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वृष राशिफल 22 मई 2022

***|| जय श्री राधे ||***

***  महर्षि पाराशर पंचांग *** 
***  अथ पंचांगम् *** 
****ll जय श्री राधे ll****
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दिनाँक:-22/05/2022, रविवार
सप्तमी, कृष्ण पक्ष
ज्येष्ठ
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

*** दैनिक राशिफल *** 

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

वृष

आज का दिन आपके सांसारिक सुख भोग के साधनों में वृद्धि लेकर आएगा। अध्यात्म में रुचि रहेगी। किसी धार्मिक आयोजन में भाग लेने का मौका हाथ आएगा। सुख-शांति बने रहेंगे। कारोबार मनोनुकूल चलेगा। मित्रों का सहयोग लाभ में वृद्धि करेगा। लंबित कार्य पूर्ण होंगे। निवेश शुभ रहेगा। प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। प्रमाद न करें। आपको सहायकों का भी भरपूर सुख मिलेगा। आपको संतान की संगति की ओर विशेष ध्यान देना होगा,नहीं तो किसी गलत संगति की ओर अग्रसर हो सकते हैं। परिवार के किसी सदस्य द्वारा कोई ऐसा काम किया जाएगा,जिससे आपके कुल का नाम रोशन होगा। यदि आज आप किसी से धन उधार लेंगे,तो वह भी आपको आसानी से मिल जाएगा। आप सायंकाल के समय देव दर्शन की यात्रा पर जा सकते हैं,जिसमें आप अपने माता पिता को लेकर जाएंगे तो बेहतर रहेगा।

 

तिथि———- सप्तमी 12:59:04 तक
पक्ष————————- कृष्ण
नक्षत्र———– धनिष्ठा 22:45:29
योग————– ऐन्द्र 26:57:26
करण————– बव 12:59:04
करण———– बालव 24:11:59
वार———————— रविवार
माह————————- ज्येष्ठ
चन्द्र राशि——- मकर 11:11:07
चन्द्र राशि——————–कुम्भ
सूर्य राशि—————— वृषभ
रितु————————– ग्रीष्म
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर———————– नल
संवत्सर (उत्तर) ——————-राक्षस
विक्रम संवत—————- 2079
विक्रम संवत (कर्तक)———- 2078
शाका संवत—————- 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:28:25
सूर्यास्त—————- 19:03:37
दिन काल————- 13:35:12
रात्री काल————- 10:24:23
चंद्रास्त—————- 11:33:57
चंद्रोदय—————- 25:15:36

लग्न—- वृषभ 6°44′ , 36°44′

सूर्य नक्षत्र—————– कृत्तिका
चन्द्र नक्षत्र—————— धनिष्ठा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

*** पद, चरण *** 

गी—- धनिष्ठा 11:11:07

गु—- धनिष्ठा 16:57:13

गे—- धनिष्ठा 22:45:29

गो—- शतभिष 28:35:58

*** ग्रह गोचर *** 

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
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सूर्य=वृषभ 06:12 कृतिका , 4 ए
चन्द्र =मकर 26°23 , धनिष्ठा, 2 गी
बुध =वृषभ 06 ° 07′ कृतिका ‘ 3 उ
शुक्र=मीन 28 °05, रेवती ‘ 4 ची
मंगल=कुम्भ 03°30 ‘ उoभाo’ 1 दू
गुरु=मीन 07°30 ‘ ऊ o भा o, 2 थ
शनि=कुम्भ 00°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 3 गु
राहू=(व) मेष 28°00’ कृतिका , 1 अ
केतु=(व) तुला 28°00 विशाखा , 3 ते

*** मुहूर्त प्रकरण *** 

राहू काल 17:22 – 19:04 अशुभ
यम घंटा 12:16 – 13:58 अशुभ
गुली काल 15:40 – 17:22 अशुभ
अभिजित 11:49 -12:43 शुभ
दूर मुहूर्त 17:15 – 18:09 अशुभ

पंचक 11:11 – अहोरात्र अशुभ

चोघडिया, दिन
उद्वेग 05:28 – 07:10 अशुभ
चर 07:10 – 08:52 शुभ
लाभ 08:52 – 10:34 शुभ
अमृत 10:34 – 12:16 शुभ
काल 12:16 – 13:58 अशुभ
शुभ 13:58 – 15:40 शुभ
रोग 15:40 – 17:22 अशुभ
उद्वेग 17:22 – 19:04 अशुभ

