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शिक्षक दिवस पर डॉ. अरूणा अंचल को किया उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से सम्मानित

आज समाज डिजिटल, रोहतक :

  • समाज की आधारशिला हैं शिक्षक : डॉ. अरूणा अंचल

‘‘गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरू आपने गोविन्द दियो बताय।’’ शिक्षक दिवस के अवसर पर बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की अधिष्ठाता व अध्यक्षा डॉ. अरूणा अंचल ‘गुरु फाउंडेशन’ रोहतक तथा ‘नमस्ते इंडिया काउंसिल ऑफ एडुकेटरस’ महारास्ट्र द्वारा उनके शिक्षा के क्षत्र मे किये गए कार्यों तथा सामाजिक स्तर पर किये गए कार्यों के लिए उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान व एडुकेटर ऑफ द ईयर सम्मान से नवाजा गया! यह समारोह वर्चुअल मोड पर आयोजित किया गया।

डॉ. अरुणा अंचल ने कहा कि गुरू और गोबिंद (भगवान) एक साथ खड़े हों तो किसे प्रणाम करना चाहिए – गुरू को अथवा गोबिन्द को ? ऐसी स्थिति में गुरू के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है। जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भारत में प्राचीन समय से ही गुरू व शिक्षक परंपरा चली आ रही है। गुरूओं की महिमा का वृत्तांत ग्रंथों में भी मिलता है। जीवन में माता-पिता का स्थान कोई भी नहीं ले सकता क्योंकि वही हमें इस रंगीन खूबसूरत दुनिया में लाते हैं। लेकिन जिस समाज में रहना है उसके योग्य केवल हमें शिक्षक ही बनाते हैं। जीने का असली सलीका शिक्षक ही सिखाता है। समाज के शिल्पकार कहे जाने वाले शिक्षकों का महत्व यहीं समाप्त नहीं होता क्योंकि वह ना सिर्फ विद्यार्थियों को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं बल्कि उसके सफल जीवन की नींव भी उन्हीं के हाथों द्वारा रखी जाती है। शिक्षक को माली के समान माना जाता है जो एक बगीचे को भिन्न-भिन्न रूप-रंग के फूलों से सजाता है। इस सम्मान के लिए उन्होंने अपने परिवार, गुरुजनों का आभार वयक्त किया।

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