Chandigarh Rent Rules 2026: चंडीगढ़ में मकान मालिक और किरायेदारों के लिए कई नए नियम बनाए गए हैं। इससे विवादों को कम करने और किरायेदारी की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने में मदद मिल सकती है। संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ किरायेदारी नियम 2026 के तहत किरायेदारी समझौते की ऑनलाइन सूचना देना, यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) हासिल करना और विवादों के लिए अलग किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय और किराया अधिकरण जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। चंडीगढ़ प्रशासन की वेबसाइट पर जुलाई 2026 में इन नियमों का ड्राफ्ट भी प्रकाशित किया गया था। अगर आप चंडीगढ़ में मकान किराये पर देते हैं या किराये पर रहते हैं, तो इन बदलावों को समझना जरूरी है।
चंडीगढ़ में किरायेदारों के लिए बने नए नियम
किरायेदारी समझौते की ऑनलाइन सूचना जरूरी : नए नियमों के अनुसार मकान मालिक और किरायेदार को किरायेदारी समझौता होने के दो महीने के भीतर इसकी सूचना किराया प्राधिकरण को ऑनलाइन देनी होगी। दोनों पक्ष मिलकर या अलग-अलग यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इससे किरायेदारी का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार होगा और भविष्य में विवाद होने पर दस्तावेज के आधार पर मामला सुलझाने में मदद मिलेगी। चंडीगढ़ प्रशासन पहले से ही संपत्ति और दस्तावेजों से जुड़ी कई सेवाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराता है।
मिलेगा यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर : किरायेदारी की जानकारी मिलने के बाद किराया प्राधिकरण सात दिन के भीतर UIN जारी करेगा। यह नंबर पंजीकृत मोबाइल नंबर या ई-मेल पर ई-रसीद के रूप में भेजा जाएगा। यह नंबर किरायेदारी से जुड़े रिकॉर्ड की पहचान के लिए महत्वपूर्ण होगा।
मकान मालिक किराया लेने से मना करे तो क्या करें : अगर मकान मालिक किराया लेने से इनकार करता है या किराये की रसीद नहीं देता, तो किरायेदार के लिए भी नई व्यवस्था की गई है। किरायेदार लगातार दो महीने तक RTGS, NEFT, चेक या डिमांड ड्राफ्ट जैसे माध्यमों से किराया देने का प्रयास कर सकता है। इसके बाद भी भुगतान स्वीकार नहीं किया जाता है तो किरायेदार किराये की राशि किराया प्राधिकरण के पास जमा करा सकता है। इससे किरायेदार के पास यह साबित करने का रिकॉर्ड रहेगा कि उसने समय पर किराया देने की कोशिश की थी।
किराये से जुड़े विवादों के लिए अलग व्यवस्था : नए नियमों के तहत किरायेदारी से जुड़े मामलों के लिए तीन स्तर की व्यवस्था होगी- किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय और किराया अधिकरण। किराये, बिजली-पानी, रखरखाव और सुरक्षा जैसे शुल्कों के निर्धारण या संशोधन से जुड़े मामलों में भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया जा सकेगा।
आवेदन पर 15 दिन में देना होगा जवाब : किराया प्राधिकरण के सामने कोई आवेदन दाखिल होने पर दूसरे पक्ष को सामान्य तौर पर 15 दिन के भीतर जवाब देना होगा। विशेष परिस्थितियों में कारण दर्ज करते हुए यह अवधि अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाई जा सकती है। इसका उद्देश्य किरायेदारी विवादों को लंबे समय तक लटकने से रोकना है।
अपील पर 60 दिन में फैसला : किराया अधिकरण को नोटिस की तामील के बाद 60 दिन के भीतर अपील का फैसला करने का प्रावधान किया गया है। सामान्य तौर पर मामले में केवल एक स्थगन की अनुमति होगी। किराया न्यायालय के आदेशों के पालन के लिए भी समय सीमा तय की गई है। आदेश के निष्पादन की प्रक्रिया नोटिस की तामील के 30 दिन के भीतर पूरी करने का प्रावधान है।
बकाया किराये और सुरक्षा राशि पर ब्याज : नए नियमों में आर्थिक विवादों को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। अगर मकान मालिक और किरायेदार के बीच अलग से कोई व्यवस्था नहीं है, तो बकाया किराये और अन्य शुल्कों तथा सुरक्षा राशि या अग्रिम किराये की वापसी पर ब्याज SBI की उच्चतम MCLR से 2 प्रतिशत अधिक दर से निर्धारित किया जाएगा।
नए नियमों में रिकॉर्ड रहेंगे सुरक्षित
नियमों के तहत किरायेदारी से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रखे जाएंगे। इनकी पहुंच संबंधित पक्षों और अधिकृत अधिकारियों तक सीमित रखने का प्रावधान है। नए नियमों का उद्देश्य किरायेदारी को ज्यादा पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाना है। मकान मालिक और किरायेदार दोनों के लिए सबसे जरूरी बात यह होगी कि वे लिखित समझौता रखें, भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड संभालकर रखें और समयसीमा के अंदर औपचारिकताएं पूरी करें।


