- वायरिंग व प्लेटिंग का काम कर पूरा हुआ तो ही होगा ट्रायल
Hydrogen train trials(आज समाज नेटवर्क)जींद। कल को होने वाले हाइड्रोजन ट्रेन के हाई स्पीड ट्रायल पर संशय के बादल मंडरा गए हैं। ट्रायल प्रक्रिया के लिए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की टीम वायरिंग व प्लेटिंग का काम कर रही है। अगर यह काम पूरा हो जाता है तो शुक्रवार को ट्रेन का ट्रायल होगा। वहीं अगर यह काम पूरा नहीं होता है तो ट्रेन का ट्रायल को लेकर फिर से शेड्यूल बनाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि वायरिंग और प्लेटिंग के काम में कुछ तकनीकी कमी आने के कारण वीरवार देर शाम तक काम चलता रहा।
ट्रेन का ट्रायल जींद से दिल्ली व सोनीपत रूट पर होना है। हाई स्पीड ट्रायल के जरिये ट्रेन के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाएगी। इसमें ब्रेकिंग सिस्टम, इंजन की क्षमता, सुरक्षा मानकों, कंपन, ट्रैक पर स्थिरता और विभिन्न परिस्थितियों में ट्रेन के प्रदर्शन का आंकलन किया जाएगा। आरडीएसओ की विशेषज्ञ टीम ट्रायल के दौरान प्राप्त होने वाले सभी तकनीकी आंकड़ों का विश्लेषण करेगी।
ट्रायल से पहले ट्रेन के कुछ हिस्सों में वायरिंग और प्लेटिंग के कार्य में तकनीकी कमियां पाई गई
गौरतलब है कि इससे पहले हाइड्रोजन ट्रेन का कम गति वाला ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अब रेलवे द्वारा उच्च गति परीक्षण के माध्यम से ट्रेन के विभिन्न तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा प्रणाली, ऊर्जा आपूर्ति और संचालन क्षमता का आकलन किया जाना है। ट्रेन का हाई स्पीड ट्रायल दिल्ली से सोनीपत होते हुए जींद रूट पर किया जाना प्रस्तावित है। इस ट्रायल के दौरान ट्रेन को अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाया जाना है। रेलवे अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में होने वाला यह ट्रायल हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रायल से पहले ट्रेन के कुछ हिस्सों में वायरिंग और प्लेटिंग के कार्य में तकनीकी कमियां पाई गई हैं। इन खामियों को दूर करने के लिए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की टीम लगातार कार्य कर रही है। टीम द्वारा वायरिंग की दोबारा जांच, कनेक्शन की गुणवत्ता परीक्षण और प्लेटिंग से जुड़े कार्यों को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि ट्रायल के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी समस्या न आए। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि सभी तकनीकी मानक समय पर पूरे हो जाते हैं तो ट्रायल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराया जाएगा। वहीं किसी भी खामी के बने रहने की स्थिति में ट्रायल की तिथि में बदलाव भी किया जा सकता है।


