HomeAssembly Election 202220 में से 17 मुख्यमंत्री देने वाली मालवा बेल्ट पिछड़ी Malwa Belt...

20 में से 17 मुख्यमंत्री देने वाली मालवा बेल्ट पिछड़ी Malwa Belt Backward

Malwa Belt Backward

आज समाज डिजिटल, अंबाला:
Malwa Belt Backward : पंजाब को मुख्यत: तीन बेल्टों में बांटा गया है। ये हैं मालवा, माझा और दोआबा। यदि बात करें मालवा बेल्ट की तो यह क्षेत्र अब तक पंजाब के 17 मुख्यमंत्री दे चुका है।  कुल 117 विधानसभा सीटों में से सबसे अधिक 69 सीटें यहीं की हैं। इसी क्षेत्र को सीएम की नर्सरी भी कहते है।

पंजाब के 20 में से 17 मुख्यमंत्री यहीं से थे। यहां यदि बात करें विकास की तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यह माझा और दोआबा से पिछड़ा हुआ है। क्षेत्रफल और विधानसभा सीट के लिहाज से पंजाब का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र होने के बाद भी सूबे के नेताओं की उदासीनता का शिकार ही रहा है। दोआबा और माझा में जितना विकास होना चाहिए था उतना मालवा में नहीं हो पाया।

Also Read : अमरिंदर का बचाव करना मेरी गलती- पंजाब हार पर उठे सवाल तो मीटिंग में सोनिया बोलीं Mistake Of Defending Amarinder

कैंसर और आत्महत्या भी यहां अधिक

अब बात करते हैं विकास की तो किसी भी क्षेत्र में साक्षरता दर और महिला-पुरुष (लिंगानुपात) के हिसाब से मुख्य बिंदु माना जाता है। दोनों बिंदुओं पर भी मालवा पिछड़ा है। मालवा की साक्षरता दर 72.3 फीसद है, जबकि दोआबा की 81.48 फीसद और माझा की 75.9 फीसद है। यदि यह कहा जाए कि मालवा में रहने वाले लोग दोआबा और माझा के मुकाबले कम पढ़े-लिखे हैं। साथ ही लिंगानुपात के हिसाब से भी मालवा इन दोनों क्षेत्रों में पीछे है। इसके अलावा यहां किसान आत्महत्याओं, कैंसर की बढ़ती बीमारी, अपर्याप्त पेयजल, रेत की बढ़ती कीमतें, कपास की फसल पर लाल कीट के बढ़ते हमले, बेरोजगारी और बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसी प्रमुख समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

खेती किसानी के साथ ही औद्योगिक दृष्टि से मजबूत पंजाब के पिछड़े मालवा के लोगों का 2022 में भी रुख साफ ही है। यहां का विकास कितना होगा यह भविष्य के गर्त में है। हालांकि कुछ सियासी दिग्गजों का कहना है कि यहां के लोगों में अपनी समस्याओं को लेकर बहुत गुस्सा है। इस कारण वह चुनाव में पारंपरिक दलों को सत्ता के बाहर करने का मन बना चुके हैं।

2017 में कांग्रेस को दिखाई थी जीत की राह

राजनीतिक दृष्टि से मालवा शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। इसके बाद भी 2017 में पारंपरिक गढ़ में दोनों दलों को सिर्फ आठ सीटों पर विजय मिल पाई, जबकि कांग्रेस ने 40 सीटों पर कब्जा कर कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई। आप को 18 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा।

मालवा में पंजाब के 15 जिले

पंजाब के कुल 23 जिलों में 15 जिले मालवा के हैं। इनमें फिरोजपुर, मुक्तसर, फरीदकोट, मोगा, लुधियाना, मलेर कोटला, बठिंडा, मानसा, संगरूर, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, एसएएस नगर, रोपड़, बरनाला और फाजिल्का शामिल हैं। सबसे बड़ा भौगोलिक क्षेत्र होने के साथ ही यहां के किसान सबसे अधिक कपास उगाते हैं।

मलेरकोटला सबसे नया जिला

पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मालवा के मलेरकोटला को जिले का दर्जा दिया था। इसके बाद भी यहां समस्याएं जस की तस हैं। सरकारी योजनाओं का अच्छा क्रियान्वयन न होने के कारण मलेरकोटला में जमीनी स्तर पर ज्यादा काम नहीं हो पाया। यही वजह है कि यहां नशे की दवाओं के खतरे और बढ़ती बेरोजगारी के अलावा, सड़क का बुनियादी ढांचा अभी भी खराब हालात में है। पिछले 30 वर्षों से सत्ता में पारंपरिक दल जल-जमाव की समस्या को हल करने में भी विफल रहे हैं।

दलितों और किसानों का मिश्रण

मालवा बेल्ट किसानों और दलितों का मिश्रण है। यहां धर्म अभी महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र के दो जिले बठिंडा और मानसा के लोगों को राजनीतिक दल मूक मतदाता कहते हैं। यह उम्मीदवारों के लिए चुनाव के समय परेशानी खड़ी करते हैं। इस बार यहां कांग्रेस, शिअद-बसपा, भाजपा-पीएलसी-शिअद (संयुक्त), आप और संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) गठबंधन के बीच मुकाबला है।

SHARE
RELATED ARTICLES

Most Popular