Editorial Aaj Samaaj: गाली को ‘गहना’ बनाने का हुनर

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Editorial Aaj Samaaj | राजीव रंजन तिवारी | गालियों का कोई एक निश्चित आविष्कारकर्ता या उत्पत्ति नहीं है, बल्कि ये भावनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में प्राचीन काल से समाज का हिस्सा रही हैं और इनका स्वरूप व संदर्भ समय और संस्कृति के साथ बदलता रहा है। ये क्रोध, अपमान, विद्रोह या कभी-कभी हल्के-फुल्के संवाद के लिए उपयोग होती हैं। प्राचीन साहित्य, जैसे महाभारत में भी कटु शब्दों का प्रयोग मिलता है और इस दौर में सिनेमा, सोशल मीडिया और शहरीकरण के कारण गालियों का प्रसार बढ़ा है। मजेदार ये कि अब भारतीय राजनीति में भी इसका प्रचलन बढ़ने लगा है। सियासत में चलने वाली गालियों को कुछ लोग दिल से लेकर परेशान हो जाते हैं तो कुछ लोग इन गालियों को गहना यानी आभूषण बना लेते हैं। उसका परिणाम पूरी दुनिया देखती है।

राजीव रंजन तिवारी, संपादक, आज समाज।

फिलहाल गाली के मुद्दे पर बिहार की सियासत गरमाई हुई है। यहां गालियों को लेकर तमाम तरह की बातें होने लगी हैं। हर तरफ जबर्दस्त सियासी हंगामा देखने को मिल रहा है। आरोप है कि बिहार में वोटर अधिकार यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। इसे स्पष्ट शब्दों में कुछ लोग गाली बता रहे हैं। इस मसले पर अब भाजपा हमलावर हो गई है। भाजपा ने इस पूरे मामले पर कहा है कि राजनीति में इस तरह की नीचता पहले कभी नहीं देखी गई। यह यात्रा अपमान घृणा और स्तरहीनता की सारी हदें पार कर चुकी है। इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ पटना में मामला भी दर्ज कराया गया है।

इसी मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल की घटना की निंदा की है। शाह ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने अपनी घुसपैठिया बचाओ यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की मां के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करके बेहद निंदनीय कृत्य किया है। मैं इसकी निंदा करता हूं। हर कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक शब्द कहे हैं। शाह ने कहा कि कुछ दिन पहले जो हुआ, उससे सभी को दुख है। पीएम मोदी की मां ने एक गरीब घर में जीवन जिया, अपने बच्चों को मूल्यों के साथ पाला और अपने बेटे को एक भरोसेमंद नेता बनाया। उन्होंने कहा कि मैं राहुल गांधी से आग्रह करता हूं कि अगर उनमें शर्म है, तो उन्हें पीएम, दिवंगत मां व देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

इससे पहले भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्रा के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वर्गीय माताजी के लिए बेहद अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। तेजस्वी और राहुल ने पहले बिहार के लोगों का अपमान करने वाले स्टालिन और रेवंत रेड्डी जैसे नेताओं को अपनी यात्रा में बुलाकर बिहारवासियों को अपमानित कराया। अब उनकी हताशा की स्थिति यह है कि वे प्रधानमंत्री मोदी जी की स्वर्गीय माताजी को गाली दिलवा रहे हैं। तेजस्वी और राहुल ने अपने मंच से इतनी गंदी भाषा का प्रयोग कराया है कि उसे सार्वजनिक मंच पर दोहराना संभव नहीं। भाजपा ने लिखा कि यह ऐसी गलती है कि राहुल और तेजस्वी हजार बार कान पकड़कर उठक-बैठक करके भी माफ़ी मांगें, तब भी बिहार के लोग माफ नहीं करेंगे। यह बेहद ही शर्मनाक है।

