीन लोग लापता हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिले पठानकोट, गुरदासपुर, तरनतारन, होशियारपुर, कपूरथला, फिरोजपुर और फाजिल्का हैं। इन जिलों के 150 से अधिक गांवों में पानी भर गया, कई जगह 5-7 फीट तक जलस्तर दर्ज किया गया। हालात इतने बिगड़े कि रेस्क्यू के लिए सेना को ग्राउंड पर उतरना पड़ा। पूरे दिन सेना ने प्रभावित क्षेत्रों से 5290 लोगों का रेस्क्यू किया।
सीएम मान फील्ड में उतरे, प्रभावित एरिया का दौरा किया
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी गुरुवार दोपहर ब्यास नदी के बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया साथ ही वो अमृतसर के अजनाला क्षेत्र में भी पहुंचे और लोगों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने अपने मंत्रियों को भी सक्रिय रहकर लोगों की मदद के निर्देश दिए। उधर, सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि इस बार पानी का प्रवाह 1988 और 2023 की तुलना में अधिक है और डैम इसे संभाल नहीं पा रहे हैं।
फाजिल्का में राहत कार्यों की समीक्षा के दौरान मंत्री बरिंदर गोयल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले जब पंजाब से पानी लेना था तो सभी कानून ताक पर रख दिए गए, लेकिन अब जब पंजाब बाढ़ की मार झेल रहा है तो कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा।