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Earthquake January 24: दिल्ली-एनसीआर से यूपी व उत्तराखंड तक कांपी धरती, 5.8 थी भूकंप की तीव्रता

आज समाज डिजिटल, नई दिल्ली, (Earthquake January 24): दिल्ली-एनसीआर से उत्तराखंड तक मंगलवार को भूकंप के तगड़े झटके महसूस किए गए। रिएक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.8 मापी गई। भूकंप के तेज झटकों के चलते कुछ सेकेंड तक धरती हिलती रही। दिल्ली के साथ ही हरियाणा, उत्तर प्रदेश व बिहार में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इसी के साथ सीमा से सटे चीन के कई इलाकों में भी झटके महसूस किए गए। दिल्ली व अन्य जगहों पर दहशत के चलते लोग दफ्तरों व अपने घरों से बाहर आ गए। सूत्रों के अनुसार भूकंप का केन्द्र नेपाल के कालिका से 12 किलोमीटर दूर था।

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राजधानी दिल्ली में भूकंप की यह तीसरी घटना

नए साल की शुरुआत से लेकर अब तक देश की राजधानी दिल्ली में भूकंप की यह तीसरी घटना है। इससे पहले पांच जनवरी को दिल्ली-एनसीआर और जम्मू-कश्मीर में शाम के समय 7:56 बजे भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.9 थी और केंद्र अफगानिस्तान के फैजाबाद से 79 किलोमीटर दूर हिंदू कुश इलाका था।

नए साल के पहले दिन भी देर रात आया था भूकंप

दिल्ली में नए साल के पहले दिन भी देर रात भूकंप आया था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक इसकी तीव्रता 3.8 तीव्रता मापी गई थी और इसका केंद्र हरियाणा के झज्जर में जमीन से 5 किमी नीचे थी। हालांकि इसमें कोई नुकसान नहीं हुआ था। इससे पहले 29 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।

उस समय तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.5 मापी गई थी। दिल्ली का पश्चिमी क्षेत्र भूकंप का केंद्र रहा था, जिसकी गहराई 5 किलोमीटर थी। 12 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। उस समय दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, बिजनौर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।

दिल्ली-एनसीआर में हैं 3 फॉल्ट लाइन

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में तीन फॉल्ट लाइन हैं। बता दें कि जहां फॉल्ट लाइन होती है, वहीं पर भूकंप का केंद्र बनता है। दिल्ली-एनसीआर में जमीन के नीचे दिल्ली-मुरादाबाद, मथुरा और सोहना फॉल्ट लाइन हैं। भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक भूकंप की असली वजह टेक्टोनिकल प्लेटों में तेज हलचल होती है। इसके अलावा उल्का प्रभाव व ज्वालामुखी विस्फोट, माइन टेस्टिंग और न्यूक्लियर टेस्टिंग की वजह से भी भूकंप आते हैं।

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