Legally Speaking: दो हजार रुपए के करेंसी नोट को बदले जाने वाली अधिसूचना के खिलाफ याचिका, दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला किया सुरक्षित

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आशीष सिन्हा
आशीष सिन्हा

Aaj Samaj, (आज समाज),Legally Speaking,नई दिल्ली:

1*दो हजार रुपए के करेंसी नोट को बदले जाने वाली अधिसूचना के खिलाफ याचिका, दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला किया सुरक्षित*

दो हजार रुपए के करेंसी नोट को बदले जाने के लिए जारी किए गए नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने  दिल्ली हाई कोर्ट को बताया 2,000 रुपये के नोटों को चलन से हटाना एक वैधानिक प्रक्रिया है न कि नोटबंदी। रिजर्ब बैंक के वकील ने यह भी मांग की कि याचिकाकर्ता अपनी पिटीशन से भ्रम फैलाना चाहता है इसलिए इस याचिका को कॉस्ट लगाकर रद्द किया जाए। इस पर याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने कोर्ट से कहा कि वो पूरी अधिसूचना को चैलेंज नहीं कर रहे बल्कि अधिसूचना के एक हिस्से को चैलेंज किया है जिसमें  यह कहा गया है एक बार में 2,000 रुपये के 10 नोट बदलवाने पर किसी तरह की कोई आईडी नहीं दिखानी होगी। अधिसूचना में कहा गया है कि एक बार में 2000 के 10 नोट बदलवाए जा सकते हैं। अधिसूचना में कहीं नहीं लिखा है कि एक दिन में केवल एक बार शब्द इस्तेमाल नही किया गया है। इस तरह से तो अलगाववादियों जिहादियों मतांतरण मिशनरियों माओवादियों कालाबाजारियों हवाला कारोबारियों भूमाफियाओं खनन माफियाओं अपहरणकर्ताओं,घूसखोरों कमीशनखोरों जमाखोरों मिलावटखोरों मुनाफाखोरों सूदखोरों मानव तस्करों नशा तस्करों शराब तस्करों और सफेदपोश दलालों के लिए स्वर्णिम अवसर बन गया है।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है. आरबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता पराग पी त्रिपाठी ने कहा कि यह एक वैधानिक अभ्यास है और नोटबंदी नहीं है। नोट बदली पर दोनों ओर से हुई बहस के बाद हाईकोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

बैंकों में 2,000 रुपये की अदला-बदली आज, 23 मई से शुरू हो गई है। एसबीआई ने कहा है कि एक बार में 20,000 रुपये तक जमा करने के लिए किसी आईडी या मांग पर्ची की जरूरत नहीं है।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि जिस उद्देश्य के लिए 2,000 रुपये के नोट शुरू किए गए थे, वह पूरा हो गया है और प्रचलन में अन्य नोट भी पर्याप्त हैं। “2,000 रुपये के नोट कानूनी निविदा के रूप में जारी हैं और 30 सितंबर की समय सीमा निर्धारित की गई है ताकि लोग प्रक्रिया को गंभीरता से ले सकें।”

उन्होंने यह भी कहा कि 2,000 रुपये के नोटों ने अपनी आयु पूरी कर ली है, और उनकी निकासी मुद्रा प्रबंधन ऑपरेशन का हिस्सा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि 2,000 रुपये के नोट मुख्य रूप से 2016 में विमुद्रीकरण के बाद वापस लिए गए नोटों की भरपाई के लिए पेश किए गए थे।

अर्थव्यवस्था पर वापसी का प्रभाव “बहुत मामूली” होगा, उन्होंने कहा, प्रचलन में कुल मुद्रा का सिर्फ 10.8 प्रतिशत के लिए बने 2,000 रुपये के नोटों को जोड़ना। “प्रणाली में तरलता की निगरानी दैनिक आधार पर की जा रही है।

2*दिल्ली शराब घोटालाः राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की जुडीशियल कस्टडी 1 जून तक बढ़ाई*

दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आबकारी नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 1 जून तक बढ़ा दी है। मनीष सिसोदिया ने अपने जेल में अपने बैरक में कुर्सी-टेबल की मांग की है। सिसोदिया के इस आग्रह पर कोर्ट ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अध्ययन के उद्देश्य से कुर्सी और टेबल प्रदान करने के उनके अनुरोध पर विचार करें।

सीबीआई ने आबकारी नीति घोटाला मामले में सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। वह अभी न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने मनीष सिसोदिया और तीन अन्य के खिलाफ सीबीआई के पूरक आरोपपत्र पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। सिसोदिया के अलावा आरोपपत्र में अर्जुन पांडे, बुची बाबू गोरंटला और अमनदीप ढाल के भी नाम हैं। विशेष न्यायाधीश एमक. नागपाल ने इसे 27 मई को आदेश सुनाने के लिए सूचीबद्ध किया है।

सीबीआई ने अपने पूरक आरोपपत्र में आरोप लगाया है कि सिसोदिया ने शराब नीति के संबंध में टिप्पणी-सुझाव मांगने की प्रक्रिया में हेरफेर करने के लिए दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) के अध्यक्ष जाकिर खान के माध्यम से अपने हिसाब से कुछ ईमेल मंगवाए थे। चार्ज शीट में इस बात का भी जिक्र है कि मनीष सिसोदिया ने शराब नीति घोटाले में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन को नष्ट करने की बात कबूल की है।

जांच एजेंसी ने दावा किया है कि सिसोदिया पूर्व आबकारी आयुक्त रवि धवन द्वारा 13 अक्टूबर 2020 को सौंपी गई विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों से खुश नहीं थे और उन्होंने नए आबकारी आयुक्त राहुल सिंह को आम जनता और हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित करने के लिए आबकारी विभाग के पोर्टल पर रिपोर्ट डालने का निर्देश दिया। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि सिसोदिया ने आबकारी विभाग द्वारा तैयार कैबिनेट नोट के मसौदे को नष्ट कर दिया जिसे 28 जनवरी 2021 को हुई बैठक में मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा गया था।
सीबीआई और ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नष्ट किए गए मोबाइल फोनों में ऐसा क्या राज छुपा था जिसके चलते सिसोदिया ने उन्हें नष्ट कर दिया।

3* ज्ञानवापी विवाद से जुड़े सभी सात मुकदमों की सुनवाई एक साथ होगी, वाराणसी जिला अदालत का बड़ा आदेश

वाराणसी के ज्ञानवापी मामले से जुड़े सभी मामलों की अब एक साथ सुनवाई की जाएगी। वाराणसी जिला अदालत ने मंगलवार को इस मामले से संबंधित सभी मुकदमों को एक साथ क्लब करने का आदेश दिया है। जिला जज की अदालत ने चार महिलाओं की ओर से दी गई अर्जी स्वीकार करते हुए सुनवाई की अगली तिथि सात जुलाई तय की गई है। कोर्ट ने कहा श्रृंगार गौरी के मुख्य मामले पर पहले सबसे पहले सुनवाई शुरू करेगी।

दरसअल सम्पूर्ण ज्ञानवापी परिसर की भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे कराने संबंधी दी गई अर्जी पर अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में आपत्ति दाखिल की।

श्रृंगार गौरी मामले की चार याचिकाकर्ता -लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने जिला जज की अदालत में 16 मई को सर्वे कराने की मांग वाली अर्जी दाखिल की थी। उसके मुताबिक पिछले साल कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में ज्ञानवापी परिसर स्थित ढांचे के खम्भों पर संस्कृत के श्लोक, घंटियां, त्रिशूल व स्वास्तिक के चिह्न, शृंगार गौरी का विग्रह समेत हिंदू देवी-देवताओं व मंदिरों से जुड़े साक्ष्य सामने आए थे। याचीका में सम्पूर्ण परिसर का जीपीआर तकनीकी या कार्बन डेटिंग से सर्वे कराने की मांग की है।वही अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी को लिखित आपत्ति दर्ज कराने के लिए अदालत ने 19 मई तक समय दिया था। उस दिन मुस्लिम पक्ष ने और समय की मांग की जिस पर अदालत ने 22 मई की तिथि मुकर्रर की थी।

