Kanwar Yatra 2026: हरिद्वार, गंगोत्री या गौमुख? कांवड़ यात्रा में जानिए कहां से जल लाना माना जाता है सबसे शुभ!

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कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु पवित्र गंगा नदियों से जल भरकर लाते हैं और शिवजी का जलाभिषेक करते हैं।
Kanwar Yatra 2026: सावन का पवित्र महीना शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है।
Kanwar Yatra 2026: सावन का पवित्र महीना शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है।

30 जुलाई से शुरू होगा सावन माह
Kanwar Yatra 2026, (आज समाज), नई दिल्ली: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे खास माना जाता है। इस दौरान देशभर में कांवड़ यात्रा निकाली जाती है। लाखों शिव भक्त पवित्र नदियों से जल लेकर पैदल अपने-अपने गांव और शहरों की ओर जाते हैं और सावन के सोमवार या किसी शुभ तिथि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। कांवड़ यात्रा को लेकर भक्तों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि हरिद्वार, गंगोत्री और गौमुख में से किस स्थान का गंगाजल भगवान शिव को चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तीनों ही स्थानों का अपना अलग महत्व है और इन जगहों से गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करना पुण्यकारी माना जाता है। हालांकि, गौमुख से जल लाने की यात्रा सबसे कठिन और तपस्या से जुड़ी होने के कारण इसे विशेष और सर्वोच्च माना जाता है।

इस साल पावन कांवड़ यात्रा यानी सावन माह की शुरूआत 30 जुलाई 2026 से होने जा रही है। वहीं, सावन का समापन 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के साथ होगा।

गौमुख से गंगाजल लाना क्यों माना जाता है सबसे खास?

गौमुख को गंगा नदी का प्रमुख उद्गम स्थल माना जाता है। यह स्थान उत्तराखंड के गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां गंगा अपने सबसे प्राकृतिक और शुद्ध स्वरूप में दिखाई देती हैं। गौमुख तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है। भक्तों को कठिन पहाड़ी रास्तों और लंबी पैदल यात्रा से होकर गुजरना पड़ता है।

इसी वजह से गौमुख से जल लाकर भगवान शिव को चढ़ाने की परंपरा को कठिन तपस्या से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक दृष्टि से भी गौमुख का जल विशेष माना जाता है, क्योंकि इसे गंगा की शुरूआती धारा से जुड़ा हुआ माना जाता है। यही वजह है कि कांवड़ यात्रा में गौमुख से जल लाना सबसे कठिन और सर्वोच्च कोटि की कांवड़ यात्रा के रूप में देखा जाता है।

गंगोत्री से जल लाने का क्या महत्व है?

गंगोत्री धाम हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। मान्यता है कि मां गंगा ने इसी क्षेत्र में धरती पर अवतरण किया था। गंगोत्री में स्थित गंगा मंदिर भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान गंगोत्री से जल लाने का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

हरिद्वार से गंगाजल लाने की क्या मान्यता है?

कांवड़ यात्रा में हरिद्वार का भी खास महत्व है। हर साल सावन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं और हर की पौड़ी समेत गंगा के अलग-अलग घाटों से गंगाजल भरकर कांवड़ यात्रा शुरू करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, यहां गंगा स्नान करने से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। इसलिए हरिद्वार में गंगा नदी का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है।

तीनों जगहों में क्या है अंतर?

धार्मिक मान्यताओं की बात करें तो गौमुख से जल लाना सबसे कठिन यात्रा और तपस्या से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इसे विशेष महत्व दिया जाता है। गंगोत्री मां गंगा के प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में बेहद पवित्र मानी जाती है, जबकि हरिद्वार से जल लाना कांवड़ यात्रा की सबसे लोकप्रिय परंपराओं में शामिल है। इसलिए कोई भक्त गौमुख से जल लाए या गंगोत्री या फिर हरिद्वार से, इन तीनों जगह में ही जल लाना पुण्यदायी माना गया है।

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