Asaram News: आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका, अदालत ने अंतरिम जमानत देने से किया इनकार

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Asaram Interim Bail Rejected: उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष कोर्ट ने आसाराम को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। एम्स की मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है।
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आसाराम को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत नहीं मिली है।

SC Rejects Asaram Interim Bail: उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर दायर अंतरिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने याचिका लंबित रखते हुए कहा कि अगर भविष्य में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ती है, तो वे दोबारा अंतरिम जमानत के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं। अंतरिम जमानत की मांग पर पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS से आसाराम की सेहत पर विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट मांगी थी। अदालत यह जानना चाहती थी कि उनकी बीमारी कितनी गंभीर है और क्या उन्हें चिकित्सा आधार पर अंतरिम राहत देने की जरूरत है।

एम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि फिलहाल आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखी जानी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जा सके। एम्स की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अंतरिम जमानत का आदेश देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। हालांकि अदालत ने कहा कि अगर भविष्य में उनकी सेहत बिगड़ती है, तो वे नई परेशानी के आधार पर राहत की मांग कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को एक राहत देते हुए उन्हें अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरगिवर रखने की अनुमति दी है। यह केयरगिवर चौबीसों घंटे उनकी देखभाल कर सकेगा। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेल में रहते हुए भी उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सहायता और देखभाल मिलती रहे। सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट में 20 दिनों की पैरोल मांगते समय सुप्रीम कोर्ट में लंबित अंतरिम जमानत याचिका की जानकारी नहीं दी थी। सरकार का आरोप था कि इस महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाकर पैरोल हासिल की गई।

तुषार मेहता की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने भी नाराजगी जताई और कहा कि अदालत के समक्ष सभी जरूरी तथ्यों को ईमानदारी से रखना प्रत्येक याचिकाकर्ता की जिम्मेदारी होती है। गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में आसाराम को 20 दिनों की पैरोल दी है। हाईकोर्ट ने यह राहत उनकी लंबी जेल अवधि और अंतरिम जमानत के दौरान उनके व्यवहार सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद दी थी। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में उनकी अंतरिम जमानत याचिका पर अलग से सुनवाई चल रही थी। स्वास्थ्य संबंधी आधार पर आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत की मांग की थी। हालांकि शीर्ष कोर्ट ने राहत नहीं दी।