Business News Hindi : आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे जर्मनी पर टैरिफ की मार

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Business News Hindi : आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे जर्मनी पर टैरिफ की मार
Business News Hindi : आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे जर्मनी पर टैरिफ की मार

इकॉनोमी में गिरावट का दौर जारी, गंभीर हो सकते हैं परिणाम

Business News Hindi  (आज समाज), बिजनेस डेस्क : अमेरिकी राष्टÑपति की नई टैरिफ नीति कई देशों के लिए बहुत ही हानिकारक साबित हो रही है। इसने न केवल एशिया बल्कि यूरोप और अफ्रीका तक अपने नकारात्मक परिणाम सामने लाए हैं। जिन अर्थव्यवस्थाओं पर अमेरिका की नई टैरिफ नीति का सीधा असर हुआ है। उनमें युरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी भी है।

ज्ञात रहे कि पिछले कुछ समय से जर्मनी की अर्थव्यवस्था कुछ आंतरिक मामलों से जूझ रही है। जिसके चलते उसमें गिरावट दर्ज की जा रही थी लेकिन अब तीसरे साल अमेरिका द्वारा लागू की गई टैरिफ दरों से इसपर दोहरी मार पड़ी है। इसी के चलते जर्मनी की इकॉनोमी में दूसरी तिमाही में गिरावट आई है। यूरोप की सबसे बड़ी इकॉनोमी पहली तिमाही की तुलना में अप्रैल-जून तिमाही में 0.3% गिर गई।

जी-7 में शामिल देशों में एकमात्र जिसकी अर्थव्यवस्था गिर रही

जर्मनी जी-7 देशों में एकमात्र देश है जिसकी इकॉनमी में लगातार दो साल गिरावट आई है और वह तीसरे साल भी गिरावट की ओर बढ़ रही है। अगर ऐसा होता है तो भारत की दुनिया की तीसरी इकॉनमी बनने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

2028 तक जर्मन को पिछाड़ देगा भारत

एक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत वर्ष 2028 तक जर्मनी को पछाड़ते हुए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। जर्मनी की इकॉनमी जहां सिकुड़ रही है, वहीं भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही इकॉनमी बना हुआ है। आईएमएफ के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर 2026 और 2027 में भारतीय इकॉनमी के 6.4% की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है। फोर्ब्स के मुताबिक भारत की जीडीपी 4.19 ट्रिलियन डॉलर है जबकि जर्मनी 4.74 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे नंबर पर है। अमेरिका ($30.51 ट्रिलियन) पहले और चीन ($19.23 ट्रिलियन) दूसरे नंबर पर है।

इसलिए अमेरिकी टैरिफ का ज्यादा असर हुआ

अमेरिका जर्मनी का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। 2024 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $293 अरब रहा। इस दौरान जर्मनी का ट्रेड सरप्लस $72 अरब रहा। लेकिन अप्रैल में ट्रंप ने अमेरिका को होने वाले आयात पर 10% टैरिफ लगा दिया। इससे जर्मनी की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि उसकी इकॉनमी काफी हद तक एक्सपोर्ट पर निर्भर है। यूरोपियन यूनियन अमेरिका से आने वाले इंडस्ट्रियल गुड्स पर सारे टैरिफ खत्म करने का प्रस्ताव दिया है।

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