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भारत को एक सूत्र में पिरोती है हिंदी: प्रो. टंकेश्वर कुमार

नीरज कौशिक, महेंद्रगढ़:

  • हकेवि में हिंदी पखवाड़े का हुआ समापन
  • प्रतियोगिता के विजेताओं को कुलपति ने किया सम्मानित

भारत विविधताओं का देश है। बावजूद इसके हिंदी भाषा देश के सभी लोगों को एक सूत्र में पिरोती है। हिंदी भारत की राजभाषा है। हिंदी की स्वीकार्यता देश के साथ-साथ विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है। यह विचार हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने विश्वविद्यालय में संगोष्ठी एवं हिंदी पखवाड़ा के समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने हिंदी पखवाड़ा के सफल आयोजन के लिए राजभाषा अनुभाग, हिंदी पखवाड़ा आयोजन समिति व पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग को बधाई दी। इस अवसर पर हिंदी पत्रकारिता का विस्तार एवं रोजगार की संभावनाएं विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में आकाशवाणी, नई दिल्ली के पूर्व सहायक निदेशक कार्यक्रम श्री जैनेंद्र सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

हिंदी हमारी मातृभाषा है

विश्वविद्यालय में 14 सितम्बर शुरू हुए हिंदी पखवाड़े के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में कुलपति ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और इसका प्रचार-प्रसार हमारा कर्त्तव्य है। कुलपति ने कहा कि जहां तक बात पत्रकारिता की है तो हिंदी का योगदान इस क्षेत्र में भी उल्लेखनीय रूप से देखने को मिलता है। विशेषज्ञ वक्ता जैनेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में विशेष रूप से आवाज के आकर्षण को उल्लिखित किया है। अवश्य ही उनके संबोधन से प्रतिभागी लाभांवित होंगे। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता जैनेंद्र सिंह ने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा ज्ञान है। भाषा और संस्कृति ही किसी देश की असली पहचान होती है। भाषा सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि भारत का आजाद करवाने में हिंदी भाषा जनजागरण की भाषा बनी और आज रोजगार की दृष्टि से देखें तो हिंदी का क्षेत्र विस्तृत है। हिंदी पत्रकारिता में रोजगार की अपार संभावनाएं उपलब्ध हैं। आज डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हजारों युवा ने सिर्फ स्वरोजगार अपना रहे हैं बल्कि दूसरों को नौकरी उपलब्ध करवा रहे हैं। जैनेंद्र सिंह ने सामुदायिक रेडियों के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला। वक्तव्य के बाद उन्होंने विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया।

हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने हिंदी के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कुलपति के निर्देशन में विश्वविद्यालय में लगातार हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए जारी प्रयासों की सराहना की। हिंदी पखवाड़ा आयोजन समिति के समन्वयक प्रो. सारिका शर्मा ने हिंदी पखवाड़े की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने हिंदी के महत्त्व से प्रतिभागियों को अवगत कराया। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। यह प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा होने के साथ हमारी राजभाषा भी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, टी.वी., सिनेमा के क्षेत्र में हिंदी का अपना अलग ही स्थान है। आयोजन में हिंदी पखवाड़े से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

प्रतियोगिता के परिणाम

विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों व शोधार्थियों हेतु आयोजित हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता में शैलेष मलिंडा को प्रथम, सचिन यादव को द्वितीय व शिवशंकर प्रसाद को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के राजकीय विद्यालयों के लिए आयोजित हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जांट की शिवानी ने प्रथम तथा राजकीय माध्यमिक विद्यालय धोली की छात्रा श्रुति व शिवानी ने क्रमशः द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षणेतर कर्मचारियों के लिए आयोजित ऑनलाइन प्रतियोगिता व हिंदी टाइपिंग प्रतियोगिता में पवन कुमार, चेतन कुमार व तारा चंद शर्मा ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। समापन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शिक्षणेतर कर्मचारी व विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच का संचालन डॉ. नीरज करन ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुरेंद्र कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रो. प्रमोद कुमार, डॉ. रेनु यादव, डॉ. सिद्धार्थ शंकर राय सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी व शिक्षणेतर कर्मचारी उपस्थित रहे।

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