Legally News: पत्नी की कमाई अगर पति से ज्यादा तो नही मिलेगा गुजारा भत्ता: मुम्बई के सेशन अदालत का फ़ैसला

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मुम्बई के सेशन अदालत का फ़ैसला
मुम्बई के सेशन अदालत का फ़ैसला

Aaj Samaj (आज समाज),Legally News, नई दिल्ली :

7* पत्नी की कमाई अगर पति से ज्यादा तो नही मिलेगा गुजारा भत्ता: मुम्बई के सेशन अदालत का फ़ैसला

मुंबई की सेशन कोर्ट ने पति-पत्नी के अलग होने के बाद गुजारा भत्ता दिए जाने के मामले में महिला को अंतरिम गुजारा भत्ता देने के मामले में राहत देने से इनकार कर दिया। दरसअल मुम्बई की ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में आदेश दिया था कि महिला अपने पूर्व पति से ज्यादा कमाती है इसलिए उसे गुजारा भत्ता नहीं मिलेगा। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को महिला ने सेशन कोर्ट में चुनोती दी, सेशन कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा था कि महिला की इनकम अपने पूर्व पति से चार लाख रुपये ज्यादा है।

मामले की सुनवाई के दौरान जज सीवी पाटिल ने कहा, ‘इस केस में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जो फैसला किया है वह परिस्थितियों को देखते हुए सही है।क्योंकि महिला की इनकम अपने पूर्व पति से चार लाख रुपये ज्यादा है,”। महिला ने साल 2021 में अपने ससुराल वालों के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस फाइल किया था।उसका कहना था कि बच्चे के जन्म के बाद उसे जबरदस्ती मायके भेज दिया गया।इसके बाद एक कोर्ट ने पति से 10 हजार रुपये का गुजारा भत्ता हर महीने देने को कहा था, जिससे कि बच्चे का पालन-पोषण हो सके।

महिला ने अपनी याचीका में कहा था कि जब वह गर्भवती हुई तो वह अपने पति के साथ रह रही थी।उसने यह दावा किया कि उसके पति का यौन अक्षमता के लिए इलाज किया जा रहा था,लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी थी। जब उसके गर्भवती होने की बात पति और उसके परिजनों को पता चली तो उन्होंने उसके चरित्र पर शक किया।

अदालत ने कहा कि यह बात सही है कि कमाऊ महिला को भी गुजारा भत्ता दिया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में परिस्थितियों पर गौर करना बेहद जरूरी है।अगर महिला अपने पूर्व पति से ज्यादा कमा रही है तो उसे गुजारे भत्ते की जरूरत नहीं है हालांकि अगर पति ज्यादा भी कमा रहा हो तो भी परिस्थितियों को देखना जरूरी है।

8*ज्वाइंट प्रॉपर्टी से तलाकशुदा बहन को बेदखल नहीं कर सकते, गुजरात की एक कोर्ट ने सुनाया फैसला*

एक महिला को संयुक्त रूप से स्वामित्व वाली संपत्ति से बाहर निकालना घरेलू हिंसा के बराबर है। गुजरात की एक मजिस्ट्रेट की अदालत ने परिस्थितियों को बारीकी से परखा और एक महिला के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि बहन तलाकशुदा है और 23 साल से साथ में रह रही है। इतना ही नहीं उसने जिस घर में रह रही है उस घर की पगड़ी का पैसा भी दिया है। इसलिए भाई और भाभी उसे घर से नहीं निकाल सकते। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पीड़िता बहन को उसके भाई और भाभी अपने घर से न निकालें।

केस के अनुसार पीड़िता बहन 23 साल पहले अपने तलाक के बाद अपने माता-पिता के घर वापस चली आई थी। उसने अदालत को बताया कि 2016 में उसके भाई की शादी के बाद, उसकी पत्नी और उसने उसका  शोषण करना शुरू कर दिया और बार-बार उसे अपने घर से बाहर निकाल दिया।

महिला ने 2020 में घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई थी। उसने कहा कि उसके दो अन्य भाई अलग-अलग रहते हैं। उसने कहा कि उनके पिता की मृत्यु के बाद, गुजरात के नवसारी में अचल और चल संपत्तियों को महिला और उसके तीन भाइयों द्वारा समान रूप से बेचा और साझा किया गया। महिला ने कहा कि चूंकि वह तलाकशुदा थी इसके बावजूद उसने भाई के साथ पगड़ी प्रथा के तहत एक साथ फ्लैट लिया और वहीं रहती थी। उसने कहा कि किराए की रसीद पर पहला नाम उसका है और दूसरा उसके भाई का है। उसने किरायेदारी के लिए 5 लाख रुपये का योगदान दिया था।

उसने कहा कि उसकी भाभी छोटी-छोटी बातों पर उससे झगड़ा करती थी। उसने यह भी कहा कि उसकी भाभी उसे घर से बेदखल करना चाहती थी और उसके भाई को उकसाना शुरू कर दिया। महिला ने कहा कि भाभी ने उसे घर से निकालने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया।

22 मार्च 2018 को उसके भाई ने जबरदस्ती उसे घर से निकाल दिया। महिला ने कहा कि वह दो-तीन दिनों के लिए दादर के एक धार्मिक मंडल में गई और घर लौट आई। उसने कहा कि उसके भाई और उसकी पत्नी ने उसे धमकी दी और मारपीट की। जुलाई 2018 में उसकी भाभी ने चाकू लेकर उसका हाथ पकड़ लिया और घर से निकल जाने को कहा और जान से मारने की धमकी दी। उसे मंडल में वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

