GDP Growth Rate : भारत को बनाए रखनी होगी 8 प्रतिशत वृद्धि दर : सीईए

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GDP Growth Rate : भारत को बनाए रखनी होगी 8 प्रतिशत वृद्धि दर : सीईए
GDP Growth Rate : भारत को बनाए रखनी होगी 8 प्रतिशत वृद्धि दर : सीईए

कहा, विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए यह जरूरी, यह भी माना की देश के सामने हैं कई चुनौतियां

GDP Growth Rate (आज समाज), बिजनेस डेस्क : मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को लंबे समय तक लगभग आठ प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। हालांकि, उन्होंने कुछ संभावित चुनौतियों का भी जिक्र किया। यदि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने पर भी विकास दर प्रभावित होगी। ऐसी स्थिति में वृद्धि दर घटकर करीब छह प्रतिशत तक आ सकती है।भारत का बाहरी क्षेत्र अब काफी मजबूत हो गया है। देश की व्यापक आर्थिक बुनियाद वैश्विक झटकों का सामना करने के लिए बेहतर स्थिति में है। एक आयोजन के दौरान नागेश्वरन ने बताया कि बाहरी क्षेत्र के जोखिमों में काफी कमी आई है।

रुपए की गिरावट संभालने की कोशिश में आरबीआई

भारतीय रिजर्व बैंक को रुपये को संभालने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करने का दबाव भी कम है। उन्होंने कहा कि बाहरी मोर्चे पर सबसे कठिन दौर अब पीछे छूट चुका है। हाल के वैश्विक संकटों के दौरान विवेकपूर्ण आर्थिक प्रबंधन और समय पर नीतिगत हस्तक्षेपों से यह बेहतर स्थिति बनी है। नागेश्वरन ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के 6.6 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि अनुमान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति नियंत्रण में है।

एआई क्षेत्र में नए अवसर पैदा करें

रोजगार और तकनीक के विषय पर नागेश्वरन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को ऐसे कौशल विकसित करने होंगे जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ काम कर सकें। इससे वे स्वचालन के कारण होने वाले बदलावों से कम प्रभावित होंगे। नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तैयारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक सामान्य तकनीक बन जाएगी। भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व के लिए मजबूत प्रतिभा आधार और बड़े आंकड़े संसाधन चाहिए।

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