Homeराशिफलमेष राशिफल 18 मई 2022

मेष राशिफल 18 मई 2022

***|| जय श्री राधे ||***

***  महर्षि पाराशर पंचांग *** 
*** अथ पंचांगम् *** 
****ll जय श्री राधे ll****

*** *** *** *** *** *** 

दिनाँक:-18/05/2022, बुधवार
तृतीया, कृष्ण पक्ष
वैशाख
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

 

*** दैनिक राशिफल *** 

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

मेष

आज का दिन आपके लिए आर्थिक दृष्टिकोण से उत्तम रहेगा। रोजगार मिलेगा। अप्रत्याशित लाभ होगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। विवाद न करें। नौकरी करने वालों को ऐच्छिक स्थानांतरण एवं पदोन्नति मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें। आपको पुराने झगड़े से मुक्ति मिलेगी। काफी संघर्षों के बाद आप परिवार में भी अपनी जगह बनाने में कामयाब रहेंगे। यदि आप भूमि,वाहन,मकान,दुकान आदि की खरीदारी करने जा रहे हैं,तो उसमें भी आपको भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। छोटे व्यापारी यदि किसी पार्ट टाइम कार्य को करने की योजना बना रहे हैं,तो वह उसके लिए समय निकालने में कामयाब रहेंगे। आप जीवनसाथी को कहीं घुमाने फिराने लेकर जा सकते हैं। ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति को यदि आपने धन उधार दिया तो वह आपके रिश्ते में दरार पैदा करा सकता है।

तिथि———– तृतीया 23:36:21 तक
पक्ष————————- कृष्ण
नक्षत्र———– ज्येष्ठा 08:08:35
योग————– सिद्ध 18:42:36
करण———– वणिज 13:17:17
करण——- विष्टि भद्र 23:36:21
वार———————— बुधवार
माह————————– ज्येष्ठ
चन्द्र राशि——- वृश्चिक 08:08:35
चन्द्र राशि——————— धनु
सूर्य राशि——————– वृषभ
रितु————————- ग्रीष्म
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर———————- नल
संवत्सर (उत्तर)—————– राक्षस
विक्रम संवत————— 2079
विक्रम संवत (कर्तक)——— 2078
शाका संवत—————- 1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:30:13
सूर्यास्त————— 19:01:21
दिन काल————- 13:31:07
रात्री काल———— 10:28:23
चंद्रास्त—————- 07:08:29
चंद्रोदय—————- 21:47:00

लग्न—- वृषभ 2°54′ , 32°54′

सूर्य नक्षत्र—————– कृत्तिका
चन्द्र नक्षत्र——————- ज्येष्ठा
नक्षत्र पाया———————ताम्र

*** पद, चरण *** 

यू—- ज्येष्ठा 08:08:35

ये—- मूल 13:29:41

यो—- मूल 18:51:11

भा—-मूल 24:13:13

*** ग्रह गोचर *** 

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=वृषभ 02:12 कृतिका , 2 ई
चन्द्र =वृश्चिक 28°23 , ज्येष्ठा , 4 यू
बुध =वृषभ 08 ° 07′ कृतिका ‘ 4 ए
शुक्र=मीन 23 °05, रेवती ‘ 3 च
मंगल=कुम्भ 00°30 ‘ पूoभाo’ 4 दी
गुरु=मीन 07°30 ‘ ऊ o भा o, 2 थ
शनि=कुम्भ 00°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 3 गु
राहू=(व) मेष 28°10’ कृतिका , 1 अ
केतु=(व) तुला 28°10 विशाखा , 3 ते

*** मुहूर्त प्रकरण *** 

राहू काल 12:16 – 13:57 अशुभ
यम घंटा 07:12 – 08:53 अशुभ
गुली काल 10:34 – 12:16 अशुभ
अभिजित 11:49 -12:43 अशुभ
दूर मुहूर्त 11:49 – 12:43 अशुभ

गंड मूल अहोरात्र अशुभ

चोघडिया, दिन
लाभ 05:30 – 07:12 शुभ
अमृत 07:12 – 08:53 शुभ
काल 08:53 – 10:34 अशुभ
शुभ 10:34 – 12:16 शुभ
रोग 12:16 – 13:57 अशुभ
उद्वेग 13:57 – 15:39 अशुभ
चर 15:39 – 17:20 शुभ
लाभ 17:20 – 19:01 शुभ

