Homeकाम की बातजानें कैसे हुई मजदूर दिवस की शुरूआत Know How Labor Day Started

जानें कैसे हुई मजदूर दिवस की शुरूआत Know How Labor Day Started

पूरे विश्व में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या मजदूर दिवस (International Labour Day या Labour Day ) के रूप में मनाया जाता हैं, किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योगों में मज़दूर का अहम योगदान होता हैं।

जानें कैसे हुई मजदूर दिवस की शुरूआत Know How Labor Day Started

आज समाज डिजिटल, अम्बाला : 
Know How Labor Day Started :भारत में सबसे पहले 1 मई 1923 को ‘मद्रास दिवस‘ के रूप मनाया गया। इस की शुरूआत भारतीय मज़दूर किसान पार्टी नेता कामरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने शुरू की थी। भारत में मद्रास के हाईकोर्ट के सामने प्रदर्शन किया और यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी कामगार दिवस या मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाये और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाये।

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Know How Labor Day Started

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Know How Labor Day Started : पूरे विश्व में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या मजदूर दिवस (International Labour Day या Labour Day ) के रूप में मनाया जाता हैं, किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योगों में मज़दूर का अहम योगदान होता हैं। मज़दूर के बिना कोई भी औद्योगिक कारोबार या अन्य कई तरह के कार्य की हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। समाज और देश की प्रगति में मजदूरों का अहम योगदान होता हैं।

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श्रम दिवस को इन नामो से भी पुकारा जाता हैं –

मजदूर दिवस ( Labour Day ) पर बेहतरीन कोट्स :-

  • अगर आप अपने पूरे जीवन में खुश और सुखी रहना चाहते हैं तो श्रम करते रहें।
  • कर्म ही पूजा हैं ( Work is workship )।
  • जीवन में सफ़ल होने के लिए इतनी मेहनत या परिश्रम करों कि अगर ईश्वर ने तुम्हारी क़िस्मत में सफ़ल होना न लिखा हो तो उन्हें फिरसे तुम्हारी किस्मत लिखने के लिए मजबूर होना पड़े।
  • किसी देश का विकास उस देश के कामगारों और किसानों पर निर्भर करता हैं।
  • कठोर परिश्रम का कोई दूसरा विकल्प नही होता हैं।
  • मेहनत करने वालों को कभी निराश नही होना चाहिए क्योकि सभी चीजें मेहनत, परिश्रम और श्रम से ही प्राप्त होती हैं।
    परिश्रम करने से सुख के प्राप्ति होती हैं, खुश रहना हैं तो परिश्रम जरूर करें।
  • जो सच्चे मन से परिश्रम करता हैं और जिसका कर्म दूसरों को सुख पहुंचाता हैं, वही ईश्वर का सबसे प्रिय भक्त हैं।
    श्रम करने से स्वास्थ में उन्नति और सुख, समृद्धि बढ़ती हैं।
  • यदि धन के लिए परिश्रम करने की आवश्यकता नहीं हैं तो भी स्वास्थ्य के लिए परिश्रम जरूर करना चाहिए।
    परिश्रम वह चाभी हैं जो किस्मत का दरवाजा खोल देती हैं।
  • श्रम न करने से मनुष्य अपने मूल्यवान जीवन को अर्थ हीन बना देता हैं।
  • श्रम करने वाले तन और मन दोनों से अमीर होते है।
  • आपकी कड़ी मेहनत बेकार नही जाती।
  • परिश्रम ही सौभाग्य की जननी हैं ( Diligence is the mother of good luck ).
    काम करने से पहले सोचना बुद्धिमानी, काम करते हुए सोचना सतर्कता और काम करने के बाद सोचना मूर्खता हैं।

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