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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2022 के हर पहलु की प्रधानमंत्री ने ली फीडबैक :सांसद नायब सिंह सैनी

मनोज वर्मा,कैथल:
कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र के सांसद नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल को बधाई दी है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2022 के हर पहलू को जानने का प्रयास किया। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कुरुक्षेत्र के विशेष स्मृति चिन्ह भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप को भी भेंट किया गया है।

सांसद नायब सिंह सैनी ने भेंट किया भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप

सांसद नायब सिंह सैनी ने बातचीत करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र के लाखों लोगों की आवाज और भावनाओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष रखने के लिए दिल्ली में विशेष मुलाकात की है। इस मुलाकात में सबसे पहले क्षेत्र वासियों की तरफ से भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप को स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र के विकास को लेकर चर्चा की गई और कई छोटी और बड़ी परियोजनाओं को प्रधानमंत्री के समक्ष रखा गया। उन्होंने कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र की सभी योजनाओं को बड़े ध्यान से सुना। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2022 के सफल आयेाजन के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल को बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुरुक्षेत्र में 19 नवंबर से लेकर 6 दिसंबर तक चले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के बारे में विस्तार से फीडबैक ली है। इस महोत्सव के बारे में जानकारी दी गई कि देश विदेश से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का अवलोकन करने के लिए लगभग 40 से 45 लाख लोग 18 दिनों में कुरुक्षेत्र पहुंचे।

सांसद ने कहा कि इस महोत्सव में शिल्प और सरस मेला मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहा। इसके अलावा सूचना जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग की राज्य स्तरीय प्रदर्शनी, हरियाणा पैवेलियन, गीता शिल्प कला उदयान, पार्टनर स्टेट मध्य प्रदेश का पैवेलियन व उनकी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण का केन्द्र रही। प्रधानमंत्री के समक्ष यह विषय भी रखा गया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के साथ डिजिटल माध्यम से करीब 1 करोड लोग जुडे और सभी ने सोशल और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को देखा। यह महोत्सव शिल्प कला के साथ-साथ लोक संस्कृति की संरक्षण का केन्द्र भी बन गया है ।

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