Homeराशिफलमेष राशिफल 16 मई 2022

मेष राशिफल 16 मई 2022

***|| जय श्री राधे ||***

*** महर्षि पाराशर पंचांग ***
*** अथ पंचांगम् ***
*** ll जय श्री राधे ll***
*** *** *** *** *** ***

दिनाँक:-16/05/2022, सोमवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
वैशाख
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

*** दैनिक राशिफल ***

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

मेष

आज का दिन आपके लिए मिश्रित रूप से फलदायक रहेगा। नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति होगी। यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल रहेंगे। परीक्षा आदि में सफलता मिलेगी। पारिवारिक कष्ट एवं समस्याओं का अंत संभव है। व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। आय से अधिक व्यय न करें। परोपकार में रुचि बढ़ेगी। दांपत्य जीवन में यदि कोई विरोध चल रहा था,तो वह समाप्त होगा और आप जीवनसाथी को कहीं घुमाने फिराने भी लेकर जा सकते हैं। यदि आप किसी व्यवसाय को साझेदारी में करना चाहते हैं,तो अपने आपको भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा,लेकिन किसी बड़े अधिकारी से अनबन से आपको नुकसान हो सकता है। मित्रों के साथ आप लंबी दूरी की यात्रा पर जाने की योजना बनाएंगे,जिसमें आपको पिताजी से सलाह मशवरा करके जाना बेहतर रहेगा,नहीं तो वह आपसे नाराज हो सकते हैं।

 

तिथि——— पूर्णिमा 09:43:12 तक
पक्ष———————— शुक्ल
नक्षत्र——— विशाखा 13:16:50
योग———- वरियान 06:15:46
योग———— परिघ 26:29:36
करण————– बव 09:43:12
करण————बालव 20:05:35
वार———————– सोमवार
माह———————— वैशाख
चन्द्र राशि——– तुला 07:52:47
चन्द्र राशि—————— वृश्चिक
सूर्य राशि——————– वृषभ
रितु————————– ग्रीष्म
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर———————– नल
संवत्सर (उत्तर)—————– राक्षस
विक्रम संवत—————- 2079
विक्रम संवत (कर्तक)———- 2078
शाका संवत—————–1944

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:31:15
सूर्यास्त—————- 19:00:12
दिन काल————- 13:28:57
रात्री काल————- 10:30:31
चंद्रास्त—————- 05:50:27
चंद्रोदय—————- 19:24:54

लग्न—- वृषभ 0°58′ , 30°58′

सूर्य नक्षत्र—————– कृत्तिका
चन्द्र नक्षत्र—————- विशाखा
नक्षत्र पाया——————- रजत

*** पद, चरण ***

ते—- विशाखा 07:52:47

तो—- विशाखा 13:16:50

ना—- अनुराधा 18:39:58

नी—- अनुराधा 24:02:19

नू—- अनुराधा 29:24:03

*** ग्रह गोचर ***

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य=वृषभ 00:12 कृतिका , 2 ई
चन्द्र =तुला 28°23 , विशाखा, 3 ते
बुध =वृषभ 09 ° 07′ कृतिका ‘ 4 ए
शुक्र=मीन 21 °05, रेवती ‘ 2 दो
मंगल=कुम्भ 29°30 ‘ पूoभाo’ 3 दा
गुरु=मीन 06°30 ‘ ऊ o भा o, 1 दू
शनि=कुम्भ 00°33 ‘ धनिष्ठा ‘ 3 गु
राहू=(व) मेष 28°10’ कृतिका , 1 अ
केतु=(व) तुला 28°10 विशाखा , 3 ते

*** मुहूर्त प्रकरण ***

राहू काल 07:12 – 08:54 अशुभ
यम घंटा 10:35 – 12:16 अशुभ
गुली काल 13:57 – 15:38 अशुभ
अभिजित 11:49 -12:43 शुभ
दूर मुहूर्त 12:43 – 13:37 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:24 – 16:18 अशुभ

