Homeराशिफलवृश्चिक राशिफल 12 अप्रैल 2022 Scorpio Horoscope 12 April 2022

वृश्चिक राशिफल 12 अप्रैल 2022 Scorpio Horoscope 12 April 2022

***|| जय श्री राधे ||***

***   महर्षि पाराशर पंचांग ***
***  अथ पंचांगम् ***
****ll जय श्री राधे ll****
***  ***  ***  ***  ***  ***  

दिनाँक:- 12/04/2022, मंगलवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
चैत्र
***  ***  ***  ***  ***  ***  ***  (समाप्ति काल)

***  दैनिक राशिफल *** 

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

वृश्चिक

Scorpio Horoscope 12 April 2022: आज का दिन आपके लिए कुछ विशेष कर दिखाने के लिए रहेगा और जिसके कारण आप अपने व्यवसाय के रुके हुए कार्य को पूरा करने मे समय व्यतीत करेंगे,लेकिन आपको किसी कानूनी कार्य में जीत मिलती दिख रही है। पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। जल्दबाजी न करें। आवश्यक वस्तुएं गुम हो सकती हैं। चिंता तथा तनाव रहेंगे। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। भेंट व उपहार देना पड़ सकता है। प्रयास सफल रहेंगे। कार्य की बाधा दूर होगी। निवेश शुभ रहेगा। व्यापार में वृद्धि तथा सम्मान में वृद्धि होगी। आपको किसी शादी पार्टी में सम्मिलित होते समय खान-पान व तेज मसालों से बने व्यंजनों को खाने पर नियंत्रण रखना होगा,नहीं तो आपको पेट से संबंधित समस्या हो सकती है। सायंकाल के समय किसी यात्रा पर जाने के योग बन रहे हैं,जो आपके लिए लाभदायक रहेगी। आपको परिवार में छोटे बच्चों की बातों को सुनना व समझना होगा,नहीं तो वह आपसे नाराज हो सकती हैं। जीवनसाथी को आप कहीं घुमाने फिराने लेकर जा सकते हैं।

तिथि——– एकादशी 29:01:30 तक
पक्ष———————— शुक्ल
नक्षत्र——– आश्लेषा 08:33:40
योग————– शूल 12:01:35
करण———– वणिज 16:51:07
करण——- विष्टि भद्र 29:01:30
वार———————- मंगलवार
माह————————— चैत्र
चन्द्र राशि——- कर्क 08:33:40
चन्द्र राशि——————– सिंह
सूर्य राशि——————— मीन
रितु————————- वसंत
आयन—————— उत्तरायण
संवत्स———————— नल
संवत्सर (उत्तर)—————– राक्षस
विक्रम संवत—————- 2079
विक्रम संवत (कर्तक)——— 2078
शाका संवत—————- 1944

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वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:59:18
सूर्यास्त—————- 18:41:03
दिन काल————- 12:41:44
रात्रीकाल—————11:17:13
चंद्रोदय—————- 14:24:48
चंद्रास्त—————- 27:59:09

लग्न—- मीन 27°56′ , 357°56′

सूर्य नक्षत्र—————— रेवती
चन्द्र नक्षत्र—————- आश्लेषा
नक्षत्र पाया——————- रजत

***  पद, चरण *** 

डो—- आश्लेषा 08:33:40

मा—- मघा 14:53:11

मी—- मघा 21:10:01

मू—- मघा 27:24:10

***  ग्रह गोचर *** 

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=मीन 27:12 रेवती , 4 ची
चन्द्र =कर्क 28°23, अश्लेषा, 4 डो
बुध =मेष 07 ° 07′ अश्विनी ‘ 3 चो
शुक्र=कुम्भ 12°05, शतभिषा ‘ 2 सा
मंगल=कुम्भ 03°30 ‘ धनिष्ठा’ 4 गे
गुरु=कुम्भ 29°30 ‘ पू o भा o, 3 दा
शनि=मकर 28°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व)वृषभ 00°05’ कृतिका , 2 ई
केतु=(व)वृश्चिक 00°05 विशाखा , 4 तो

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***  मुहूर्त प्रकरण *** 

राहू काल 15:31 – 17:06 अशुभ
यम घंटा 09:10 – 10:45 अशुभ
गुली काल 12:20 – 13:55 अशुभ
अभिजित 11:55 -12:46 शुभ
दूर मुहूर्त 08:32 – 09:22 अशुभ
दूर मुहूर्त 23:12 – 24:03* अशुभ

