Bijnor Land Case News: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के दिवंगत पिता महेंद्रनाथ की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। नजीबाबाद थाना क्षेत्र के अमीखानपुर गांव में करीब 26 बीघा कृषि भूमि पर दावा करने के लिए फर्जी वसीयत और मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार किए जाने का आरोप है। कमलनाथ की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और मामले में धर्मपाल सिंह और विजय शंकर पांडेय को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के मुताबिक कमलनाथ ने 30 सितंबर को नजीबाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। बिजनौर के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के अनुसार शिकायत के अनुसार कमलनाथ के पिता महेंद्रनाथ की अमीखानपुर में स्थित जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मालिकाना हक जताने की कोशिश की गई। अमीखानपुर में महेंद्रनाथ के नाम करीब 90 बीघा कृषि भूमि है। यह जमीन लंबे समय से बटाई पर दी गई थी। इसमें से करीब 26 बीघा भूमि को लेकर विवाद सामने आया। संबंधित जमीन का उल्लेख गाटा संख्या 429 और करीब 2.1560 हेक्टेयर के रूप में किया गया है।
मामला तब सामने आया, जब कमलनाथ ने 18 मई 2026 को नजीबाबाद तहसीलदार की अदालत में उत्तराधिकार के आधार पर जमीन अपने नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया। इसी प्रक्रिया में लेखपाल की रिपोर्ट के जरिए जमीन के एक हिस्से के विवादित होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद वसीयत और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। पुलिस के अनुसार आरोपी पक्ष की ओर से महेंद्रनाथ के नाम की एक कूटरचित वसीयत पेश की गई। यह वसीयत पंजीकृत नहीं थी और इसके आधार पर जमीन पर दावा किए जाने की बात सामने आई है।
मामले में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया जा रहा है। कमलनाथ की शिकायत के अनुसार उनके पिता महेंद्रनाथ का निधन 7 सितंबर 2004 को दिल्ली में हुआ था। वहीं मृत्यु प्रमाणपत्र में उनकी मृत्यु की तारीख 10 अप्रैल 2003 दर्ज बताई गई है। पुलिस अब इस दस्तावेज को तैयार करने और इस्तेमाल करने से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। कमलनाथ की शिकायत के आधार पर पुलिस ने धर्मपाल सिंह, जसबिंदर सिंह ढिल्लो, विजय शंकर पांडेय और हल्का लेखपाल डेविड कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर साजिश, धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल से जमीन पर दावा करने के आरोप हैं।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धर्मपाल सिंह, निवासी महावतपुर बिल्लौच और विजय शंकर पांडेय, मूल रूप से देवरिया के निवासी और वर्तमान में नजीबाबाद में रहने वाले को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक फर्जी वसीयत और मृत्यु प्रमाणपत्र का इस्तेमाल जमीन पर दावा मजबूत करने के लिए राजस्व/तहसील स्तर की कानूनी प्रक्रिया में किया गया। इस वजह से जांच में यह भी देखा जा रहा है कि दस्तावेज किसने तैयार किए, उन्हें किस तरह बनाया गया और राजस्व रिकॉर्ड में उनका इस्तेमाल कैसे किया गया।