*** चोघडिया, दिन***
अमृत 05:31 – 07:12 शुभ
काल 07:12 – 08:54 अशुभ
शुभ 08:54 – 10:35 शुभ
रोग 10:35 – 12:16 अशुभ
उद्वेग 12:16 – 13:57 अशुभ
चर 13:57 – 15:38 शुभ
लाभ 15:38 – 17:19 शुभ
अमृत 17:19 – 19:00 शुभ

*** चोघडिया, रात ***
चर 19:00 – 20:19 शुभ
रोग 20:19 – 21:38 अशुभ
काल 21:38 – 22:57 अशुभ
लाभ 22:57 – 24:15* शुभ
उद्वेग 24:15* – 25:34* अशुभ
शुभ 25:34* – 26:53* शुभ
अमृत 26:53* – 28:12* शुभ
चर 28:12* – 29:31* शुभ

*** होरा, दिन ***
चन्द्र 05:31 – 06:39
शनि 06:39 – 07:46
बृहस्पति 07:46 – 08:54
मंगल 08:54 – 10:01
सूर्य 10:01 – 11:08
शुक्र 11:08 – 12:16
बुध 12:16 – 13:23
चन्द्र 13:23 – 14:31
शनि 14:31 – 15:38
बृहस्पति 15:38 – 16:45
मंगल 16:45 – 17:53
सूर्य 17:53 – 19:00

***  होरा, रात ***
शुक्र 19:00 – 19:53
बुध 19:53 – 20:45
चन्द्र 20:45 – 21:38
शनि 21:38 – 22:30
बृहस्पति 22:30 – 23:23
मंगल 23:23 – 24:15
सूर्य 24:15* – 25:08
शुक्र 25:08* – 26:01
बुध 26:01* – 26:53
चन्द्र 26:53* – 27:46
शनि 27:46* – 28:38
बृहस्पति 28:38* – 29:31

*** उदयलग्न प्रवेशकाल ***

मेष > 03:04 से 04:44 तक
वृषभ > 04:44 से 06:44 तक
मिथुन > 06:44 से 08:52 तक
कर्क > 08:52 से 11:10 तक
सिंह > 11:10 से 13:26 तक
कन्या > 13:26 से 05:38 तक
तुला > 05:38 से 05:50 तक
वृश्चिक > 05:50 से 08:02 तक
धनु > 08:02 से 22:04 तक
मकर > 22:04 से 11:44 तक
कुम्भ > 11:44 से 01:30 तक
मीन > 01:30 से 03:04 तक

*** विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार ***

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 2 + 1 = 18 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

*** ग्रह मुख आहुति ज्ञान ***

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

चन्द्र ग्रह मुखहुति

शिव वास एवं फल -:

15 + 15 + 5 = 35 ÷ 7 = 0 शेष

शमशान वास = मृत्यु कारक

भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

*** विशेष जानकारी ***

*वैशाखी पूर्णिमा

*पीपल पूर्णिमा

*बुद्ध जयंती

*सर्वार्थ सिद्धि योग 13:17 से

*** शुभ विचार ***

उत्पन्नपश्चात्तापस्य बुध्दिर्भवति यादृशी ।
तादृशी यदि पूर्वं स्यात्कस्य स्यान्न महोदयः ।।
।। चा oनी o।।

वह व्यक्ति क्यों पूर्णता नहीं हासिल करेगा जो पश्चाताप में जो मन की अवस्था होती है, उसी अवस्था को काम करते वक़्त बनाए रखेंगा.

*** सुभाषितानि ***

गीता -: दैवासुरसम्पद्विभागयोग अo-16

असत्यमप्रतिष्ठं ते जगदाहुरनीश्वरम्‌।,
अपरस्परसम्भूतं किमन्यत्कामहैतुकम्‌॥,

वे आसुरी प्रकृति वाले मनुष्य कहा करते हैं कि जगत्‌ आश्रयरहित, सर्वथा असत्य और बिना ईश्वर के, अपने-आप केवल स्त्री-पुरुष के संयोग से उत्पन्न है, अतएव केवल काम ही इसका कारण है।, इसके सिवा और क्या है?॥,8॥,

*** आपका दिन मंगलमय हो ***
*** *** *** *** *** *** *** 
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)

 

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