Homeराशिफलकन्या राशिफल 21 अप्रैल 2022 Virgo Horoscope 21 April 2022

कन्या राशिफल 21 अप्रैल 2022 Virgo Horoscope 21 April 2022

***|| जय श्री राधे ||***

*** महर्षि पाराशर पंचांग ***
*** अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
*** *** *** *** *** *** *** ***

दिनाँक:- 18/04/2022, सोमवार
द्वितीया, कृष्ण पक्ष
वैशाख
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

*** दैनिक राशिफल ***

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

कन्या

Virgo Horoscope 21 April 2022: आज का दिन आपके लिए सामान्य रहने वाला है। किसी व्यक्ति विशेष का सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार लाभदायक रहेगा। पारिवारिक सदस्यों का सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। नौकरी में मातहतों से अनबन हो सकती है। शारीरिक कष्ट संभव है। जल्दबाजी से हानि होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। धन प्राप्ति सुगम होगी। कार्यक्षेत्र में यदि आप कुछ परिवर्तन करना चाहते हैं, तो वह आपके लिए लाभदायक रहेगा। आप किसी धार्मिक आयोजन में सम्मिलित हो सकते हैं, जहां आपका लोगों से तोलमोल कर बोलना बेहतर रहेगा, नहीं तो लोग आपकी किसी बात का बतंगड़ बना सकते हैं। जो लोग रोजमर्रा के कामों को पीछे छोड़कर किसी और कामों में लगे हैं, तो उन्हें अपने कामों की और सतर्क रहना होगा, नहीं तो उनका नुकसान हो सकता है। यदि कोई कानूनी संबंधित विवाद चल रहा है, तो उसमें आपको किसी को रिश्वत भी देनी पड़ सकती है।

तिथि——— द्वितीया 19:23:18 तक
पक्ष———————— कृष्ण
नक्षत्र——— विशाखा 27:37:33
योग———— सिद्वि 20:22:10
करण———– तैतुल 08:43:34
करण—————गर 19:23:18
वार———————– सोमवार
माह———————– वैशाख
चन्द्र राशि——– तुला 22:07:01
चन्द्र राशि——————-वृश्चिक
सूर्य राशि——————– मेष
रितु————————- वसंत
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर————————नल
संवत्सर (उत्तर)—————– राक्षस
विक्रम संवत—————- 2079
विक्रम संवत (कर्तक)———- 2078
शाका संवत—————- 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:53:12
सूर्यास्त—————- 18:44:16
दिन काल————- 12:51:03
रात्री काल————- 11:07:57
चंद्रास्त—————- 06:51:45
चंद्रोदय—————- 20:36:18

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लग्न—- मेष 3°48′ , 3°48′

सूर्य नक्षत्र—————– अश्विनी
चन्द्र नक्षत्र—————- विशाखा
नक्षत्र पाया——————–रजत

*** पद, चरण ***

ती—- विशाखा 11:04:41

तू—- विशाखा 16:36:07

ते—- विशाखा 22:07:01

तो—- विशाखा 27:37:33

*** ग्रह गोचर ***

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=मीन 03:12 अश्विनी , 2 चे
चन्द्र =तुला 20°23 , विशाखा, 1 ती
बुध =मेष 19 ° 07′ भरणी ‘ 2 लू
शुक्र=कुम्भ 19°05, शतभिषा ‘ 4 सी
मंगल=कुम्भ 08°30 ‘ शतभिषा’ 1 गो
गुरु=मीन 00°30 ‘ पू o भा o, 4 दी
शनि=मकर 29°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व)वृषभ 29°45’ कृतिका , 1 अ
केतु=(व) तुला 29°45 विशाखा , 3 ते

*** मुहूर्त प्रकरण ***

राहू काल 07:30 – 09:06 अशुभ
यम घंटा 10:42 – 12:19 अशुभ
गुली काल 13:55 – 15:32 अशुभ
अभिजित 11:53 -12:44 शुभ
दूर मुहूर्त 12:44 – 13:36 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:19 – 16:10 अशुभ

