Haryana 5 Famous Shiv Mandir: सावन में हरियाणा के इन 5 शिव मंदिरों में चढ़ाए जल, दूर होंगे सभी कष्ट

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Haryana 5 Famous Shiv Mandir: आज से सावन का पावन पर्व शुरू हो गया है और लोग सुबह-सुबह भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए दौड़ रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि हरियाणा में ऐसे 5 बड़े शिव मंदिर के बारे में जो काफी फेमस हैं और वहां जाकर जल चढ़ाया जा सकता है.

Haryana 5 Famous Shiv Mandir: सावन का पावन महीना शुरू हो चुका है और ये दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है. इस साल सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा, जिसमें कुल चार सोमवार पड़ेंगे. इस दौरान भगवान शिव के भक्त व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और देशभर के प्रसिद्ध शिवालयों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं. हरियाणा में भी कई ऐसे प्राचीन शिव मंदिर हैं, जिनकी धार्मिक मान्यताएं और इतिहास भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर, कैथल

कैथल का श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर बेहद प्राचीन और फेमस माना जाता है. इसी मंदिर की वजह से कैथल को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए यहां 11 रुद्रों की स्थापना करवाई थी. धार्मिक विश्वास के अनुसार इसी स्थान पर भगवान शिव ने अर्जुन को अपने दिव्य स्वरूप के दर्शन भी दिए थे.

संगमेश्वर महादेव मंदिर, पिहोवा

कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा क्षेत्र के अरुणाय गांव में स्थित संगमेश्वर महादेव मंदिर सावन में विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां हर वर्ष नाग देवता भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं. ये मंदिर अरुणा और सरस्वती नदी के संगम पर स्थित है. पौराणिक कथाओं के अनुसार महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र ने यहां तपस्या की थी. कहा जाता है कि सरस्वती नदी ने यहां शिवलिंग की आराधना कर श्राप से मुक्ति प्राप्त की थी.

स्थाणवीश्वर महादेव मंदिर, कुरुक्षेत्र

स्थाणवीश्वर महादेव मंदिर को महाभारत काल से भी अधिक प्राचीन माना जाता है. थानेसर के उत्तर में स्थित इस तीर्थ का उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों और बौद्ध साहित्य में भी मिलता है. वामन पुराण में इसे स्थाणु तीर्थ कहा गया है. मान्यता है कि इस मंदिर के आसपास स्थापित हजारों शिवलिंगों के दर्शन करने से भक्तों को पापों से मुक्ति मिलती है. ऐसा भी माना जाता है कि यहां के शिवलिंग की स्थापना स्वयं ब्रह्मा जी ने की थी.

कालेश्वर महादेव मंदिर, कुरुक्षेत्र

कालेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए फेमस है. कहा जाता है कि ये देश का ऐसा दुर्लभ शिव मंदिर है जहां शिवलिंग के सामने नंदी महाराज की प्रतिमा नहीं है. धार्मिक कथा के अनुसार जब रावण आकाश मार्ग से गुजर रहा था तो उसका पुष्पक विमान इस स्थान के ऊपर डगमगा गया. इसके बाद उसने यहां भगवान शिव की आराधना की. शिवजी ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए और उसी समय नंदी को कुछ दूरी पर रहने का आदेश दिया.

आदिबद्री केदारनाथ मंदिर, यमुनानगर

यमुनानगर से करीब 47 किलोमीटर दूर स्थित आदिबद्री केदारनाथ मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. ये मंदिर सोम नदी के दूसरे किनारे पर स्थित है और यहां स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है. मान्यता है कि लगातार 21 दिनों तक श्रद्धा से पूजा-अर्चना करने पर भगवान केदारनाथ भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. इस प्राचीन मंदिर का उल्लेख कई पुराणों में भी मिलता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.

(डिस्कलेमर: ये खबर विभिन्न धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं पर आधारित है. आज समाज इसमें किए गए दावों, मान्यताओं या कथाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है. इसका उद्देश्य केवल धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी पाठकों तक पहुंचाना है.)