जानिए क्या है इसका रहस्य
Shiv Puja, (आज समाज), नई दिल्ली: भोलेनाथ के भक्तों का शिवालयों में तांता लगा रहता है। वे भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। यही नहीं, प्रदोषकाल के समय भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। पूजा के समय आपने देखा होगा कि श्रद्धालु 3 बार ताली बजाते है। आपने सोचा है कि इसके पीछे का रहस्य क्या है? आइए जानते हैं कि शिवलिंग के सामने ताली बजाने के महत्व, लाभ नियमों के बारे में।
ताली बजाने को विशेष महत्व
सनातन परंपरा में ताली बजाने को विशेष महत्व दिया गया है। ये केवल उत्साह व्यक्त करने का साधन नहीं है बल्कि, इसे भजन और कीर्तन के दौरान आनंद और ईश्वर के साथ मगन हो जाने का प्रतीक है। जब भक्त ताली बजाकर ईश्वर की स्तुति करते हैं, तो माना जाता है कि उनका मन, वाणी और शरीर पूजा में एकाग्र है। यही कारण है कि सामूहिक भजन से लेकर आरती तक ताली बजाने का विशेष महत्व है।
शिवलिंग के सामने क्यों बजाते हैं ताली?
भगवान शिव को ध्यान, मौन और समाधि का देवता माना जाता है। वे नटराज रूप में दिव्य लय और सृष्टि के मंत्रोच्चार के स्वामी भी हैं इसलिए भोलेनाथ की पूजा में ध्वनि का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती के दौरान घंटियों, शंखों और ताली की एकसाथ ध्वनि वातावरण को सात्विक और सुखद बनाती है।
यह मंत्रोच्चार भक्तों के मन को एकाग्र करने में भी सहायक माना जाता है। शिवलिंग के सामने ताली बजाने का उद्देश्य भगवान को जगाना नहीं है बल्कि हमारे भीतर छिपी भक्ति और पॉजिटिव चेतना को जगाना है।
शिवलिंग के सामने 3 बार ताली बजाने का अर्थ
- पहली ताली: मन में उठने वाले अहंकार को खत्म करती है। क्रोध और नकारात्मक विचार भी क्षीण होते हैं।
- दूसरी ताली: भगवान शिव के प्रति पूर्ण भाव, भक्ति और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।
- तीसरी ताली: आपके, आपके परिवार, समाज और समस्त सृष्टि के सुख, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना के लिए होती है।
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