Pizza-Burger Ban in Karnataka Schools: जंक फूड का ज्यादा सेवन करने से कई खतरनाक बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है। आजकल लाइफस्टाइल डिजीज तेजी से बढ़ रही हैं और जंक फूड इसकी एक बड़ी वजह है। जंक फूड को लेकर कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्कूलों और अस्पतालों की कैंटीन में पिज्जा, बर्गर और अन्य जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने का ऐलान किया है। स्कूल ही नहीं, बल्कि इसके आसपास भी जंक फूड बेचने की मनाही होगी। सरकार का कहना है कि बच्चों और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक खाना उपलब्ध कराना जरूरी है।
कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यूटी खादर ने यह घोषणा मंगलुरु में जिला वेनलॉक अस्पताल की रिव्यू मीटिंग के बाद की। उन्होंने कहा कि कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की एक बड़ी वजह खराब खान-पान की आदतें हैं। इसलिए स्कूल और अस्पताल जैसे स्थानों पर जंक फूड की बिक्री पूरी तरह बंद होनी चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस पहल की शुरुआत सरकारी अस्पतालों से की जाएगी, ताकि वे हेल्दी फूड सिस्टम के उदाहरण बन सकें। इसके बाद प्राइवेट अस्पतालों और अन्य संस्थानों को भी इसी दिशा में कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
क्यों नुकसानदायक है जंक फूड?
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो जंक फूड्स में नमक, चीनी और फैट की मात्रा ज्यादा होती है। इसके अलावा जंक फूड्स में इस्तेमाल की जाने वाली कई चीजें हाईली प्रोसेस्ड होती हैं। अधिकतर जंक फूड मैदा से बनाए जाते हैं, जिसकी वजह से इनका सेहत पर बुरा असर होता है। लंबे समय तक जंक फूड का अत्यधिक सेवन करने से मोटापा, डायबिटीज, हार्ट डिजीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसी को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने यह फैसला लिया है।
फूड कंपनियों पर भी होगी सख्ती
स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने फूड प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों को भी क्वालिटी जांच को लेकर भी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि बाजार में कोई भी प्रोडक्ट उतारने से पहले उसकी सही जांच जरूरी है। सरकार खाद्य सुरक्षा नियमों को मजबूत करने के लिए मौजूदा फूड टेस्टिंग लैब को अपग्रेड करने और बेंगलुरु में नई लैब स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर नजर रखना है। कर्नाटक सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में मोटापा, डायबिटीज और अन्य बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकार का मानना है कि स्कूलों और अस्पतालों जैसे संस्थानों से स्वस्थ खान-पान की शुरुआत करने से लोगों में बेहतर आदतें विकसित की जा सकती हैं।
मरीजों के खाने में बदलाव पर भी जोर
बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों में मरीजों को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी पर भी चर्चा की। उन्होंने सुझाव दिया कि जहां संभव हो, मरीजों के भोजन में सोया और पनीर की जगह अंडे को शामिल किया जा सकता है, क्योंकि इसमें बेहतर गुणवत्ता वाला प्रोटीन पाया जाता है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को मरीजों की जरूरत के अनुसार बेहतर डाइट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। इसके अलावा अस्पतालों में नर्सों की कमी, एमआरआई मशीन के लिए हीलियम की उपलब्धता और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा हुई।