चोघडिया, रात
उद्वेग 19:01 – 20:20 अशुभ
शुभ 20:20 – 21:38 शुभ
अमृत 21:38 – 22:57 शुभ
चर 22:57 – 24:16* शुभ
रोग 24:16* – 25:34* अशुभ
काल 25:34* – 26:53* अशुभ
लाभ 26:53* – 28:11* शुभ
उद्वेग 28:11* – 29:30* अशुभ

होरा, दिन
बुध 05:30 – 06:38
चन्द्र 06:38 – 07:45
शनि 07:45 – 08:53
बृहस्पति 08:53 – 10:01
मंगल 10:01 – 11:08
सूर्य 11:08 – 12:16
शुक्र 12:16 – 13:23
बुध 13:23 – 14:31
चन्द्र 14:31 – 15:39
शनि 15:39 – 16:46
बृहस्पति 16:46 – 17:54
मंगल 17:54 – 19:01

होरा, रात
सूर्य 19:01 – 19:54
शुक्र 19:54 – 20:46
बुध 20:46 – 21:38
चन्द्र 21:38 – 22:31
शनि 22:31 – 23:23
बृहस्पति 23:23 – 24:16
मंगल 24:16* – 25:08
सूर्य 25:08* – 26:00
शुक्र 26:00* – 26:53
बुध 26:53* – 27:45
चन्द्र 27:45* – 28:37
शनि 28:37* – 29:30

*** उदयलग्न प्रवेशकाल *** 

वृषभ > 04:44 से 06:44 तक
मिथुन > 06:44 से 08:52 तक
कर्क > 08:52 से 11:10 तक
सिंह > 11:10 से 13:26 तक
कन्या > 13:26 से 05:38 तक
तुला > 05:38 से 05:50 तक
वृश्चिक > 05:50 से 08:02 तक
धनु > 08:02 से 22:04 तक
मकर > 22:04 से 11:44 तक
कुम्भ > 11:44 से 01:30 तक
मीन > 01:30 से 03:04 तक
मेष > 03:04 से 04:44 तक

विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान————-उत्तर
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो पान अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 3 + 4 + 1 = 23 ÷ 4 = 3 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

*** ग्रह मुख आहुति ज्ञान *** 

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

मंगल ग्रह मुखहुति

शिव वास एवं फल -:

18 + 18 + 5 = 41 ÷ 7 = 6 शेष

क्रीड़ायां = शोक, दुःख कारक

भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

13:17 से रात्रि 23:36 तक

पाताल लोक = धनलाभ कारक

*** विशेष जानकारी *** 

*विश्व संग्रहालय दिवस

*मां आनंदमयी जयन्ती

*** शुभ विचार *** 

यस्माच्च प्रियमिच्छेतु तस्य ब्रूयात्सदा प्रियम् ।
व्याधो मृगवधं गन्तुं गीतं गायति सुस्वरम् ।।
।। चा o नी o।।

यदि हम किसीसे कुछ पाना चाहते है तो उससे ऐसे शब्द बोले जिससे वह प्रसन्न हो जाए. उसी प्रकार जैसे एक शिकारी मधुर गीत गाता है जब वह हिरन पर बाण चलाना चाहता है.

*** सुभाषितानि *** 

गीता -: दैवासुरसम्पद्विभागयोग अo-16

काममाश्रित्य दुष्पूरं दम्भमानमदान्विताः।,
मोहाद्‍गृहीत्वासद्ग्राहान्प्रवर्तन्तेऽशुचिव्रताः॥,

वे दम्भ, मान और मद से युक्त मनुष्य किसी प्रकार भी पूर्ण न होने वाली कामनाओं का आश्रय लेकर, अज्ञान से मिथ्या सिद्धांतों को ग्रहण करके भ्रष्ट आचरणों को धारण करके संसार में विचरते हैं॥,10॥,

***  आपका दिन मंगलमय हो *** 
*** *** *** *** *** *** 
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

 

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