Business News Update : अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण होगा वर्तमान वित्त वर्ष

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Business News Update : अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण होगा वर्तमान वित्त वर्ष
Business News Update : अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण होगा वर्तमान वित्त वर्ष

भारत में बढ़ सकता है महंगाई आधारित मंदी का जोखिम

Business News Update (आज समाज), बिजनेस डेस्क : पिछले दिनों आरबीआई की मौद्रिक नीति की बैठक के बाद जहां गुरुवार को रिजर्व बैंक आफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने महंगाई को काबू करने की सरकार से अपील की थी। मल्होत्रा ने कहा था कि यदि सरकार ने इसपर जल्द काबू न पाया तो देश की अर्थव्यवस्था को इसके विपरीत परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। वहीं अब एक वित्तीय सेवा फर्म जिसका नाम नुवामा है ने भी ऐसा ही अनुमान जाहिर किया है।

अपनी रिपोर्ट में इस फर्म ने कहा है कि भू-राजनीतिक तनाव और ईरान संकट से तेल आपूर्ति में संभावित बाधा भारत के लिए महंगाई आधारित मंदी का जोखिम बढ़ा सकती है। सकल घरेलू उत्पाद विश्लेषण रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है। यह तब हुआ है जब देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026 को उम्मीद से बेहतर वृद्धि के साथ समाप्त किया।

फर्म ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा

वित्तीय सेवा फर्म ने आगाह किया कि वित्त वर्ष 2027 अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मार्च तिमाही में स्वस्थ आर्थिक गतिविधि के बावजूद यह आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से इनपुट लागत ऊंची रह सकती है। इससे परिवारों की वास्तविक आय पर भी असर पड़ेगा। अर्थव्यवस्था पहले से ही मुद्रास्फीति के दौर में है। एक लंबा आपूर्ति झटका, खासकर कमजोर मानसून के साथ, मुद्रास्फीतिजनित मंदी का जोखिम बढ़ाता है।

महंगाई आधारित मंदी वह स्थिति है जब आर्थिक वृद्धि धीमी होती है और महंगाई ऊंची बनी रहती है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 7.8 फीसदी रही थी। पूरे वित्त वर्ष की वृद्धि वित्त वर्ष 2025 के 7.1 फीसदी से बढ़कर 7.7 फीसदी हो गई थी।

राहत की बात भी बताई

रिपोर्ट में कुछ घरेलू कारकों का भी उल्लेख किया गया है जो नकारात्मक जोखिमों को सीमित कर सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक का कुशल तरलता प्रबंधन इसमें सहायक होगा। रुपये का अपेक्षाकृत कम मूल्यांकन और स्वस्थ ऋण वृद्धि भी गिरावट को कम करने में मदद कर सकती है। वित्त वर्ष 2026 में निवेश में तेजी आई थी, जो मार्च तिमाही में 10.8 फीसदी तक पहुंच गया।