4*जैक्लीन फर्नांडीस को फिर मिली विदेश जाने की अनुमति, 25 से 27 अबुधाबी और फिर 12 जून तक मिलान में रहेंगी*

पटियाला हाउस कोर्ट ने बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस को 25 मई से 27 मई तक आईफा फंक्शन में शामिल होने तथा इटली के मिलान में फिल्म की शूटिंग के लिए के लिए 28 मई से 12 जून तक की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि भारत से बाहर रहने के दौरान जैक्लीन को अपना ए़डरेस और फोन नंबर जांच एजेंसी के साथ शेयर करना होगा। सही समय पर भारत वापस आकर जांच एजेंसी को अवगत कराना होगा।

महाठग सुकेश चंद्र से जुड़े 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस आरोपी हैं।

जैकलीन फर्नांडिस का नाम कॉनमैन सुकेश चंद्रशेखर के साथ जुड़ने के बाद वे चर्चा में आ गई थीं। दोनों की पर्सनल तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। इसके बाद जबरनवसूली और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुकेश चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उस पर आरोप है कि उसने रसूखदार लोगों सहित कई लोगों के साथ ठगी की है। इसमें कई बड़े-बड़े सेलेब्स और अमीरजादों का नाम शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 17 अगस्त को दायर किए आरोप पत्र में सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े मामले में जैकलीन फर्नांडिस को भी आरोपी बनाया था। इस मामले में जैकलीन से ईडी ने कई बार पूछताछ की थी। केस से नोरा फतेही का नाम भी जुड़ा है।

ईडी के मुताबिक बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीस और नोरा फतेही पर आरोप है कि उन्होंने सुकेश चंद्रशेखर से महंगी कारें और दूसरे कई बेशकीमती तोहफे लिए थे। जैकलीन ने कहा था कि उसे इस मामले में फंसाया गया है। नोरा ने सुकेश से गिफ्ट्स लिए थे। इसके बाद नोरा फतेही ने जैकलीन के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया। नोरा ने जैकलीन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने फायदे के लिए उनके करियर को बर्बाद करने की कोशिश की है। नोरा ने ये भी दावा किया था कि वे सुकेश चंद्रशेखर को जानती ही नहीं हैं।

जैकलीन के वकील प्रशांत ने नोरा के सभी आरोपों को खारिज किया था और कहा था कि जैकलीन ने कभी भी सार्वजनिक तौर पर नोरा के खिलाफ कुछ नहीं कहा ऐसे में मानहानि का मुकदमा बनता ही नहीं है।

बहरहाल, अब जैक्लीन फर्नांडीज पहले आइफा अवॉर्ड फंक्शन में शामिल होगी फिर इटली के मिलान में संभवतः क्रैक या फतह फिल्म की शूटिंग में शामिल होंगी।

5 *’सेक्स वर्क’ अपराध नहीं, सेशन कोर्ट ने महिला को सुधारगृह से मुक्त कर घर वापस भेजने का दिया आदेश*

सेक्स वर्कर से जुड़े एक मामले में मुंबई सत्र न्यायालय ने एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि सेक्स वर्क कोई अपराध नहीं है लेकिन अगर इसे सार्वजानिक जगहों पर किया जाये, जिससे अन्य लोगों को तकलीफ हो या उन्हें गलत लगे तो यह एक अपराध की श्रेणी में आएगा। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने एक 34 साल की महिला को नजरबंदी से रिहा करने का आदेश दिया है। दरअसल इसी साल फरवरी के महीने में मुंबई के मुलुंड इलाके में एक पुलिस रेड के दौरान एक महिला को वेश्यावृत्ति के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। महिला को तब स्थानीय मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया था। अदालत ने महिला को एक साल के लिए मुंबई स्थित देवनार के सुधारगृह भेजने का आदेश दिया गया था। अदालत ने कहा था कि महिला को एक साल तक सुधारगृह में रखा जाए। ताकि उसकी उचित देखभाल की जा सके। मजिस्ट्रेट कोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ महिला ने मुंबई सत्र न्यायालय में गुहार लगाई थी।

