Khaleda Zia Death Updates: अंतिम संस्कार आज, जनाजे में शामिल होंगे एस जयशंकर

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Khaleda Zia Death Updates
Khaleda Zia Death Updates: अंतिम संस्कार आज, जनाजे में शामिल होंगे एस जयशंकर

Today Khaleda Zia Funeral, (आज समाज), ढाका/नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) भी बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के जनाजे में शामिल होंगे। भारत में जन्मीं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की लंबे समय तक प्रमुख रहीं खालिदा जिया का मंगलवार सुबह 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और बीते काफी समय से बीमार थीं। खालिदा बांग्लादेश की दो बार पीएम रहीं।

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एक आधिकारिक बयान के अनुसार खालिदा जिया (Khaleda Zia) का अंतिम संस्कार राजधानी ढाका (Dhaka) में किया जाएगा और जयशंकर उनके जनाजे में शामिल होकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। पाकिस्तानी विदेश मंत्री भी इस दौरान ढाका में उपस्थित रहेंगे। खालिदा जिया का जन्म 1945 में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में हुआ था। उन्होंने बांग्लादेश में सैन्य शासन के बाद लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में अहम भूमिका निभाई।

राजनीतिक परिवार से नहीं था सीधा ताल्लुक 

खालिदा जिया अपने घर में दूसरी संतान थीं। उनका किसी राजनीतिक परिवार से सीधा कोई ताल्लुक नहीं था। पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर मिशनरी स्कूल में खालिदा की प्रारंभिक शिक्षा पूरी हुई। 1960 में दिनाजपुर गर्ल्स स्कूल से उन्होंने मैट्रिक पास की। उनके पिता इस्कंदर मजूमदार व्यापारी थे और मां तैयबा मजूमदार गृहिणी थीं।

1960 में जियाउर रहमान से हुई शादी 

खालिदा की 1960 में सेना के अधिकारी जियाउर रहमान से शादी हुई। 1971 में जब बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम चल रहा था, तब शेख मुजीबुर रहमान को अरेस्ट कर लिया गया। इसी दौर में जियाउर रहमान ने घोषणा की कि वे स्वतंत्र बांग्लादेश की तरफ से लड़ रहे हैं। जंग समाप्त होने पर रहमान सेना में लौटे और उन्हें उच्च पद मिला। इसके बाद वह धीरे-धीरे राजनीति में भी प्रभावशाली फेस बन गए।

जियाउर रहमान 1977 में राष्ट्रपति बने, 1981 में हत्या

1975 में शेख मुजीबुर रहमान व उनके परिवार की हत्या कर दी गई। इसके बाद बांग्लादेश में लगातार तख्तापलट होते रहे। वहीं सेना में गुटबाजी इतनी बढ़ी कि बार-बार सत्ता परिवर्तन हुआ। ऐसे माहौल में जियाउर रहमान सबसे पावरफुल सैन्य नेता बनकर उभरे और 1977 में वह राष्ट्रपति बने। इसके बाद उन्होंने बीएनपी की स्थापना की। फिर 30 मई 1981 को चटगांव में विद्रोह के दौरान जियाउर रहमान की हत्या कर दी गई।

खालिदा ने 1984 में संभाली बीएनपी की कमान 

पति की मौत के बाद बीएनपी बिखरने लगी और पार्टी के नेताओं ने खालिदा से नेतृत्व संभालने की अपील की। 1984 में खालिदा ने पार्टी की कमान अपने हाथ में ली। खालिदा 1991 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उन्हें 1996 में सत्ता गंवानी पड़ी। 2001 में वे फिर से प्रधानमंत्री बनीं। उनके परिवार में बड़े बेटे तारिक रहमान, दो बहुएं व तीन पोते-पोतियां हैं।

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