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गर्मी राहत के लिए बनते हैं बांके बिहारी के स्पेशल फूल-बंगले Banke Bihari’s

वृंदावन में  भगवान बांके बिहारी जी के बनने वाले फूल बंगलों में प्रमुख रूप से रायवेल, गुलाब, चंपा, रजनीगंधा और गेंदा के फूलों का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा अधिक सुंदर बंगला बनाने के लिए विदेशी फूल भी प्रयोग किए जाते हैं।

आज समाज डिजिटल, अम्बाला
Banke Bihari’s : गर्मी का प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। तापमान 44 डिग्री से ऊपर है। वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में मंगलवार से फूल बंगला बनने का कार्य शुरू हो गया है। यहां भगवान 108 दिनों तक फूलों के बंगले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच भक्त अपने आराध्य को शीतलता देने के लिए उनको फूलों के बंगले में विराजमान करते है।

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इन फूलों का किया जाता है प्रयोग

वृंदावन में  भगवान बांके बिहारी जी के बनने वाले फूल बंगलों में प्रमुख रूप से रायवेल, गुलाब, चंपा, रजनीगंधा और गेंदा के फूलों का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा अधिक सुंदर बंगला बनाने के लिए विदेशी फूल भी प्रयोग किए जाते हैं। देशी फूलों की आपूर्ति ब्रज क्षेत्र से ही की जाती है।

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गर्भगृह से निकलकर दर्शन देंगे बांके बिहारी

वृंदावन गर्मी में फूल बंगले जब बनाए जाते हैं, तो भगवान बांके बिहारी गर्भगृह से निकल आते हैं। वह फिर जगमोहन के रूप में विराजमान होते हैं। 108 दिनों तक भगवान बांके बिहारी जगमोहन के रूप में ही विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। फूल बंगलों में विराजमान अपने आराध्य के दर्शनों को लेकर भक्त बहुत उत्साहित रहते हैं।

प्रतिदिन होता है करीब एक टन फूलों का प्रयोग

भगवान बांके बिहारी के लिए पहले शाम के समय शयन भोग में फूल बंगले बनते थे। दो साल पहले से कोर्ट के आदेश पर सुबह के समय भी फूल-बंगला बनना शुरू हो गया। बांके बिहारी जी के फूल बंगले बनने के लिए एक समय में कम से कम 500 किलो फूलों का प्रयोग किया जाता है, यानी दिन में एक हजार किलो फूलों से यह बंगले तैयार होते हैं।

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Banke Bihari's

यह है परंपरा

वृंदावन बांके बिहारी मंदिर के सेवारत घनश्याम गोस्वामी ने बताया कि यह परंपरा काफी पुरानी है। बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगले स्वामी हरिदास जी के समय से ही बनाए जाते हैं। बांके बिहारी जी के प्राकट्यकर्ता स्वामी हरिदास जी (जन्म सन 1480) अपने लाडले भगवान को गर्मी से राहत देने के लिए उनको फूलों के कुंज में विराजमान कर लाड़ लड़ाते (सेवा-पूजा करते) थे। आज भी भगवान को गर्मी से राहत देने के लिए इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।

मनोकामना पूरी होने पर आराध्य को फूल बंगले में विराजमान कराते हैं भक्त

बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगला बनाने के लिए भक्तों की लंबी कतार है। जिन भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है, वे अपने आराध्य को फूलों के बंगले में विराजमान कराते हैं। एक अनुमान के मुताबिक एक फूल बंगला बनवाने में करीब पांच लाख रुपए का खर्च आता है। इसमें भक्त फूल बंगला, छप्पन भोग, भगवान की पोशाक, डेकोरेशन आदि करवाते हैं।

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बांके बिहारी के फूलों से बनती है अगरबत्ती

बांके बिहारी मंदिर में गर्मियों के दौरान बनने वाले फूल बंगले देश दुनिया में प्रसिद्ध हैं। फूल बंगला बनने के बाद जब फूलों को हटाया जाता है, तब इन फूलों को महिला आश्रय सदन भेज दिया जाता है। यहां निराश्रित और विधवा माताएं इन फूलों से अगरबत्ती, धूप बत्ती और गुलाल बनाती हैं। फूलों से हर्बल गुलाल बनाने वाली इन निराश्रित महिलाओं को सरकार द्वारा पारिश्रमिक भी दिया जाता है।

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