Ganesh Chaturthi 2026: गणपति स्थापना के बाद घर में रखें इन बातों का ध्यान, जानें पूजा से लेकर विसर्जन तक सबकुछ

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Ganesh Chaturthi 2026: गणपति स्थापना के बाद पूजा स्थल की सफाई, रोजाना आरती, मोदक का भोग, शांत माहौल और प्रसाद की स्वच्छता का ध्यान रखें। विसर्जन परिवार की परंपरा व शुभ मुहूर्त के अनुसार करें.

Ganesh Chaturthi 2026: घर में गणपति बप्पा के आगमन का एहसास ही अलग होता है. फूलों से सजा घर, मोदक की खुशबू और पूजा की तैयारियों के बीच सभी को गणपति स्थापना के उस खास पल का इंतजार रहता है. मूर्ति की स्थापना के साथ ही गणेश चतुर्थी का उत्सव शुरू हो जाता है. हालांकि, पारंपरिक रीति-रिवाज मानने वाले परिवारों के लिए इन दिनों कुछ खास बातों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है.

गणपति के आसपास रखें साफ-सफाई

गणपति स्थापना के बाद पूजा स्थल को साफ रखना बेहद जरूरी है. मुरझाए फूल, बचा हुआ भोजन, इस्तेमाल की गई पूजा सामग्री और अन्य कचरा वहां जमा न होने दें. रोजाना थोड़ी सफाई करने से पूजा का स्थान व्यवस्थित और पवित्र बना रहता है.

रोज करें गणपति की पूजा

गणपति को केवल स्थापना के दिन पूजना ही पर्याप्त नहीं माना जाता. घर की परंपरा के अनुसार रोज सुबह या शाम आरती, फूल, दूर्वा, फल और मिठाई अर्पित की जा सकती है. पूजा कितनी विस्तृत हो, यह परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है.

मोदक का लगाएं भोग

भगवान गणेश को मोदक प्रिय माने जाते हैं और गणेश चतुर्थी पर इन्हें प्रसाद के रूप में चढ़ाने की परंपरा है. घर के बने मोदक के अलावा लड्डू, फल और अन्य सात्विक भोजन भी अर्पित किया जा सकता है. भोग के बाद प्रसाद परिवार और मेहमानों में बांटें.

भोजन को लेकर बरतें सावधानी

पूजा में ताजा भोजन चढ़ाना बेहतर माना जाता है. दिल्ली की सितंबर की गर्मी में दूध से बनी मिठाइयों या जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक बाहर न रखें. पूजा के बाद उन्हें उचित तरीके से फ्रिज में रखें और खराब हो चुके प्रसाद का सेवन न करें.

पूजा स्थल का माहौल रखें शांत

गणेश चतुर्थी के दौरान घर में रौनक और मेहमानों का आना-जाना स्वाभाविक है. फिर भी गणपति के आसपास अनावश्यक विवाद और अशांत माहौल से बचना चाहिए. परिवार के सदस्य बातचीत करें, बच्चे खेलें और मेहमान आएं, लेकिन पूजा स्थल के प्रति सम्मान बना रहना चाहिए.

मूर्ति को बार-बार न हिलाएं

स्थापना के बाद गणपति की मूर्ति को बिना वजह स्थानांतरित करने से आमतौर पर बचा जाता है. हालांकि, अलग-अलग परिवारों में नियम अलग हो सकते हैं. जरूरत पड़ने पर अपने पुजारी या पारिवारिक परंपरा का पालन करना उचित है.

विसर्जन परिवार की परंपरा से करें

गणपति विसर्जन का दिन हर परिवार के लिए एक जैसा नहीं होता. कुछ घरों में डेढ़ दिन, तो कुछ में तीन, पांच, सात या दस दिन तक गणपति विराजते हैं. विसर्जन परिवार की परंपरा और कई बार शुभ मुहूर्त के अनुसार तय किया जाता है.

उत्सव को बनाएं पर्यावरण के अनुकूल

गणेश उत्सव में फूल, सजावट और भोजन से कचरा बढ़ सकता है. दोबारा इस्तेमाल होने वाली सजावट अपनाएं, जरूरत के अनुसार भोजन बनाएं और पूजा सामग्री का जिम्मेदारी से निपटान करें. कई परिवार जलस्रोतों पर प्रभाव को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण-अनुकूल गणपति प्रतिमा को भी प्राथमिकता देते हैं.