Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में एक पंप ऑपरेटर दिनेश कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को उसकी नौकरी स्थायी करने का आदेश दिया। कर्मचारी पिछले 20 साल से खेल विभाग में काम कर रहा था, लेकिन उसकी नौकरी अभी तक स्थायी नहीं की गई थी। विभाग के रवैये से तंग आकर कर्मचारी को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
खेल विभाग को दिया आदेश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने साफ किया कि किसी कर्मचारी से 20 वर्षों तक लगातार सेवा लेने के बाद भी उसे नियमित न करना पूरी तरह से मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने कहा कि राज्य सरकार आदर्श नियोक्ता होने के नाते अपनी इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। अदालत ने खेल विभाग को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को याचिका दायर करने की तिथि से सभी परिणामी लाभों के साथ पंप ऑपरेटर के पद पर नियमित किया जाए।
‘जरूरत थी इसलिए रखा’
अदालत ने कहा कि इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण राज्य सरकार ने किया है और यह सरकारी संपत्ति है। केवल राज्यपाल के नोटिफिकेशन से बनी एक मैनेजिंग कमेटी की ओर से संचालित होने से इसका सरकारी वजूद खत्म नहीं हो जाता। अदालत ने कहा कि विभाग पिछले 20 वर्षों से याचिकाकर्ता से लगातार काम ले रहा है, जो यह साबित करता है कि खेल परिसर को इस पद की स्थायी जरूरत है। अगर जरूरत नहीं होती, तो उन्हें दो दशकों तक सेवा में रखने का कोई औचित्य नहीं था।
दूसरे पद पर भी नियुक्ति संभव
हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई राज्य किसी नागरिक की युवावस्था को सार्वजनिक सेवाओं के लिए उपयोग कर लेता है, तो बढ़ती उम्र में उसे अचानक वित्तीय तंगी या तकनीकी नियमों का हवाला देकर अधर में नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभाग में इस पद की उपलब्धता नहीं है, तो प्राधिकारी दिनेश कुमार को नियमित करने के लिए नया पद सृजित करने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करें।