सत्र न्यायालय ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि आर्टिकल 19 के तहत एक नागरिक का अधिकार है कि वह देश के किसी भी कोने में स्वच्छंद रूप से घूम फिर सके और कहीं भी रह सके। इस मामले में अदालत ने कहा कि महिला वयस्क हैं और भारत की नागरिक हैं। ऐसे में यह उनका अधिकार है कि वह कहीं भी रह सके और कहीं भी आजा सकें। उन्हें ऐसा करने से रोकना आर्टिकल 19 द्वारा दिए गए अधिकारों का हनन होगा। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस की रिपोर्ट से यह नहीं लगता है कि महिला पब्लिक प्लेस पर वेश्यावृत्ति में लिप्त थी। यह महिला का अधिकार है कि वह कहीं भी रहें और कहीं भी आजा सकें।

अदालत ने कहा कि महिला को उसके काम और पुराने जीवन के आधार पर बिना उसकी इच्छा के विपरीत नजरबंद रखना ठीक नहीं हैं। पीड़िता के दो बच्चे हैं जिन्हें उनकी मां की जरुरत है। जज ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का भी हवाला दिया है। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट रूप से राज्य सरकारों को यह आदेश दिया कि वह एक सर्वे करें साथ ही इच्छा के विपरीत सुधारगृह में रखी गयी सेक्स वर्कर (जो वयस्क हों) रिहा करें। आजादी के साथ रहना उनका भी मौलिक अधिकार है, जिसका किसी भी तरह से हनन नहीं किया जा सकता है।

पीड़िता ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी सहित तीन पीड़ितों (जिसमें से एक मैं भी थी) को मझगांव कोर्ट में पेश किया किया गया। इसके बाद हमारी उम्र की जाँच के लिए ले जाया गया। इसी बीच हमारी कस्टडी बढ़ा दी गई। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी जिसमें सभी पीड़ित महिलाओं को बालिग बताया गया। हालांकि, दो महिलाओं को छोड़ दिया गया जबकि मुझे बीते एक साल के लिए देवनार के शेल्टर होम भेज दिया गया।

6*बिना गाउन के हाईकोर्ट में बहस करेंगे वकील, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख उच्च न्यायालय में दिखेगा अलग नजारा*

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख हाईकोर्ट की जम्मू खंडपीठ में वकील अगले चार माह तक बिना गाउन में दिखेंगे। भीषण गर्मी के चलते उन्हें सितंबर के आखिर तक गाउन नहीं पहनने की छूट दे दी गई है। यह पहली बार है जब वकील बिना गाउन के सुनवाई में मौजूद रहेंगे।

वकीलों की इस परेशानी को समझते हुए जम्मू कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल शाहजाद अजीम ने राहत भरा आदेश जारी किया है। इसके तहत हाईकोर्ट की जम्मू खंडपीठ में वकील अब बिना गाउन के सुनवाई में आ सकते हैं। जम्मू में गर्मी बेचैन करने लगी है। दिन का पारा 42 डिग्री सेल्सियस पर है। ऐसे में वकीलों को गाउन पहनकर हाईकोर्ट में पेश होना मुश्किल लगने लगा था।

यह मुद्दा जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों की ओर से उठाया गया था। इसके बाद एसोसिएशन ने औपचारिक रूप से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एन. कोटिश्वर को पत्र लिखा और वकीलों को गर्मी के दिनों में गाउन पहनने से छूट देने की मांग रखी। इस मांग पर गौर किया गया। इसके बाद जस्टिस कोटिश्वर ने निर्देश जारी किए।

इसके बाद रजिस्ट्रार जनरल ने गाउन पहनने से छूट का आदेश जारी कर दिया। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट की ओर से पहली बार ऐसा आदेश जारी किया गया है जिसमें हाईकोर्ट की जम्मू विंग में सुनवाई के दौरान वकीलों को गाउन पहनने में छूट दी गई है।

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