Homeराशिफलवृष राशिफल 30 सितंबर 2022

वृष राशिफल 30 सितंबर 2022

***|| जय श्री राधे ||***
🌺🙏 महर्षि पाराशर पंचांग 🙏🌺
🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏
****ll जय श्री राधे ll****
🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺

दिनाँक:- 30/09/2022, शुक्रवार
पंचमी, शुक्ल पक्ष,
आश्विन
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

वृष

पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है। स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। नए विचार दिमाग में आएंगे। भाग्य का साथ मिलेगा। धनार्जन होगा।

तिथि———– पंचमी 22:34:12 तक
पक्ष————————- शुक्ल
नक्षत्र——— अनुराधा 28:17:40
योग————– प्रीति 22:31:05
करण————– बव 11:23:06
करण———– बालव 22:34:12
वार———————– शुक्रवार
माह———————– आश्विन
चन्द्र राशि—————– वृश्चिक
सूर्य राशि——————- कन्या
रितु————————- शरद
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर—————— शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————- नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————– 2078
शक संवत—————– 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 06:12:24
सूर्यास्त—————- 18:05:35
दिन काल————- 11:53:10
रात्री काल————- 12:07:18
चंद्रोदय—————- 10:23:29
चंद्रास्त—————- 21:07:16

लग्न—- कन्या 12°41′ , 162°41′

सूर्य नक्षत्र——————– हस्त
चन्द्र नक्षत्र—————- अनुराधा
नक्षत्र पाया——————- रजत

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

ना—- अनुराधा 10:59:41

नी—- अनुराधा 16:46:33

नू—- अनुराधा 22:32:32

ने—-अनुराधा 28:17:40

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=कन्या 12 :49 हस्त , 1 पू
चन्द्र =वृश्चिक 03 °23, अनुराधा , 1 ती
बुध =कन्या 00 ° 34′ उ o फाo ‘2 टो
शुक्र=कन्या 06°05, उ o फ़ा o ‘ 4 पी
मंगल=वृषभ 25°30 ‘ मृगशिरा’ 1 वे
गुरु=मीन 09°30 ‘ उ o भा o, 2 थ
शनि=मकर 24°43 ‘ धनिष्ठा ‘ 1 गा
राहू=(व) मेष 21°00’ भरणी , 3 ले
केतु=(व) तुला 21°00 विशाखा , 1 ती

राहू काल 10:40 – 12:09 अशुभ
यम घंटा 15:07 – 16:36 अशुभ
गुली काल 07:42 – 09:11 अशुभ
अभिजित 11:45 – 12:33 शुभ
दूर मुहूर्त 08:35 – 09:23 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:33 – 13:20 अशुभ
वर्ज्यम 09:04 – 10:37 अशुभ

🚩गंड मूल 28:18* – अहोरात्र अशुभ

💮चोघडिया, दिन
चर 06:12 – 07:42 शुभ
लाभ 07:42 – 09:11 शुभ
अमृत 09:11 – 10:40 शुभ
काल 10:40 – 12:09 अशुभ
शुभ 12:09 – 13:38 शुभ
रोग 13:38 – 15:07 अशुभ
उद्वेग 15:07 – 16:36 अशुभ
चर 16:36 – 18:06 शुभ

🚩चोघडिया, रात
रोग 18:06 – 19:37 अशुभ
काल 19:37 – 21:07 अशुभ
लाभ 21:07 – 22:38 शुभ
उद्वेग 22:38 – 24:09* अशुभ
शुभ 24:09* – 25:40* शुभ
अमृत 25:40* – 27:11* शुभ
चर 27:11* – 28:42* शुभ
रोग 28:42* – 30:13* अशुभ

💮होरा, दिन
शुक्र 06:12 – 07:12
बुध 07:12 – 08:11
चन्द्र 08:11 – 09:11
शनि 09:11 – 10:10
बृहस्पति 10:10 – 11:10
मंगल 11:10 – 12:09
सूर्य 12:09 – 13:08
शुक्र 13:08 – 14:08
बुध 14:08 – 15:07
चन्द्र 15:07 – 16:07
शनि 16:07 – 17:06
बृहस्पति 17:06 – 18:06

🚩होरा, रात
मंगल 18:06 – 19:06
सूर्य 19:06 – 20:07
शुक्र 20:07 – 21:07
बुध 21:07 – 22:08
चन्द्र 22:08 – 23:09
शनि 23:09 – 24:09
बृहस्पति 24:09* – 25:10
मंगल 25:10* – 26:10
सूर्य 26:10* – 27:11
शुक्र 27:11* – 28:12
बुध 28:12* – 29:12
चन्द्र 29:12* – 30:13

🚩💮 उदयलग्न प्रवेशकाल 💮🚩

कन्या > 04:36 से 06:26 तक
तुला > 06:26 से 08:40 तक
वृश्चिक > 08:40 से 10:56 तक
धनु > 10:56 से 13:22 तक
मकर > 13:22 से 15:04 तक
कुम्भ > 15:04 से 16:32 तक
मीन > 16:32 से 17:06 तक
मेष > 17:06 से 18:40 तक
वृषभ > 18:40 से 21:26 तक
कर्क > 21:26 से 01:56 तक
सिंह > 01:56 से 04:18 तक

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

5 + 6 + 1 = 12 ÷ 4 = 0 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

बुध ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

5 + 5 + 5 = 15 ÷ 7 = 1 शेष

कैलाश वास = शुभ कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

*नवरात्रि पंचम दिवस स्कंध माता पूजन

* सर्वार्थ सिद्धि योग 28:18 तक

*शुक्रास्त पूर्वे 14:25 पर

*ललिता पंचमी

*उपांगललिता व्रत

*नत पंचमी (उड़ीसा)

* अर्धवार्षिक लेखा बंदी

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

न विश्वसेत्कुमित्रे च मित्रे चापि न विश्वसेत् ।
कदाचित्कुपितं मित्रं सर्वगुह्यं प्रकाशयेत् ।।
।। चा o नी o।।

एक बुरे मित्र पर तो कभी विश्वास ना करे। एक अच्छे मित्र पर भी विश्वास ना करें। क्यूंकि यदि ऐसे लोग आपसे रुष्ट होते है तो आप के सभी राज से पर्दा खोल देंगे।

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविज्ञानयोग अo-13

य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह ।,
सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते ॥,

इस प्रकार पुरुष को और गुणों के सहित प्रकृति को जो मनुष्य तत्व से जानता है (दृश्यमात्र सम्पूर्ण जगत माया का कार्य होने से क्षणभंगुर, नाशवान, जड़ और अनित्य है तथा जीवात्मा नित्य, चेतन, निर्विकार और अविनाशी एवं शुद्ध, बोधस्वरूप, सच्चिदानन्दघन परमात्मा का ही सनातन अंश है, इस प्रकार समझकर सम्पूर्ण मायिक पदार्थों के संग का सर्वथा त्याग करके परम पुरुष परमात्मा में ही एकीभाव से नित्य स्थित रहने का नाम उनको ‘तत्व से जानना’ है) वह सब प्रकार से कर्तव्य कर्म करता हुआ भी फिर नहीं जन्मता॥,23॥,

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