Rainfall deficit in India : बारिश की कमी से 315 जिले होंगे प्रभावित, 111 की स्थिति ज्यादा खराब

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Rainfall deficit in India : बारिश की कमी से 315 जिले होंगे प्रभावित, 111 की स्थिति ज्यादा खराब
Rainfall deficit in India : बारिश की कमी से 315 जिले होंगे प्रभावित, 111 की स्थिति ज्यादा खराब

कमजोर मानसून पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्य मंत्रियों के साथ किया मंथन

Rainfall deficit in India (आज समाज), नई दिल्ली : इस साल के दक्षिण पश्चिम मानसून ने चार जून को देश में दस्तक दे दी थी। हालांकि उसके जल्द बाद ही हालात ऐसे बन गए की मानसून अपनी गति खो बैठा और एक ही जगह रुक गया। आठ जून को स्थिर होने के बाद मानसून ने दोबारा 22 जून को गति पकड़ी। इस दौरान देश में काफी कम बारिश हुई। देश का मध्य व उत्तर हिस्सा अभी भी बारिश की कमी से जूझ रहा है।

भारतीय मौसम विभाग की माने तो जून में अभी तक 43 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जिससे खरीफ की फसलों की रोपाई और बिजाई प्रभावित हो रही है। मौसम विभाग ने इस साल कम बारिश होने और सूखा पड़ने की आशंका जाहिर की है। इस बीच, केंद्र सरकार ने स्थिति की समीक्षा की। सरकार ने देश भर के 315 संभावित रूप से प्रभावित जिलों में तैयारी, आपातकालीन उपायों और चल रही बुवाई की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ‘अल नीनो मॉनिटरिंग सेल’ और ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ बनाया है। इनमें 111 सबसे ज्यादा जोखिम वाले जिले शामिल हैं।

किसानों को घबराने की जरूरत नहीं : शिवराज

राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने वाले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से नहीं घबराने की अपील की, लेकिन बैठक में स्थिति की गंभीरता पर चर्चा हुई। इस दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि तैयारी और सामूहिक कार्रवाई की जरूरत है। अगर केंद्र और राज्य सरकारें, वैज्ञानिक संस्थान, जिÞला प्रशासन और किसान मिलकर तालमेल के साथ प्रयास करें, तो अल-नीनो की चुनौती को भी एक अवसर में बदला जा सकता है, जहां जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, तकनीकी सलाह और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं मिलकर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बन जाएंगी।

देश के 40 प्रतिशत जिले संकट में आए

देश के कुल जिलों में से लगभग 40% यानी 315 जिले ऐसे हैं जहां कम बारिश और सिंचाई की कमी का ज्यादा जोखिम है। इनमें से 111 जिलों की पहचान सबसे ज्यादा जोखिम वाले जिलों के तौर पर की गई है, जहां सिंचाई की सुविधा 25% से भी कम है। कार्रवाई के लिए इन उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों के अलावा, 76 जिले मध्यम प्राथमिकता वाले हैं, जहां सिंचाई की व्यवस्था 25-50% के दायरे में है। बाकी 128 जिले कम प्राथमिकता वाले हैं, जहां बांधों और अन्य बुनियादी ढांचे के जरिये तुलनात्मक रूप से बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध है।

इन 12 राज्यों में स्थिति ज्यादा खराब

संभावित रूप से उच्च जोखिम वाले बड़ी संख्या में जिले 12 राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में आते हैं। समीक्षा बैठक के दौरान इन राज्यों के कृषि मंत्रियों और जोखिम वाले जिलों के जिला कलेक्टरों से विस्तार से चर्चा की गई और उनसे स्थानीय स्तर पर तैयारियों में तेजी लाने का आग्रह किया गया।

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