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कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर ज्ञानवर्धक कार्यक्रम

आज समाज डिजिटल, पानीपत : 

विद्यार्थियों ने कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया

दिनांक 01 सितंबर, 2022 को डॉ.एम. के. के आर्य मॉडल स्कूल में कक्षा ग्यारहवीं ए के विद्यार्थियों द्वारा एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया l जिसका विषय कृत्रिम बुद्धिमत्ता था l इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन श्री यशपाल ने किया l कशिश और रिद्धिमा ने मंच संचालन का कार्य बड़ी कुशलता के साथ किया l कार्यक्रम का आरंभ गायत्री मंत्र उच्चारण द्वारा किया गया l खुशी ने सुबह के ताज़ा समाचारों का वाचन किया l इश्मीत ,गुंजन, वंश दहिया, कार्तिक शर्मा, विन्नी,कार्तिक मिश्रा आदि ने अपने-अपने भाषण में बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी, आर्टिफिशियल का अर्थ है बनावटी (कृत्रिम) तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता। इसके ज़रिये कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है, जिसे तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास किया जाता है जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क काम करता है l कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तात्पर्य मशीनी बुद्धिमत्ता से है। यह मनुष्यों और जानवरों की प्राकृतिक बुद्धि के विपरीत है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ, मशीनें योजना, तर्क और समस्याओं को हल करने जैसे कार्य करती हैं। सबसे उल्लेखनीय, कृत्रिम बुद्धिमत्ता मशीनों द्वारा मानव बुद्धि का अनुकरण है। यह संभवतः प्रौद्योगिकी और नवाचार की दुनिया में सबसे तेजी से विकास कर रहा है। इसके अलावा, कई विशेषज्ञों का मानना ​​है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता I बड़ी चुनौतियों और संकट की स्थितियों को हल कर सकता है।

विद्यार्थियों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया

कक्षा ग्यारह के विद्यार्थी मोहम्मद हाशिर, अरमान, चशिता ने अपनी -अपनी कविताओं के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता को वर्णित किया l कक्षा के छात्रों द्वारा विषय से संबंधित रोचक और ज्ञानवर्धक लघु नाटिका की प्रस्तुति की गई l विद्यार्थियों द्वारा बहुत ही सुंदर व मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया गया l कक्षा के विद्यार्थी आनंद और राहुल ने ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी प्रस्तुत की जिसमें ग्यारहवीं के सभी वर्गों के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया l

कार्यक्रम की सराहना हुई

इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक महोदय श्री आर.एल. सैनी , विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मधुप परासर और शैक्षिक सलाहकार श्रीमति मंजू सेतिया ने बच्चों इस कार्यक्रम की सराहना की, विद्यालय की भाषा व गतिविधि प्रभारी सुश्री मीरा मरवाह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए कंप्यूटर सिस्टम या मशीनों को इस तरह से बनाने की कोशिश की जा रही है, कि वे दृश्य धारणा, इंसानों की पहचान करने जैसे कार्य आसानी से कर सके l सरल भाषा में कहा जाए तो इन मशीनों को इंसानों जैसा दिमाग दिया जा रहा है ताकि वो इंसानों की तरह निर्णय भी ले सके l प्रत्येक क्षेत्र में यह कुशलता के साथ कार्य कर रहे हैं l इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैं l मनुष्य को अपनी प्रगति और विकास के लिए इस बुद्धिमता को सकारात्मक कार्यों में प्रयोग करना होगा l

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