Hisar Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana Scam: हरियाणा में मुर्दों के नाम पर सरकारी योजना में घोटाले का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अधिकारियों से लेकर नेताओं तक की नींद उड़ा दी है. यह बड़ा घोटाला प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ा हुआ है. सीएससी, नंबरदार, बीमा एजेंट और कृषि विभाग के भष्ट अधिकारी पिछले कई सालों से आपसी मिलीभगत के जरिए मृत किसानों के नाम पर घोटाले को अंजाम दे रहे थे. इस घोटाले ने एक बार फिर से भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की पोल खोल दी है, जिससे पता चलता है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को करप्शन का दीमक चाट रहा है.
दरअसल, हिसार की आदमपुर तहसील के कई गांवों में मृत लोगों को कागजों पर जिंदा दिखाकर फसल बीमा कराया गया और नुकसान दिखाकर बीमा की राशि निकाल ली गई. कॉमन सर्विस सेंटर, नंबरदार, बीमा कंपनी एजेंट और कृषि विभाग के अफसरों ने मिलीभगत से साल 2018-19 से अब तक बीमा क्लेम के लगभग 3 करोड़ रुपये हड़प चुके हैं. इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब गुड़ुसाल के किसानों को खराब फसलों का बीमा क्लेम नहीं मिला.
कैसे दिया गया घोटाले को अंजाम?
हिंदी अखबार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक चौधरीवाली के सेनी-मैनों का 70 साल पहले निधन हो चुका है. गुड़ुसाल के सीएससी में उनका फर्जी आधार कार्ड बनाया गया और उसे 32 साल का किसान दिखाया गया. साथ ही जमीन का पट्टा तैयार किया गया. इसके बाद कपास का 2.40 लाख रुपये का बीमा क्लेम किया गया. मामले का खुलासा तब हुआ, जब जमीन के हिस्सेदार ने शिकायत दी.
इसी तरह भगत सिंह नाम के एक शख्स, जिसका 12 साल पहले निधन हो चुका है, आरोपी ने उसकी जमीन पर खुद को काश्तकार दिखाया और 5.2 हेक्टेयर जमीन पर कपास का 3.74 लाख रुपये का बीमा क्लेम ले लिया.
इसके बाद एक और घोटाले का खुलासा हुआ. गुड़ुसाल के रहने वाले सुभाष और पवन कुमार ने बताया, “परिवार की 18 एकड़ जमीन है. गांव के कुछ लोगों ने 6 एकड़ जमीन का फर्जी एफिडेविट बनवाकर खुद को काश्तकार दिखा दिया और 2.04 लाख रुपये का बीमा क्लेम ले लिया.
गुड़ुसाल के पूर्व सरपंच नंदलाल ने बताया कि गांव में रेतीली जमीन है, जहां पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है. आरोपियों ने 400 एकड़ जमीन पर धान की फसल बताकर बीमा क्लेम लिया. पानी देने की गिरस्त योजना के तहत धान न लगाने के नाम पर भी सरकार से प्रति एकड़ 7 से 8 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि ली.
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
- जब कोई किसान ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर फसल पंजीकरण के लिए सीएससी में जाता है, तो वह खिला नंबर, मुरबा नंबर, फर्द की डिटेल देता है. संचालक एक-एक सूचना प्रिंट निकालकर रख लेते हैं. फिर अंतिम तारीख का इंतजार करते हैं. कई किसान अंतिम तारीख तक बीमा कराने नहीं पहुंचते तो उनकी जमीन पर खुद को काश्तकार दिखाकर बीमा करा देते हैं. यदि किसी किसान की जमीन ज्यादा है और फसल बीमा कम एकड़ का कराया है, तो बाकी जमीन का फर्जी काश्तकार बनकर बीमा अपने नाम कर लेते हैं.
- पोर्टल पर खेवर के सभी हिस्सेदारों के स्वयं पिता का नाम मिलता है.
- मृत लोगों के नाम से आधार कार्ड बनवा लेते हैं. एफिडेविट में उसकी जमीन का काश्तकार (बटाईदार/मेढ़ेदार) दिखाया जाता है.
- फर्जी हलफनामों की नंबरदार तस्दीक करता है और नोटरी से अटेस्ट करवाता है.
- फॉर्म में आरोपी अपना मोबाइल नंबर भर देते हैं. बीमा कंपनी से क्लेम पास होने पर राशि आरोपियों के बैंक खातों में पहुंचती है.
अधिकारियों का क्या है कहना?
वहीं घोटाले का खुलासा होने के बाद पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा मामले की जांच में जुट गई है. जांच अधिकारी वीरेंद्र गिल ने बताया कि अभी रिकॉर्ड लिया जा रहा है. 7-8 लोगों की शिकायत आ चुकी है. एक एफआईआर भी दर्ज हुई थी.
दूसरी तरफ हिसार के कृषि उप निदेशक राजवीर सिंह का कहना है कि बीमा कंपनी की जिम्मेदारी है कि किसान ने खेत में कौन-सी फसल बोई है, बीमा किस फसल का कराया है. कृषि विभाग का काम केवल आंकलन है. किसान हमारे पास भी पहुंचे हैं, जिनके खातों में क्लेम गया, उनका रिकॉर्ड दे रहे हैं.
क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना?
बता दें कि केंद्र सरकार किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चला रही है, जिसके तहत बहुत कम प्रीमियम देकर किसान अपनी फसल का बीमा करा सकते हैं. नुकसान होने पर उन्हें तय नियमों के अनुसार मुआवजा भी मिलता है.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत साल 2016 में की गई थी. योजना के तहत फसल की बुआई से लेकर कटाई के बाद तक कई तरह के जोखिमों को कवर किया जाता है. इसके तहत खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, दालें और तिलहन के लिए किसानों को बीमा राशि का केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है. रबी फसलों के लिए यह दर 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत निर्धारित की गई है.
यदि वास्तविक प्रीमियम इससे अधिक होता है, तो शेष राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं. यही वजह है कि किसानों को कम लागत में बड़ा बीमा कवर मिल जाता है. राज्यों के अनुसार प्रीमियम और बीमित राशि अलग-अलग हो सकती है.
कौन कर सकता है अप्लाई?
- खुद की भूमि पर खेती करने वाले.
- बटाई पर खेती करने वाले.
- लीज पर जमीन लेकर खेती करने वाले.
विपक्ष ने की बड़ी मांग
फिलहाल घोटाले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. विपक्ष ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, विश्वास और सरकारी व्यवस्था के साथ खुला विश्वासघात है.
विपक्ष की मांग है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और समयबद्ध स्वतंत्र जांच कराई जाए. इसमें शामिल सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, सीएससी संचालकों, बीमा एजेंटों और अन्य दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए. फिलहाल इस घोटाले की जांच जारी है.