गंड मूल अहोरात्र अशुभ

चोघडिया, दिन
रोग 05:59 – 07:35 अशुभ
उद्वेग 07:35 – 09:10 अशुभ
चर 09:10 – 10:45 शुभ
लाभ 10:45 – 12:20 शुभ
अमृत 12:20 – 13:55 शुभ
काल 13:55 – 15:31 अशुभ
शुभ 15:31 – 17:06 शुभ
रोग 17:06 – 18:41 अशुभ

चोघडिया, रात
काल 18:41 – 20:06 अशुभ
लाभ 20:06 – 21:30 शुभ
उद्वेग 21:30 – 22:55 अशुभ
शुभ 22:55 – 24:20* शुभ
अमृत 24:20* – 25:44* शुभ
चर 25:44* – 27:09* शुभ
रोग 27:09* – 28:34* अशुभ
काल 28:34* – 29:58* अशुभ

होरा, दिन
मंगल 05:59 – 07:03
सूर्य 07:03 – 08:06
शुक्र 08:06 – 09:10
बुध 09:10 – 10:13
चन्द्र 10:13 – 11:17
शनि 11:17 – 12:20
बृहस्पति 12:20 – 13:24
मंगल 13:24 – 14:27
सूर्य 14:27 – 15:31
शुक्र 15:31 – 16:34
बुध 16:34 – 17:38
चन्द्र 17:38 – 18:41

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होरा, रात
शनि 18:41 – 19:37
बृहस्पति 19:37 – 20:34
मंगल 20:34 – 21:30
सूर्य 21:30 – 22:27
शुक्र 22:27 – 23:23
बुध 23:23 – 24:20
चन्द्र 24:20* – 25:16
शनि 25:16* – 26:13
बृहस्पति 26:13* – 27:09
मंगल 27:09* – 28:05
सूर्य 28:05* – 29:02
शुक्र 29:02* – 29:58

उदयलग्न प्रवेशकाल ??

मीन > 03:08 से 05:04 तक
मेष > 05:04 से 06:55 तक
वृषभ > 06:55 से 08:53 तक
मिथुन > 08:53 से 11:07 तक
कर्क > 11:07 से 13:23 तक
सिंह > 13:23 से 15:36 तक
कन्या > 15:36 से 07:47 तक
तुला > 07:47 से 08:02 तक
वृश्चिक > 08:02 से 10:19 तक
धनु > 10:19 से 00:24 तक
मकर > 00:24 से 02:10 तक
कुम्भ > 02:10 से 03:08 तक

विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

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नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान————-उत्तर
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा गुड़ खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

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अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

11 + 3 + 1 = 15 ÷ 4 = 3 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

ग्रह मुख आहुति ज्ञान

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

शनि ग्रह मुखहुति

शिव वास एवं फल -:

11 + 11 + 5 = 27 ÷ 7 = 6 शेष

क्रीड़ायां = शोक, दुःख कारक

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भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

सांय 16:51 से प्रातः 29:01 तक

मृत्यु लोक = सर्वकार्य विनाशिनी

विशेष जानकारी

* कामदा एकादशी व्रत (स्मार्त)

* फूलडोल एकादशी

* श्रीलक्ष्मीकांत दोलोत्सव

***  शुभ विचार *** 

यस्यार्स्थास्तस्य मित्राणि यस्यार्स्थास्तस्य बान्धवाः ।
यस्यार्थाः स पुमाल्लोके यस्यार्थाः सचजीवति ।।
।। चा o नी o।।

वह व्यक्ति जिसके पास धन है उसके पास मित्र और सम्बन्धी भी बहोत रहते है. वही इस दुनिया में टिक पाता है और उसीको इज्जत मिलती है.

***  सुभाषितानि *** 

गीता -: गुणत्रयविभागयोग अo-14

नान्यं गुणेभ्यः कर्तारं यदा द्रष्टानुपश्यति ।,
गुणेभ्यश्च परं वेत्ति मद्भावं सोऽधिगच्छति ॥,

जिस समय दृष्टा तीनों गुणों के अतिरिक्त अन्य किसी को कर्ता नहीं देखता और तीनों गुणों से अत्यन्त परे सच्चिदानन्दघनस्वरूप मुझ परमात्मा को तत्त्व से जानता है, उस समय वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है॥,19॥,

***  आपका दिन मंगलमय हो ***  
***  ***  ***  ***  ***  ***
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

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