
हर महीने की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है प्रदोष व्रत
Sawan Pradosh Vrat, (आज समाज), नई दिल्ली: सावन का महीना अत्यंत पावन होता है और यह पूरा समय शिव जी की भक्ति को समर्पित होता है। इस दौरान पूजा-पाठ करना, शिवलिंग को जल अर्पित करना, व्रत उपवास करना मुख्य रूप से अत्यंत फलदायी माना जाता है। सावन में पड़ने वाले व्रत-त्योहारों में से एक प्रमुख माना जाता है प्रदोष व्रत। यह व्रत वैसे तो हर महीने की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है या फिर यदि द्वादशी तिथि को प्रदोष काल पड़ रहा होता है तब यह व्रत रखा जाता है। पूरे साल में 24 व्रत पड़ते हैं और हर महीने में दो व्रत मनाए जाते हैं।
किसी भी महीने में रखा जाने वाला यह व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन सावन में इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। जो व्यक्ति सावन में पड़ने वाले प्रदोष व्रत में विधि-विधान से शिव पूजन करता है और उन्हें प्रसन्न करने के उपाय आजमाता है उसकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। आइए आपको बताते हैं साल 2026 में सावन के महीने में कब पड़ेगा पहला प्रदोष व्रत और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
10 अगस्त को रखा जाएगा प्रदोष व्रत
इस साल सावन महीने का का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा। यह सावन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ा रहा है। यह व्रत इस बार और विशेष माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन सावन का दूसरा सोमवार व्रत भी पड़ रहा है। सावन के सोमवार के दिन ही प्रदोष व्रत होने की वजह से इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं जिसमें पूजन करना भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी होगा।
सावन के पहले प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त
- हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि आरंभ- 10 अगस्त, सोमवार प्रात: 8 बजे से।
- सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि समापन- 11 अगस्त, मंगलवार, प्रात: 4 बजकर 54 मिनट पर।
- प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त: चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में ही होता है। इसलिए 10 अगस्त शाम 7 बजकर 9 मिनट से रात्रि 9 बजकर 23 मिनट तक पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त है, क्योंकि इसी समय प्रदोष काल प्राप्त हो रहा है।
- ब्रह्म मुहूर्त: 10 अगस्त, प्रात: 4 बजकर 49 मिनट से प्रात: 5 बजकर 34 मिनट तक।
- अभिजित मुहूर्त: 10 अगस्त, दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 9 मिनट तक।
सावन के पहले प्रदोष व्रत का महत्व क्या है?
हिंदू धर्म में किसी भी प्रदोष व्रत का फल अलग-अलग मिलता है। जब किसी भी महीने में सोमवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ता है तब इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है, जब या शनिवार को पड़ता है तब शनि प्रदोष कहलाता है। इस प्रकार इस साल सावन के सोमवार को पड़ने वाला पहला प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
इस दिन यदि आप पूरी श्रद्धा के साथ शिव जी का पूजन माता पार्वती के साथ करेंगे तो समस्त पापों को दूर करने में मदद मिलेगी। इस व्रत के फलस्वरूप आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। अगर आप शीघ्र विवाह की इच्छा से यह व्रत करते हैं तो जल्द ही आपके लिए सुयोग्य जीवनसाथी के योग बनेंगे।