भाई ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि उसने संपत्ति खरीदी थी और चूंकि वह उसकी बड़ी बहन थी, इसलिए उसने उसका नाम इसमें जोड़ दिया। उसने यह भी कहा कि उसने उसके चिकित्सा खर्चों का ध्यान रखा था और आरोप लगाया कि उसने अपनी पत्नी के साथ छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करना शुरू कर दिया था। उसने कहा कि वह खुद चली गई थी और अपने दूसरे भाई के साथ रहने चली गई थी।

9 *वकील साहब ने Chat GPT का अदालत में किया इस्तेमाल, गलत तर्क देने लगे अदालत ने फटकारा*

चैट जीपीटी एक ऐसा विषय है जो हर टेक्नोसेवी की जुबान पर है। बिजनैसमेन, कॉरपोरेट या फिर वकील हो या मीडिया चैट जीपीटी हर कोई भरपूर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ये टूल कभी-कभी अर्थ का अनर्थ भी कर देते हैं और फिर  भारी फजीहत का सामना करना पड़ता है।

हाल ही में न्यूयॉर्क से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर खबर सामने आई थी। इस मामले में,स्टीवन नाम के वकील ने अपने कोर्ट में बहस के दौरान  मदद के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। लेकिन यह कारगर नहीं हुआ। वकील इस बात से अनजान थे कि चैटजीपीटी तथ्यों के आधार पर जवाब नहीं देता है। वकील को मशीन से गलत जानकारी मिली। इसी आधार पर उसने कोर्ट में दलील पेश की। जज ने अप्रासंगिक तथ्यों पर अदालत का समय बर्बाद करने के लिए वकील को फटकार लगाई। बहरहाल, वकील साहब मांफी मांगकर कोर्ट रूम से बाहर आ गए।
एडवोकेट स्टीवन इससे पहले एक एयरलाइंस का मुकदमा लड़ते वक्त 6 बार चैटजीपीटी का यूज कर चुके थे।
जब स्टीवन से इन मामलों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया था और उनसे उनके बारे में जानकारी प्राप्त की थी। जज द्वारा फटकार लगाने के बाद स्टीवन ने अपने बचाव में दावा किया कि वह इस बात से अनजान थे कि चैटजीपीटी गलत जानकारी प्रदान कर रहा है। इस मामले के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर सवाल उठने लगे। बहरहाल, एडवोकेट स्टीवन ने मांगी और पीछा छुड़ाया।

10 *यासीन मलिक को होगी फांसी की सजा या नहीं, एनआईए की अपील पर 9 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में फिर बहस*

यासीन मलिक फांसी दिए जाने की मांग वाली एनआईए की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने यासीन मलिक को नोटिस जारी किया है। हालांकि एनआईए के वकील तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के इस आदेश का यह कह कर विरोध किया कि अगर ओसामा बिन लादेन पर मुकदमा चलाया जाता तो उसे भी अपना गुनाह कबूलने की इजाजत मिल जाती! तुषार मेहता के इस तर्क पर जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने कहा कि हम इसकी तुलना ओसामा बिन लादेन से नहीं कर सकते क्योंकि उसने कहीं भी मुकदमे का सामना नहीं किया। हाईकोर्ट ने निचली अदालत में चले मुकदमे की कार्रवाई का रिकॉर्ड भी तलब किया है।

एनआईए की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस मृदुल सिन्हा और जस्टिस तलबंत सिंह की पीठन ने कहा कि यासीन मलिक को अपना जवाब दाखिल करने के साथ खुद हाईकोर्ट में पेश होना होगा जिसके लिए प्रोडक्शन वारंट तिहाड़ जेल प्रशासन के जरिए उसे सुनवाई के दौरान मौजूद कराने का निर्देश दिया गया है।

इससे पहले एनआईए की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा मलिक वायुसेना के चार जवानों की हत्या में शामिल रहा। उसके सहयोगियों ने तत्कालीन गृह मंत्री की रुबिया सईद का अपहरण किया। उसके बाद उसके अपहरणकर्ताओं को छोड़ा गया जिन्होंने बाद में मुंबई बम ब्लास्ट को अंजाम दिया। तुषार मेहता ने आगे तर्क रखा कि IPC की धारा 121 के तहत दर्ज मामला देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का बनता है, जिसमे फांसी की सज़ा का प्रावधान है।

इस पर कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि निचली अदालतके आदेश में 4 वायु सेना के अधिकारियों की हत्या का जिक्र कहाँ है ! इसमे तो पत्थरबाजी में शमिल होने की बात कहीं गई है। इसके अलावा दिल्ली हाई कोर्ट ने एनआईए से पूछा कि ट्रायल कोर्ट का वह ऑर्डर बतायें जिसमें यासीन ने किस किस चार्ज पर गुनाह स्वीकार किया है।

इसके बाद कोर्ट ने दोपहर सवा बारह बजे तक के लिए कोर्ट स्थगित कर दी। जब दोबार सुनवाई हुई तो सॉलिसिटर जनरल और कोर्ट के बीच फिर तर्क हुए। अंत में कोर्ट ने यासीन मलिक को प्रोड्यूस करने के नोटिस जारी कर दिए और मामले की सुनवाई की तारीख 9 अगस्त तय की है।

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