आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होता है चातुर्मास का आरंभ
Chaturmas, (आज समाज), नई दिल्ली: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व माना गया है। ये वो समय माना जाता है, जब जगत के पालनहार भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं। इस दौरान भगवान विष्णु पाताल लोक में वास करते हैं। चातुर्मास के दौरान हिंदू धर्म में किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक काम नहीं होते हैं। चातुर्मास का प्रारंभ आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से माना जाता है। चातुर्मास में सावन, भाद्रपद अश्विन और कार्तिक माह आते हैं।
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन योगनिद्रा से जागते हैं भगवान विष्णु
भगवान विष्णु कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन योगनिद्रा से जागते हैं, इसलिए उसको देवउठनी एकदशी कहा जाता है। साल 2026 में भगवान विष्णु 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन योगनिद्रा में लीन होंगे और फिर 20 नवंबर को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के दिन उठेंगे। इसी के साथ शुभ और मांगलिक कामों की शुरूआत हो जाएगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि चातुर्मास के दौरान भगवान पाताल लोक में क्यों वास करते हैं? आइए इसकी कहानी जानते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार
चातुर्मास की कथा राजा बलि से जुड़ी बताई जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा बलि असुरों के राजा थे। उन्होंने इंद्र से सत्ता छीन ली थी और ब्रह्मांड पर राज करना शुरू कर दिया था। तब सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। इसके बाद लिया भगवान ने वामन अवतार लिया। भगवान का ये अवतार एक बौने ब्राह्मण का माना जाता है। भगवान इस अवतार में राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे और उनसे तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने वामन भगवान को तीन पग भूमि देने का संकल्प कर लिया।
फिर वामन भगवान ने पहले पग में सारी धरती और दूसरे पग में सारा आकाश नाप लिया। जब तीसरे पग के लिए कोई स्थान न बचा तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया और भगवान से अपना पग उनके सिर पर रखने की प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु अपने असली रूप में आ गए और प्रसन्न होकर राजा बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया। साथ ही वरदान मांगने को भी कहा। तब बलि ने भगवान विष्णु से कहा कि मैं जब भी सोकर उठूं तों तो साक्षत आपके दर्शन हो। आप पाताल लोक की शत्रुओं से रक्षा करें।
भगवान विष्णु पाताल लोक चले गए
भगवान विष्णु ने राजा बलि को ये वरदान दे दिया और उनके साथ पाताल लोक चले गए। इधर जब काफी समय तक भगवान श्री हरि विष्णु वैकुंठ नहीं लौटे तो माता लक्ष्मी को चिंता हुई। तब नारद जी ने माता लक्ष्मी को उपाय बताया। फिर माता लक्ष्मी श्रावण पूर्णिमा के दिन राजा बलि के घर पहुंची। पहले उन्होंने उनको राखी बांधी। उसके बाद पूरी बात बताई।
माता ने राजा बलि से कहा कि वो भगवान को वैकुंठ धाम वापस भेज दें। इसके बाद राजा बलि ने भगवान विष्णु को उनके वरदान से मुक्त कर दिया। तब भगवान ने राजा बलि को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मैं चातुर्मास में पाताल लोक में निवास करूंगा। यही कारण है कि भगवान विष्णु चातुर्मास के चार महीनों में पाताल लोक में वास करते हैं।