बिहार भाजपा कार्यकारिणी के सदस्य कृष्ण सिंह कल्लू के द्वारा पटना के गांधी मैदान थाने में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप दर्ज करा दी है। भाजपा नेता ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा देश के प्रधानमंत्री एवं देश के गृह मंत्री अमित शाह को लेकर अभद्र टिप्पणी की जा रही है। केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रा) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि जिस भाषा का ये लोग उपयोग करते हैं, ये बिलकुल ठीक नहीं है। शब्दों की मर्यादा को विपक्ष गिरा रहा है। देश के प्रधानमंत्री के बारे में गलत शब्दों का प्रयोग करना ठीक नहीं है। बिहार भाजपा के प्रवक्ता व पूर्व विधायक मनोज शर्मा ने कहा कि राजनीति में किसी के परिवार को ऐसे लक्षित करना सही नहीं है। लोकतंत्र में ये हरकत निंदनीय है।

भाजपा प्रवक्ता व पूर्व विधायक मनोज शर्मा ने कहा कि जिन लोगों ने खुद इतनी चोरी की हो, जिन्होंने खुद इतने घोटाले किये हों, वो चोरी-चोरी बोल रहे हैं। कांग्रेस देश को अराजकता की तरफ ले जा रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी कुत्सित मानसिकता को कभी पूरी नहीं होने देंगे। बिहार में सत्तारूढ़ जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि बिहार की जनता कांग्रेस और इंडी गठबंधन के नेताओं से नाराज है। उन्होंने कहा कि बिहार में सभाओं के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी लोगों को अच्छा नहीं लग रहा है। इसे लेकर चारों ओर गुस्सा और नाराजगी देखी जा रही है। राजीव रंजन प्रसाद ने भी कांग्रेस से माफी की मांग की है।

सनद रहे कि मार्च 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने होली के अवसर पर 25 लाख चौकीदारों को संबोधित करते हुए कहा था कि हर जगह चौकीदारों की ही चर्चा है, टीवी या ट्विटर, देश, विदेश, गांव, शहर हर जगह चौकीदार शब्द की ही गूंज है। लेकिन कुछ लोगों ने निजी स्वार्थ के लिए गाली-गलौज शुरू कर दिया। कामदारों के खिलाफ नफरत फैलाना नामदारों की आदत है। मोदी ने चौकीदारों के साथ अपने 23 मिनट के संवाद के दौरान कई बड़ी बातें कही। गौरतलब है कि उस दौरान कांग्रेस ने नारा दिया था कि चौकीदार चोर है। इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके समर्थकों में गुस्सा देखा गया था। इसी क्रम में भाजपा के आह्वान पर मैं भी चौकीदार का अभियान छिड़ गया और पूरे देश में मोदी समर्थकों ने मैं भी चौकीदार का टैग लगा लिया। इसे समीक्षकों ने गाली को गहना बनाने की बात कही थी।

उस दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मैं सभी चौकीदारों से माफी मांगता हूं क्योंकि कुछ लोगों ने निजी स्वार्थ के लिए बिना कुछ सोचे-समझे गाली-गलौज करना शुरू कर दिया। चौकीदार को चोर कह दिया और चौकीदारों की तपस्या के सामने सवालिया निशान खड़ा कर दिया। चौकीदार शब्द को दुनिया की ज्यादातर भाषाओं में समझा जाता है। इसका मतलब है कि इसे हर जगह स्वीकार किया जा चुका है। हमें बहुत आगे बढ़ना है। अपने बच्चों को बहुत बड़ा बनाना है, उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, सेना का जवान और देश का प्रधानमंत्री भी बनाना है, लेकिन हम सबको अपने बच्चों के भीतर चौकीदार के संस्कार को बनाए रखना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह बात लोगों को समझ में आ गई और कहा गया कि मोदी ने गाली को गहना बना लिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा भी था कि गाली को ही गहना बनाना, ये मैंने अपने जीवन का मंत्र बना लिया है और मैं पूरी निष्ठा और प्रमाणिकता के साथ आगे बढ़ता हूं। उसी क्रम में आंध्र प्रदेश के एक चौकीदार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ऑडियो बातचीत में सवाल करते हुए कहा था कि सर मैं भी चौकीदार और आप भी चौकीदार? इसपर पीएम मोदी ने कहा था कि मैं आपकी बात सुनकर आनंदित हूं। मैं और आप दोनों बराबर हैं। हम और आप दूसरों के सपनों को सुरक्षित रखने का काम करते हैं। शिक्षक और डॉक्टर भी चौकीदार हैं। सेना का जवान भी चौकीदार है और मैं भी देश का चौकीदार हूं। प्रधानमंत्री की इन बातों ने देश के बड़े समुदाय को एकजुट किया और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जो परिणाम आया, वो सबके सामने था।

