US-Iran Peace Agreement : जंग खत्म, अमेरिका-ईरान 19 जून को करेंगे समझौते पर हस्ताक्षर

0
98
US-Iran Peace Agreement : जंग खत्म, अमेरिका-ईरान 19 जून को करेंगे समझौते पर हस्ताक्षर
US-Iran Peace Agreement : जंग खत्म, अमेरिका-ईरान 19 जून को करेंगे समझौते पर हस्ताक्षर

ट्रंप का ऐलान, दुनिया भर के लिए दोबारा खुलेगा होर्मुज

US-Iran Peace Agreement (आज समाज), वॉशिंगटन/तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच पिछले साढ़े तीन माह से चल रही जंग आखिरकार थम गई है। दोनों पक्षों की तरफ से इस बात का ऐलान करते हुए कहा है कि दोनों शांति समझौते पर इसी माह 19 तारीख को हस्ताक्षर करेंगे। दोनों पक्षों के बीच समझौता होने से पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है।

क्योंकि अब समुद्री जहाजों के लिए सबसे अहम होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा से खोल दिया जाएगा। जिससे विश्व में जरूरी सामान की आपूर्ति दोबारा से बहाल हो सकेगी। इस संबंधी जानकारी देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। वहीं ईरान ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका के साथ कई महीनों तक चली लंबी और मुश्किल बातचीत के बाद दोनों देशों ने एक डील को अंतिम रूप दे दिया है।

समझौते को लेकर यह बोले ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा। उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी दे दी है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि दुनिया के जहाजो, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।

जेनेवा में दोनों देश करेंगे समझौते पर हस्ताक्षर

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों देश पीस डील पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दस्तखत करेंगे। अगर ऐसा होता है तो यह 47 साल में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हाई लेवल की बैठक होगी। दूसरी तरफ ईरान-अमेरिका के बीच हुए समझौते का पूरा दस्तावेज अभी जारी नहीं किया गया है। हालांकि, ईरानी मीडिया के मुताबिक दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन में कुछ अहम बातें शामिल हैं।

इनमें युद्ध और सैन्य कार्रवाई रोकना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, ईरान के कुछ फ्रीज्ड फंड जारी करना, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अगले 60 दिनों की बातचीत का ढांचा तय करना शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद शुरू होने वाली 60 दिन की अमेरिका-ईरान वार्ता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका पहले अपने तीन वादे पूरे करता है या नहीं।