चोघडिया, रात
शुभ 19:04 – 20:22 शुभ
अमृत 20:22 – 21:40 शुभ
चर 21:40 – 22:58 शुभ
रोग 22:58 – 24:16* अशुभ
काल 24:16* – 25:34* अशुभ
लाभ 25:34* – 26:52* शुभ
उद्वेग 26:52* – 28:10* अशुभ
शुभ 28:10* – 29:28* शुभ

होरा, दिन
सूर्य 05:28 – 06:36
शुक्र 06:36 – 07:44
बुध 07:44 – 08:52
चन्द्र 08:52 – 10:00
शनि 10:00 – 11:08
बृहस्पति 11:08 – 12:16
मंगल 12:16 – 13:24
सूर्य 13:24 – 14:32
शुक्र 14:32 – 15:40
बुध 15:40 – 16:48
चन्द्र 16:48 – 17:56
शनि 17:56 – 19:04

होरा, रात
बृहस्पति 19:04 – 19:56
मंगल 19:56 – 20:48
सूर्य 20:48 – 21:40
शुक्र 21:40 – 22:32
बुध 22:32 – 23:24
चन्द्र 23:24 – 24:16
शनि 24:16* – 25:08
बृहस्पति 25:08* – 25:59
मंगल 25:59* – 26:52
सूर्य 26:52* – 27:44
शुक्र 27:44* – 28:36
बुध 28:36* – 29:28

***  उदयलग्न प्रवेशकाल *** 

वृषभ > 04:18 से 06:16 तक
मिथुन > 06:16 से 08:29 तक
कर्क > 08:29 से 10:46 तक
सिंह > 10:46 से 13:00 तक
कन्या > 13:00 से 15:10 तक
तुला > 15:10 से 17:25 तक
वृश्चिक > 17:25 से 19:46 तक
धनु > 19:46 से 21:46 तक
मकर > 21:46 से 23:32 तक
कुम्भ > 11:32 से 01:05 तक
मीन > 01:05 से 02:35 तक
मेष > 02:35 से 04:18 तक

विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा चिरौजी खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 7 + 1 + 1 = 24 ÷ 4 = 0 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

*** ग्रह मुख आहुति ज्ञान *** 

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

गुरु ग्रह मुखहुति

 शिव वास एवं फल -:

22 + 22 + 5 = 49 ÷ 7 = 0 शेष

शमशान वास = मृत्यु कारक

भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

*** विशेष जानकारी *** 

*कालाष्टमी

* पंचक प्रारम्भ 11:11 से

* राजाराम मोहनराय जयन्ती

*विश्व जैविक विविधता दिवस

*** शुभ विचार *** 

छिन्नोऽपि चंदनतरुर्न जहाति गन्धं
वृध्दोऽपि वारणपतिर्न जहाति लीलाम् ।
यंत्रार्पितो मधुरतां न जहाति चेक्षुः
क्षीणोऽपि न त्यजति शीलगुणान् कुलीनः ।।
।। चा o नी o।।

चन्दन कट जाने पर भी अपनी महक नहीं छोड़ते. हाथी बुढा होने पर भी अपनी लीला नहीं छोड़ता. गन्ना निचोड़े जाने पर भी अपनी मिठास नहीं छोड़ता. उसी प्रकार ऊँचे कुल में पैदा हुआ व्यक्ति अपने उन्नत गुणों को नहीं छोड़ता भले ही उसे कितनी भी गरीबी में क्यों ना बसर करना पड़े.

*** सुभाषितानि *** 

गीता -: दैवासुरसम्पद्विभागयोग अo-16

असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि।,
ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी॥,

वह शत्रु मेरे द्वारा मारा गया और उन दूसरे शत्रुओं को भी मैं मार डालूँगा।, मैं ईश्वर हूँ, ऐश्र्वर्य को भोगने वाला हूँ।, मै सब सिद्धियों से युक्त हूँ और बलवान्‌ तथा सुखी हूँ॥,14॥,

**** आपका दिन मंगलमय हो **** 
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आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

 

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