Homeहरियाणायमुनानगरफैक्ट्रियों पर केंद्र की टीमों की रेड, विरोध में श्रमिक

फैक्ट्रियों पर केंद्र की टीमों की रेड, विरोध में श्रमिक

प्रभजीत सिंह, यमुनानगर:
केंद्र सरकार की फर्टिलाइजर की टीमों की रेड से प्लाईवुड व्यापारियों में हड़कंप मच गया। अलग-अलग टीमों ने यहां पर रेड की। जोडियो में नीलगिरी प्लाईवुड पर टीम पहुंची। जिसके विरोध में श्रमिक सड़कों पर आ गए। यहां पर श्रमिकों ने जाम लगा दिया। सड़क पर लकड़ी और डालकर पूरा रोड बंद कर दिया गया। अन्य प्लाईवुड व्यापारियों ने विरोध जताते हुए अपनी इकाइयां बंद कर दी।

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प्लाईवुड व्यापारियों ने बंद कर दी इकाइयां

इस संबंध में व्यापारियों का कहना है कि पहले ही व्यापार मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में जीएसटी की रेड से कारोबार पर असर पड़ रहा है। काम बंद हो रहा है। इस तरह से वह व्यापार नहीं कर सकेंगे। वहीं फैक्ट्री मैनेजर अनिल ठाकुर ने कहा कि मालिकों ने फैक्ट्रियां बंद कर दी है। उनके रोजगार पर संकट आ गया है। पुराने बिल टीम मांग रही है। कहां से पुराने बिल दें। वीरवार से ही मिनिस्ट्री आफ फर्टिलाइजर की टीमों के प्लाईवुड फैक्ट्रियों पर रेड की सूचना मिल गई थी, क्योंकि पुलिस सुरक्षा के लिए पहले ही प्रशासन को पत्र भेज दिया था। यह सुरक्षा इसलिए भी मांगी गई थी, क्योंकि 25 अप्रैल को करेहडा खुर्द में रेड के दौरान जीएसटी की टीम पर हमला हो चुका है।

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यूरिया के बिलों में हेराफेरी की जांच

बताया जा रहा है कि सुबह छह टीमों ने अलग-अलग जगह पर रेड की। इसमें जोडियो, इंडस्ट्री एरिया और पांसरा में रेड की। वहीं टीम के एक अधिकारी ने बताया कि तीन साल का यूरिया का रिकार्ड मांगा जा रहा है। यमुनानगर में प्लाईवुड इंडस्ट्री में सब्सिडी वाले कृषि यूरिया का प्रयोग किया जाता है। अवैध रूप से इस यूरिया का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि टेक्निकल यूरिया काफी महंगा पड़ता है। सब्सिडी वाला यूरिया करीब 300 रुपये में पड़ता है। जबकि टेक्निकल यूरिया 4600 रुपये प्रति बैग पड़ता है।

छोटी-बड़ी 1200 फैक्ट्रियां प्लाईवुड की

इसमें ही प्लाईवुड फैक्ट्री संचालक हेराफेरी करते हैं। यह टेक्निकल यूरिया का फर्जी बिल तैयार कराते हैं। इसमें खाद विक्रेता की भी मिलीभगत होती है। अब यह टीम इस बात की जांच करेगी कि कारोबारी जो बिल उन्हें दिखा रहे हैं क्या वो सही हैं। यह टीमें टेक्निकल बिल इश्यू करने वाली फर्म तक भी जाएगी। बता दें यहां प्लाईवुड की छोटी-बड़ी 1200 फैक्ट्रियां हैं। अधिकतर में कृषि योग्य खाद का प्रयोग होता है।

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