India-Netherlands Trade : भारत और नीदरलैंड मजबूत करेंगे आपसी व्यापारिक रिश्ते

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India-Netherlands Trade : भारत और नीदरलैंड मजबूत करेंगे आपसी व्यापारिक रिश्ते
India-Netherlands Trade : भारत और नीदरलैंड मजबूत करेंगे आपसी व्यापारिक रिश्ते

पीएम नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड प्रधानमंत्री रॉब जेटन से की फोन पर बातचीत

India-Netherlands Trade (आज समाज), नई दिल्ली : भारत और नीदरलैंड निकट भविष्य में आपसी व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने के लिए तैयार हैं। जल्द ही दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल एक दूसरे देशों का दौरा करेंगे और कई क्षेत्रों में मिलकर व्यापार करने और आपसी सहयोग मजबूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे। इसी के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन से फोन पर बातचीत की।

टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि आज नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन से बात करके मुझे खुशी हुई। हमने भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर, मेगा वाटर प्रोजेक्ट्स, ग्रीन हाइड्रोजन और टैलेंट मोबिलिटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और क्षेत्र में शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया।

पश्चिम एशिया हालात पर भी की चर्चा

इस दौरान पश्चिम एशिया की हालात पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इस बातचीत में क्षेत्र में शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया गया। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने कई विश्व नेताओं से बात की है। इनमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, ईरान, फ्रांस, इस्राइल और मलयेशिया के नेता शामिल हैं।

ईरान की नौसेना और मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट कर रहे : अमेरिका

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बताया कि अमेरिका ने ईरान की नौसेना और रक्षा उद्योग को महत्वपूर्ण नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को हमेशा के लिए खाड़ी पर कब्जा करने की अनुमति नहीं देंगे और अमेरिका अपने उद्देश्यों को कुछ ही हफ्तों में हासिल कर लेगा। रूबियो ने कहा कि हम ईरान की नौसेना और मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट कर रहे हैं और उनके रक्षा उद्योग को भी कमजोर कर रहे हैं, ताकि वे भविष्य में नए मिसाइल या ड्रोन न बना सकें।