Homeराशिफलमिथुन राशिफल 6 अक्टूबर 2022

मिथुन राशिफल 6 अक्टूबर 2022

***|| जय श्री राधे ||***
🌺🙏 महर्षि पाराशर पंचांग 🙏🌺
🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏
****ll जय श्री राधे ll****
🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺

दिनाँक:-06/10/2022, गुरुवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष,
आश्विन
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

मिथुन

आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। कोई बड़ा कार्य कर पाएंगे। व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। कार्य पूर्ण होंगे। प्रसन्नता रहेगी। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। जोखिम न लें। भाइयों का सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि होगी।

तिथि——– एकादशी 09:40:00 तक
पक्ष———————— शुक्ल
नक्षत्र———– धनिष्ठा 19:40:50
योग————- शूल 26:18:38
करण——- विष्टि भद्र 09:40:00
करण————– बव 20:31:57
वार———————– गुरूवार
माह———————- आश्विन
चन्द्र राशि—– मकर 08:26:46
चन्द्र राशि——————- कुम्भ
सूर्य राशि——————– कन्या
रितु————————– शरद
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर——————- शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————— नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————– 2078
शक संवत—————– 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 06:15:23
सूर्यास्त—————- 17:58:52
दिन काल————- 11:43:28
रात्री काल————- 12:17:01
चंद्रोदय—————- 16:05:30
चंद्रास्त—————- 27:23:12

लग्न—- कन्या 18°35′ , 168°35′

सूर्य नक्षत्र——————– हस्त
चन्द्र नक्षत्र—————— धनिष्ठा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

गी—- धनिष्ठा 08:26:46

गु—- धनिष्ठा 14:03:35

गे—-धनिष्ठा 19:40:50

गो—- शतभिष 25:18:38

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=कन्या 18 :49 हस्त , 3 ण
चन्द्र =मकर 28 °23, धनिष्ठा , 2 गी
बुध =कन्या 01 ° 34′ उ o फाo ‘2 टो
शुक्र=कन्या 14°05, हस्त ‘ 2 ष
मंगल=वृषभ 27°30 ‘ मृगशिरा’ 2 वो
गुरु=मीन 08°30 ‘ उ o भा o, 2 थ
शनि=मकर 24°43 ‘ धनिष्ठा ‘ 1 गा
राहू=(व) मेष 20°40’ भरणी , 3 ले
केतु=(व) तुला 20°40 विशाखा , 1 ती

राहू काल 13:35 – 15:03 अशुभ
यम घंटा 06:15 – 07:43 अशुभ
गुली काल 09:11 – 10:39 अशुभ
अभिजित 11:44 – 12:31 शुभ
दूर मुहूर्त 10:10 – 10:57 अशुभ
दूर मुहूर्त 14:51 – 15:38 अशुभ
वर्ज्यम 26:26* – 27:56* अशुभ

🚩पंचक 08:27 – अहोरात्र अशुभ

💮चोघडिया, दिन
शुभ 06:15 – 07:43 शुभ
रोग 07:43 – 09:11 अशुभ
उद्वेग 09:11 – 10:39 अशुभ
चर 10:39 – 12:07 शुभ
लाभ 12:07 – 13:35 शुभ
अमृत 13:35 – 15:03 शुभ
काल 15:03 – 16:31 अशुभ
शुभ 16:31 – 17:59 शुभ

🚩चोघडिया, रात
अमृत 17:59 – 19:31 शुभ
चर 19:31 – 21:03 शुभ
रोग 21:03 – 22:35 अशुभ
काल 22:35 – 24:07* अशुभ
लाभ 24:07* – 25:40* शुभ
उद्वेग 25:40* – 27:12* अशुभ
शुभ 27:12* – 28:44* शुभ
अमृत 28:44* – 30:16* शुभ

💮होरा, दिन
बृहस्पति 06:15 – 07:14
मंगल 07:14 – 08:13
सूर्य 08:13 – 09:11
शुक्र 09:11 – 10:10
बुध 10:10 – 11:09
चन्द्र 11:09 – 12:07
शनि 12:07 – 13:06
बृहस्पति 13:06 – 14:04
मंगल 14:04 – 15:03
सूर्य 15:03 – 16:02
शुक्र 16:02 – 17:00
बुध 17:00 – 17:59

🚩होरा, रात
चन्द्र 17:59 – 19:00
शनि 19:00 – 20:02
बृहस्पति 20:02 – 21:03
मंगल 21:03 – 22:05
सूर्य 22:05 – 23:06
शुक्र 23:06 – 24:07
बुध 24:07* – 25:09
चन्द्र 25:09* – 26:10
शनि 26:10* – 27:12
बृहस्पति 27:12* – 28:13
मंगल 28:13* – 29:14
सूर्य 29:14* – 30:16

🚩💮 उदयलग्न प्रवेशकाल 💮🚩

कन्या > 04:10 से 06:00 तक
तुला > 06:00 से 08:14 तक
वृश्चिक > 08:14 से 10:30 तक
धनु > 10:30 से 13:00 तक
मकर > 13:00 से 14:38 तक
कुम्भ > 14:38 से 16:06 तक
मीन > 16:06 से 16:40 तक
मेष > 16:40 से 18:14 तक
वृषभ > 18:14 से 21:00 तक
कर्क > 21:00 से 01:30 तक
सिंह > 01:30 से 03:50 तक

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-दक्षिण
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा केशर खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

11 + 5 + 1 = 17 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

शनि ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

11 + 11 + 5 = 27 ÷ 7 = 6 शेष

क्रीड़ायां = शोक, दुःख कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

प्रात: 09:40 तक समाप्त

पाताल लोक = धन लाभ कारक

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

* पापंकुशा एकादशी व्रत (सर्वेषां)

* राम भारत मिलाप

*पंचक 8:27 से आरम्भ

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

कान्ता वियोगः स्वजनापमानि ।
ऋणस्य शेषं कुनृपस्य सेवा ।।
दरिद्रभावो विषमा सभा च ।
विनाग्निना ते प्रदहन्ति कायम् ।।
।। चा o नी o।।

पत्नी का वियोग होना, आपने ही लोगो से बे-इजजत होना, बचा हुआ ऋण, दुष्ट राजा की सेवा करना, गरीबी एवं दरिद्रों की सभा – ये छह बातें शरीर को बिना अग्नि के ही जला देती हैं।

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविज्ञानयोग अo-13

प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः ।,
यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ॥,

और जो पुरुष सम्पूर्ण कर्मों को सब प्रकार से प्रकृति द्वारा ही किए जाते हुए देखता है और आत्मा को अकर्ता देखता है, वही यथार्थ देखता है॥,29॥,

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