Homeत्योहारकामदा एकादशी 12 अप्रैल को Kamada Ekadashi On 12th April

कामदा एकादशी 12 अप्रैल को Kamada Ekadashi On 12th April

सर्वार्थ सिद्धि योग 12 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 59 मिनट से लेकर 13 अप्रैल सुबह 08 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। कामदा एकादशी व्रत पारण का समय 13 अप्रैल को दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से शाम 04 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।

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हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हिंदू नववर्ष के पहले माह में पड़ने वाली एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान के साथ पूजा करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। एकादशी के दिन प्रभु श्रीहरि की पूजा करने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी  (Kamada Ekadashi) कहते हैं। साल में कुल 24 एकादशी आती हैं। हर माह के शुक्ल व कृष्ण पक्ष को एकादशी व्रत रखा जाता है। इस दिन व्रत करने से हजारों सालों की तपस्या का फल मिलता है।

कामदा एकादशी शुभ मुहूर्त    

इस साल कामदा एकादशी 12 अप्रैल 2022 को है। एकादशी तिथि 12 अप्रैल दिन मंगलवार को सुबह 04 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 13 अप्रैल, बुधवार को सुबह 05 बजकर 02 मिनट पर रहेगी। कामदा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग 12 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 59 मिनट से लेकर 13 अप्रैल सुबह 08 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। कामदा एकादशी व्रत पारण का समय 13 अप्रैल को दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से शाम 04 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।  

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कामदा एकादशी व्रत पूजा विधि 

इस दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
मंदिर में देवी- देवताओं को स्नान कराने के बाद साफ स्वच्छ वस्त्र पहनाएं।
अगर आप व्रत कर सकते हैं तो व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु का ध्यान करें।
भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
भगवान विष्णु को भोग लगाएं। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाता है।

 Kamada Ekadashi On 12th April
पंचामृत से भगवान के स्नान का मंत्र:  Kamada Ekadashi On 12th April
पयोदधिघृतं चैव मधु च शर्करायुतं।
पंचामृतं मयानीतं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ॥

पंचामृत के लिए आवश्यक सामग्री:

गाय का दूध, गाय का दही, गाय का घी, शहद] मिश्री अथवा शक्कर
तुलसी के पत्ते, चाँदी के कटोरी

पंचामृत बनाने की विधि

एक चम्मच शहद, एक चम्मच मिश्री, एक चम्मच गाय का घर का बना दही और इसे आपस मे मिलाते है। उसके बाद गाय घी तथा गाय का चार चम्मच कच्चा दूध मिला लेते हैं। इस तरह आपका पंचामृत उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।

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