Sawan Jalabhishek: सावन में इस तरह करें भोलेनाथ का जलाभिषेक, हर मनोकामना हो जाएगी पूरी!

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Sawan Jalabhishek: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। इसके बाद सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया, जिससे विष की तपिश शांत हुई।
Sawan Jalabhishek: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। इसके बाद सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया, जिससे विष की तपिश शांत हुई।

जानें, जलाभिषेक की सही विधि और उससे जुड़े जरूरी नियम
Sawan Jalabhishek, (आज समाज), नई दिल्ली: हिंदू धर्म में सावन के महीने का एक अलग ही महत्व है। यह पूरा महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। शिव भक्तों को साल भर इस महीने का बेसब्री से इंतजार रहता है। मान्यता है कि सावन में भोलेनाथ पृथ्वी पर ही निवास करते हैं और जो भी भक्त इस दौरान उनकी सच्ची श्रद्धा से पूजा करता है, उसकी झोली खुशियों से भर जाती है।

शिव जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल और अचूक उपाय है, जलाभिषेक। हालांकि, सावन में जलाभिषेक करते समय अगर कुछ विशेष नियमों और सही विधि का ध्यान रखा जाए, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।

30 जुलाई से शुरू होगा सावन माह

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सावन माह की शुरूआत 30 जुलाई, गुरुवार से होगी। वहीं, इसका समापन 28 अगस्त 2026 को होगा। इस पूरे महीने भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, शिव मंत्रों का जाप और सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना जाता है।

इस तरह करें भोलेनाथ का जलाभिषेक

  • सावन में सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
  • यदि संभव हो तो किसी शिव मंदिर जाएं या घर में स्थापित शिवलिंग की पूजा करें।
  • सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करें।
  • इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक कर सकते हैं। फिर दोबारा जल चढ़ाकर शिवलिंग को साफ करें।
  • अब भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, भांग, सफेद चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  • इसके बाद धूप-दीप जलाएं और फल या मिठाई का भोग लगाएं
  • पूजा के दौरान ओम नम: शिवा मंत्र का जाप करें।
  • आखिर में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और अपनी मनोकामना प्रार्थना के रूप में उनके सामने रखें।

जलाभिषेक करते समय इन नियमों का रखें ध्यान

भगवान शिव को हमेशा साफ और शुद्ध जल ही अर्पित करें। यदि गंगाजल न हो तो उसे जल में मिलाकर चढ़ाना शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर हमेशा ताजे और बिना कटे बेलपत्र चढ़ाएं। शिव पूजा में हल्दी, सिंदूर और केतकी का फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। पूजा के समय मन शांत रखें और किसी प्रकार की जल्दबाजी न करें।

जलाभिषेक में किन चीजों का कर सकते हैं उपयोग?

सावन में भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, गन्ने का रस, बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद चंदन, भस्म, अक्षत और सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं। इन सभी चीजों को भोलेनाथ की पूजा में शुभ माना गया है।

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