मौजूदा हालात ये है कि बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वहां विविध कार्यक्रमों और अभियानों के माध्यम से विपक्षी नेता केंद्र और राज्य सरकार पर हमलावर है। बेशक, इस तरह के राजनीतिक कार्यक्रम चलते रहेंगे, लेकिन भाषा की मर्यादा का ख्याल रखना सबकी जिम्मेदारी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के बारे में अपशब्द कहा गया या नहीं, यह अलग जांच का विषय है। लेकिन इसे लेकर जिस तरह का शोर मचा है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि पहले भी जिस तरह से विपक्ष के हमले का जवाब सत्ता पक्ष ने दिया है, वह गंभीर रहा है। यदि इस बार भी उसी अंदाज में जवाब दे दिया गया तो फिर मोदी की वह बात सही साबित हो जाएगी कि वे गाली को गहना बना लेते हैं।

फिलहाल की राजनीति में इस वक्त गाली की जबर्दस्त गूंज है। भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में न सिर्फ सियासी रूप से टकरा रहे हैं, बल्कि भौतिक हमले भी सुनने को मिल रहे हैं। यदि इसी तरह ये सब चलता रहा तो कहानी अलग रूप ले सकती है। कई जगह तो इसे लेकर हिंसा की भी बात कही जा रही है। कथित गाली प्रकरण के विरोध में भाजपा के नेता और कार्यकर्ता शुक्रवार की सुबह पटना में सड़क पर उतर आए और जोरदार प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय सदाकत आश्रम तक मार्च किया और राहुल गांधी तथा इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं के खिलाफ नारेबाजी भी की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के बिहार प्रदेश मुख्यालय सदाकत आश्रम में कथित तौर पर तोड़फोड़ करने की भी बात कही जा रही है।

बिहार के भाजपा नेताओं ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि मंच से प्रधानमंत्री को गाली देना सिर्फ व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि पूरे देश के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला मामला है। खैर, इस घटना ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है और सियासी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। बताया जा रहा है कि राजग के सभी घटक दलों के नेता और कार्यकर्ता पटना के कुर्जी मोड़ से सदाकत आश्रम तक पैदल मार्च कर आए। वे राहुल गांधी का पुतला दहन करने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से उनकी भिड़ंत हो गई। दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सदाकत आश्रम के अंदर से राजग कार्यकर्ताओं पर पथराव शुरू कर दिया।

बहरहाल, गाली प्रकरण यदि बिहार से निकलकर राष्ट्रव्यापी रूप धारण करता है तो यह कुछ ज्यादा ही गंभीर हो जाएगा। फिलहाल, राजनीति के जानकार दोनों पक्षों के खास पहलुओं पर नजर रखे हुए हैं। इनमें यह विशेष है कि इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के बारे में कहे गए कथित अपशब्द का असर सकारात्मक होता है या नकारात्मक। यदि इसका असर सकारात्मक हो गया तो फिर यही कहा जाएगा कि मोदी में गाली को गहना बनाने का जबरदस्त हुनर है। खैर, देखते हैं कि क्या होता है। (लेखक आज समाज के संपादक हैं।)

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