चोघडिया, दिन
अमृत 05:53 – 07:30 शुभ
काल 07:30 – 09:06 अशुभ
शुभ 09:06 – 10:42 शुभ
रोग 10:42 – 12:19 अशुभ
उद्वेग 12:19 – 13:55 अशुभ
चर 13:55 – 15:32 शुभ
लाभ 15:32 – 17:08 शुभ
अमृत 17:08 – 18:44 शुभ

चोघडिया, रात
चर 18:44 – 20:08 शुभ
रोग 20:08 – 21:31 अशुभ
काल 21:31 – 22:55 अशुभ
लाभ 22:55 – 24:18* शुभ
उद्वेग 24:18* – 25:42* अशुभ
शुभ 25:42* – 27:05* शुभ
अमृत 27:05* – 28:29* शुभ
चर 28:29* – 29:52* शुभ

होरा, दिन
चन्द्र 05:53 – 06:57
शनि 06:57 – 08:02
बृहस्पति 08:02 – 09:06
मंगल 09:06 – 10:10
सूर्य 10:10 – 11:14
शुक्र 11:14 – 12:19
बुध 12:19 – 13:23
चन्द्र 13:23 – 14:27
शनि 14:27 – 15:32
बृहस्पति 15:32 – 16:36
मंगल 16:36 – 17:40
सूर्य 17:40 – 18:44

होरा, रात
शुक्र 18:44 – 19:40
बुध 19:40 – 20:36
चन्द्र 20:36 – 21:31
शनि 21:31 – 22:27
बृहस्पति 22:27 – 23:23
मंगल 23:23 – 24:18
सूर्य 24:18* – 25:14
शुक्र 25:14* – 26:10
बुध 26:10* – 27:05
चन्द्र 27:05* – 28:01
शनि 28:01* – 28:57
बृहस्पति 28:57* – 29:52

*** उदयलग्न प्रवेशकाल *** 

मेष > 04:48 से 06:37 तक
वृषभ > 06:37 से 08:30 तक
मिथुन > 08:30 से 10:43 तक
कर्क > 10:43 से 13:00 तक
सिंह > 13:00 से 15:12 तक
कन्या > 15:12 से 07:24 तक
तुला > 07:24 से 07:39 तक
वृश्चिक > 07:39 से 09:55 तक
धनु > 09:55 से 00:00 तक
मकर > 00:00 से 01:46 तक
कुम्भ > 01:46 से 03:19 तक
मीन > 03:19 से 04:48 तक

विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 2 + 2 + 1 = 20 ÷ 4 = 0 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

*** ग्रह मुख आहुति ज्ञान ***

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

मंगल ग्रह मुखहुति

शिव वास एवं फल -:

17 + 17 + 5 = 39 ÷ 7 = 4 शेष

सभायां = संताप कारक

भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

*** विशेष जानकारी ***

* सर्वार्थसिद्धि योग 27:37 से

* पुरातत्व रक्षण दिवस

*तात्यांटोपे शहीद दिवस

*गुरु तेगबहादुर व अंगददेव जयन्ती

*** शुभ विचार ***

पुष्पे गन्धतिले तैलं काष्ठे वह्नि पयो घृतम् ।
इक्षौ गुडं तथा देहे पश्याऽऽत्मानं विवेकतः ।।
।। चा o नी o।।

जिस प्रकार एक फूल में खुशबु है. तील में तेल है. लकड़ी में अग्नि है. दूध में घी है. गन्ने में गुड है. उसी प्रकार यदि आप ठीक से देखते हो तो हर व्यक्ति में परमात्मा है.

*** सुभाषितानि ***

गीता -: गुणत्रयविभागयोग अo-14

मानापमानयोस्तुल्यस्तुल्यो मित्रारिपक्षयोः ।,
सर्वारम्भपरित्यागी गुणातीतः सा उच्यते ॥,

जो मान और अपमान में सम है, मित्र और वैरी के पक्ष में भी सम है एवं सम्पूर्ण आरम्भों में कर्तापन के अभिमान से रहित है, वह पुरुष गुणातीत कहा जाता है॥,25॥,

*** आपका दिन मंगलमय हो *** 
*** *** *** *** *** *** *** 
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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